बीते 24 फरवरी को झारखंड में एक एयर एंबुलेंस क्रैश हो गई थी, जिसमें सात लोगों की जान चली गई थी. यह एयर एंबुलेंस 'रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी की थी. हादसे की जांच अभी चल ही रही है कि इसी बीच झारखंड सरकार ने इसी कंपनी को छह महीने का एक्सटेंशन दे दिया है.
विधानसभा में सवाल किए जाने पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने एक्सटेंशन की बात को सिरे से खारिज कर दिया, लेकिन कैबिनेट के निर्णय से साफ पता चलता है कि कंपनी को विस्तार दिया गया है. झारखंड में अब इस मामले पर राजनीतिक उबाल देखने को मिल रहा है.
क्रैश के दिन क्या हुआ था.
दरअसल 24 फरवरी को एक बर्न केस से संबंधित मरीज को एयरलिफ्ट करके दिल्ली के एक अस्पताल में पहुंचाना था. ऐसे आपातकालीन स्वास्थ्य मामलों में झारखंड सरकार 50 प्रतिशत सब्सिडी देती है. हालांकि, विमान कंपनी के लोगों ने तर्क दिया कि मरीज 30 प्रतिशत से अधिक जल चुका है, इसलिए सब्सिडी का लाभ देते हुए एयरलिफ्ट नहीं कर पाएंगे. चौंकाने वाली बात यह है कि जब मरीज के परिजनों ने कंपनी को 8 लाख रुपए दिए, तो वह एयरलिफ्ट के लिए तैयार हो गई.
विमान ने बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से शाम करीब 7:11 बजे उड़ान भरी. उड़ान के लगभग 20–25 मिनट बाद पायलट ने खराब मौसम के कारण रूट बदलने की अनुमति मांगी. इसके तुरंत बाद विमान का रडार से संपर्क टूट गया और वह चतरा जिले के सिमरिया इलाके के घने जंगलों में क्रैश हो गया. हादसे में 2 पायलट, 2 मेडिकल स्टाफ (डॉक्टर और पैरामेडिक), 1 गंभीर रूप से घायल मरीज और दो परिजनों समेत सभी 7 लोगों की मौत हो गई. यह जीवन रक्षक मिशन एक दर्दनाक हादसे में बदल गया.
शुरुआती जांच में तूफान और टर्बुलेंस को दुर्घटना का प्रमुख कारण माना जा रहा है. साथ ही, विमान लगभग 39 साल पुराना था और साल 2018 से 2022 के बीच इस्तेमाल में नहीं था. विमान में ब्लैक बॉक्स (CVR/FDR) नहीं था, जिससे जांच और मुश्किल हो रही है. जाहिर है कि जांच एजेंसियों को हादसे का सटीक कारण पता लगाने में लंबा समय लगेगा. यहां तक कि क्रैश हुए विमान का इंजन भी हादसे के 21 दिन बाद जंगल से बरामद हुआ. ध्यान देने वाली बात यह भी है कि मरीज के परिजनों को पैसे जुटाने में 4 घंटे लगे, जिससे विमान ने देरी से उड़ान भरी और वह खराब मौसम में फंसकर हादसे का शिकार हो गया.
एक्सटेंशन से पहले जांच पूरी होने का इंतजार भी नहीं
इन तमाम सवालों और जांच के दायरे में होने के बावजूद झारखंड सरकार ने रेडबर्ड एयरवेज को एयर एंबुलेंस सुविधा के लिए अगले छह माह के लिए फिर से अधिकृत कर दिया. बीते 12 मार्च को हुई कैबिनेट की बैठक के बाद सचिव वंदना दादेल ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि रेडबर्ड एयरवेज को राज्य के VIP/VVIP उड़ान के लिए छह माह का विस्तार दिया गया है. इसके बावजूद इरफान अंसारी ने 14 मार्च को बजट सत्र के दौरान सदन को बताया कि एक्सटेंशन को होल्ड कर दिया गया है. उन्होंने सदन के बाहर मीडिया को भी यही बयान दिया. हालांकि, उनके बयान के महज दो दिन बाद 16 मार्च को कैबिनेट के संकल्प को संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर के बाद जारी कर दिया गया.
यही नहीं, घटना के तत्काल बाद डॉ. इरफान अंसारी ने कहा था, "मेरी जानकारी के मुताबिक यह एयरक्राफ्ट कंपनी ठीक नहीं थी. इसकी जांच चल रही है. मैं साफ कह देता हूं कि इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे."
इधर, कॉन्ट्रैक्ट विस्तार वित्त विभाग की नियमावली में ढील देते हुए दिया गया है. जबकि नियमानुसार किसी भी बड़े काम के लिए टेंडर निकालने का प्रावधान है. सरकार ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए मनोनयन के आधार पर कैबिनेट की स्वीकृति लेकर रेडबर्ड को कॉन्ट्रैक्ट विस्तार दिया. पूर्व में भी VIP और VVIP उड़ानों के लिए रेडबर्ड के साथ राज्य सरकार का अनुबंध था, जो 5 नवंबर 2025 को ही समाप्त हो चुका था. इसके बावजूद रेडबर्ड ही सेवाएं उपलब्ध कराती आ रही थी. रेडबर्ड एयरवेज दिल्ली की एक कंपनी है. 2018 में स्थापित इस कंपनी के मालिक एक उद्यमी अक्षय कुमार हैं.
कैबिनेट की स्वीकृति के अनुसार, रेडबर्ड VIP और VVIP उड़ानों के लिए एक टर्बो प्रॉप ट्विन इंजन (B-250/B-200) GT विमान उपलब्ध कराएगा. यह टू प्लस फाइव सीटर विमान होगा. इसके लिए राज्य सरकार प्रति घंटा 1.60 लाख रुपए का भुगतान करेगी. विमान के उड़ान नहीं भरने पर भी कंपनी को प्रति माह न्यूनतम 60 घंटे का भुगतान किया जाएगा. इस आधार पर कंपनी को प्रति माह अधिकतम 96 लाख और छह महीने के लिए 5.76 करोड़ रुपए का भुगतान होगा. दूसरी ओर, हादसे का शिकार हुए लोगों को घोषणा के बावजूद अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है.
जाहिर है, इस पर सवाल उठने और हंगामा होना तय था. विधानसभा के बजट सत्र के दौरान BJP विधायकों ने यह मुद्दा उठाया. BJP विधायक शशिभूषण मेहता ने कहा, "वह बहुत पुराना विमान था और उसका रखरखाव भी सही नहीं था. यही वजह है कि घटना के तुरंत बाद कंपनी रांची स्थित अपना ऑफिस बंद कर भाग गई." पार्टी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि कंपनी का एक्सटेंशन न केवल रद्द होना चाहिए, बल्कि उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी होनी चाहिए. जवाब में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर का कहना है, "कंपनी की लापरवाही की जांच DGCA कर रही है. जब तक जांच एजेंसी यह तय नहीं करती कि कंपनी को भविष्य में काम नहीं दिया जा सकता, तब तक हम कोई फैसला नहीं ले सकते."
बहरहाल, इस हादसे ने सिस्टम और सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पहला, क्या छोटे विमानों में भी ब्लैक बॉक्स अनिवार्य होना चाहिए? वर्तमान नियमों में यह जरूरी नहीं है, लेकिन इससे जांच प्रभावित होती है. दूसरा, क्या इतने पुराने विमानों का इस्तेमाल सुरक्षित है? तीसरा, खराब मौसम में उड़ान के प्रोटोकॉल क्या हैं और क्या पर्याप्त निगरानी की गई थी? साथ ही, क्या पायलट पर दबाव था? पायलट के परिजनों का कहना है कि वह अगले दिन छुट्टी पर जाने वाला था. फिलहाल पूरे मामले की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रही है. ब्लैक बॉक्स की अनुपस्थिति और निजी कंपनियों के रसूख के बीच यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि कितने सवालों के सही जवाब मिल पाएंगे.

