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यूपी की अर्थव्यवस्था को उड़ान दे पाएगा जेवर एयरपोर्ट?

15 जून से शुरू हुआ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उद्योग, कृषि, निर्यात, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ने और प्रदेश को वैश्विक निवेश और व्यापार का नया द्वार मिलने की संभावना जताई जा रही है

172 किसानों ने एयरपोर्ट के लिए दी है अपनी जमीन. (Photo: ITG)
जेवर एयरपोर्ट की पहली फ्लाइट का स्वागत
अपडेटेड 16 जून , 2026

जून की 15 तारीख को जब जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लखनऊ के लिए पहली उड़ान रवाना हुई तो यह केवल एक विमान सेवा की शुरुआत नहीं थी बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास के नए अध्याय का उद्घाटन भी था.

इस ऐतिहासिक उड़ान के यात्री वे किसान थे जिन्होंने एयरपोर्ट निर्माण के लिए अपनी जमीनें दी थीं. अपने गांव की जमीन से पहली बार हवाई जहाज में बैठकर राजधानी पहुंचने वाले किसानों के चेहरों पर गर्व और भावुकता साफ दिखाई दे रही थी.

यह दृश्य उस विकास मॉडल का प्रतीक था जिसमें स्थानीय लोगों को केवल दर्शक नहीं बल्कि भागीदार बनाया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू हुआ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, उद्योग, पर्यटन, कृषि और वैश्विक व्यापार को नई दिशा देने वाला केंद्र बनकर उभर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह एयरपोर्ट केवल एक परिवहन सुविधा नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश की आर्थिक संरचना को बदलने वाला ग्रोथ इंजन साबित होगा.

50 साल बाद मिली नोएडा को स्वतंत्र पहचान

1976 में स्थापित नोएडा देश के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक और आईटी केंद्रों में शामिल है लेकिन विडंबना यह रही कि आधी सदी तक इसकी कोई स्वतंत्र हवाई पहचान नहीं बन सकी. दूसरे शहरों से आने वाले लोगों को दिल्ली के एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता था. अब स्थिति बदल चुकी है. एयरपोर्ट शुरू होते ही नोएडा सीधे लखनऊ, मुंबई, बेंगलुरु और अमृतसर से जुड़ गया है. अगले कुछ दिनों में जम्मू, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, पुणे, जयपुर और वाराणसी सहित 25 से अधिक शहरों के लिए उड़ानें शुरू होने जा रही हैं.

अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शुरू होने के बाद दुबई, सिंगापुर, बैंकाक और लंदन जैसे वैश्विक शहर भी सीधे जुड़ जाएंगे. नोएडा के आर्थिक विश्लेषक अजय श्रीवास्तव कहते हैं कि किसी भी क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक अर्थव्यवस्था के लिए तेज कनेक्टिविटी सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है. नोएडा एयरपोर्ट ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से सीधे जोड़ने का काम किया है. इसका असर आने वाले वर्षों में निवेश और रोजगार के रूप में दिखाई देगा.

11 हजार करोड़ की परियोजना बनेगी आर्थिक ग्रोथ इंजन

करीब 11 हजार करोड़ रुपए की लागत से विकसित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन माना जा रहा है. एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग कॉम्प्लेक्स, औद्योगिक क्लस्टर, बिजनेस हब और नई टाउनशिप का तेजी से विकास हो रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार एयरपोर्ट किसी क्षेत्र में केवल यातायात सुविधा नहीं देता, बल्कि उसके आसपास संपूर्ण आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करता है. यही कारण है कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास क्षेत्र में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है.

क्रेडाई वेस्टर्न यूपी के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता का कहना है कि नोएडा एयरपोर्ट पूरे यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के लिए आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है. उद्योग, व्यापार, सेवा क्षेत्र और आवासीय विकास में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा. इससे हजारों प्रत्यक्ष और लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे.

नोएडा एयरपोर्ट का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलने की उम्मीद है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में फल, सब्जियां, फूल तथा बागवानी उत्पादों का बड़ा उत्पादन होता है. आगरा, फिरोजाबाद, एटा, इटावा, कानपुर और मध्य प्रदेश के ग्वालियर क्षेत्र तक के किसानों को अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच का नया रास्ता मिलेगा. कार्गो टर्मिनल, कोल्ड चेन नेटवर्क और आधुनिक भंडारण सुविधाएं कृषि उत्पादों को कम समय में विदेशी बाजार तक पहुंचाने में मदद करेंगी.

मध्य पूर्व और पश्चिमी एशियाई देशों में भारतीय फलों और सब्जियों की बढ़ती मांग का लाभ प्रदेश के किसानों को सीधे मिल सकता है. कृषि अर्थशास्त्री के. एम. सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादों की सबसे बड़ी चुनौती बाजार तक समय पर पहुंच है. एयर कार्गो सुविधा मिलने से किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और कृषि निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

ओडीओपी और एमएसएमई को मिलेगी नई ताकत

उत्तर प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना पहले ही प्रदेश के पारंपरिक उद्योगों को नया बाजार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. नोएडा एयरपोर्ट इस अभियान को और गति देगा. मुरादाबाद का पीतल उद्योग, भदोही के कालीन, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, सहारनपुर की लकड़ी नक्काशी, कानपुर का चमड़ा उद्योग और वाराणसी की बनारसी साड़ी जैसे उत्पाद अब तेजी से अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंच सकेंगे.

एमएसएमई विशेषज्ञ अमित अग्रवाल का कहना है कि निर्यात आधारित उद्योगों के लिए समय और लॉजिस्टिक्स लागत बेहद महत्वपूर्ण होती है. एयरपोर्ट के माध्यम से छोटे उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निर्यात में नई संभावनाएं खुलेंगी. गौतमबुद्ध नगर पहले ही देश के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बन चुका है. देश में बनने वाले लगभग 50 प्रतिशत मोबाइल फोन इसी क्षेत्र में निर्मित हो रहे हैं.

इसके अलावा सेमीकंडक्टर और मेडिकल डिवाइस निर्माण से जुड़े बड़े निवेश भी यहां आ रहे हैं. एयरपोर्ट के कारण उच्च मूल्य वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और तकनीकी उपकरणों के आयात-निर्यात की प्रक्रिया आसान होगी. इससे वैश्विक कंपनियों के लिए यह क्षेत्र और अधिक आकर्षक बन सकता है. नोएडा के एक बिल्डर रोहित नागपाल के अनुसार यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर की वास्तविक क्षमता का उपयोग अभी बाकी है. एयरपोर्ट के कारण यह क्षेत्र नए औद्योगिक शहरों, डेटा सेंटर, बिजनेस हब और उच्च तकनीकी उद्योगों के विकास का केंद्र बन सकता है.

रोजगार के नए अवसरों का विशाल नेटवर्क

मेरठ विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर विवेक नौटियाल बताते हैं, “एयरपोर्ट केवल पायलट और एयरलाइन कर्मचारियों के लिए रोजगार नहीं लाता बल्कि इससे जुड़े अनेक क्षेत्रों में अवसर पैदा होते हैं. लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, सुरक्षा सेवाएं, होटल उद्योग, परिवहन, खानपान, पर्यटन और रियल एस्टेट सहित कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार उत्पन्न होंगे.” यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अनुमानों के अनुसार क्षेत्र में 50 हजार से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना है. अप्रत्यक्ष रोजगार की संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है.

मेरठ में दीवान ग्रुप आफ इंस्टीट्यूट में निदेशक (इनोवेशन) संदीप कुमार वर्मा का कहना है कि एयरपोर्ट किसी भी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों का गुणक बनता है. यह निवेश, उद्योग, पर्यटन और रोजगार सभी को एक साथ गति देता है. जेवर एयरपोर्ट के मामले में भी यही परिदृश्य दिखाई दे रहा है. नोएडा एयरपोर्ट के निर्माण के साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में रियल एस्टेट गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं. वर्ष 2020 से 2025 के बीच कई इलाकों में आवासीय संपत्तियों की कीमतें लगभग तीन गुना तक बढ़ी हैं. संदीप कुमार वर्मा कहते  हैं, “जैसे-जैसे औद्योगिक निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे, वैसे-वैसे आवास, कार्यालय, होटल और व्यावसायिक परिसरों की मांग भी बढ़ेगी.” वर्मा के अनुसार एयरपोर्ट आधारित विकास मॉडल दुनिया भर में सफल रहा है. जेवर क्षेत्र में भी आवासीय, व्यावसायिक और आतिथ्य क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं.

4752 हेक्टेयर क्षेत्रफल में विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भविष्य में एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट परिसरों में शामिल हो सकता है. पहले चरण में शुरू हुए इस एयरपोर्ट की वार्षिक क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों की है. चार चरणों के विस्तार के बाद यह क्षमता सात करोड़ यात्रियों तक पहुंचेगी. भविष्य की योजना पांच रनवे विकसित करने की है, जिसके बाद इसकी क्षमता 22.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंच सकती है. यह इसे दुनिया के प्रमुख एयरपोर्ट हब में शामिल कर सकता है. इसके साथ ही जेवर को एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग (एमआरओ) का बड़ा केंद्र भी बनाया जा रहा है. देश में बढ़ते विमानन क्षेत्र को देखते हुए यह परियोजना भारत की विदेशी निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

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