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जेवर एयरपोर्ट : क्या BJP का 'विकास मॉडल' जाति की राजनीति पर भारी पड़ेगा?

पीएम मोदी 28 मार्च को जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन करने वाले हैं, इसके जरिए यूपी सरकार विकास बनाम पहचान की राजनीति को नई धार दे सकती है

Noida International Airport News
जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
अपडेटेड 27 मार्च , 2026

नोएडा के जेवर में बनकर तैयार हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ का संकेत देता दिख रहा है. 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके पहले चरण का उद्घाटन करेंगे, लेकिन इस आयोजन की राजनीतिक गूंज सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहने वाली.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए यह वह मंच बन रहा है, जहां से वे 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए ‘विकास बनाम बाकी मुद्दे’ की बहस को तेज़ी से आगे बढ़ा सकते हैं. इस पूरे घटनाक्रम को अगर व्यापक संदर्भ में देखें, तो यह साफ होता है कि जेवर एयरपोर्ट केवल एक ट्रांसपोर्ट हब नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है.

एक ऐसा प्रतीक, जो बताता है कि BJP अपने शासन मॉडल को किस तरह जनता के सामने पेश करना चाहती है.

आंकड़ों में ताकत, डिजाइन में संदेश

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण 11,200 करोड़ रुपए के निवेश से तैयार हुआ है और इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित किया गया है. यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे 1,334 हेक्टेयर में फैला यह एयरपोर्ट भौगोलिक रूप से भी रणनीतिक है- दिल्ली-NCR के दबाव को कम करने के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी से जोड़ने वाला. टर्मिनल-1 करीब 1.38 लाख वर्ग मीटर में फैला है और शुरुआती क्षमता सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों की है. भविष्य में इसे बढ़ाकर 7 करोड़ यात्रियों तक ले जाने की योजना है, जो इसे देश के सबसे बड़े एविएशन हब्स में शामिल कर सकती है. 3,900 मीटर लंबा रनवे बड़े विमानों के संचालन के लिए सक्षम है और आधुनिक नेविगेशन सिस्टम से लैस है.

डिज़ाइन के स्तर पर भी इसे सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनाने की कोशिश की गई है. इसकी छत को गंगा, यमुना और हिंडन नदियों की लहरों से प्रेरित किया गया है, जबकि अंदरूनी हिस्सों में लाल पत्थर और जालीदार संरचनाएं उत्तर भारतीय स्थापत्य की झलक देती हैं. इसे ‘कार्बन नेट ज़ीरो’ लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है, जो इसे पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के CEO क्रिस्टोफ़ श्नेलमान पहले ही कह चुके हैं कि यह “स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य” का मिश्रण होगा. यह बयान अपने आप में उस ब्रांडिंग का हिस्सा है, जिसके जरिए यूपी को वैश्विक निवेश और आधुनिकता के केंद्र के रूप में पेश किया जा रहा है.

जेवर एयरपोर्ट को भविष्य में दक्षिण एशिया का एक बड़ा कार्गो हब बनाने की योजना
जेवर एयरपोर्ट को भविष्य में दक्षिण एशिया का एक बड़ा कार्गो हब बनाने की योजना

जेवर एयरपोर्ट का महत्व केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है. 80 एकड़ में फैला कार्गो हब और 40 एकड़ की MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सुविधा इसे एक बड़े लॉजिस्टिक्स और एविएशन इकोसिस्टम में बदल सकती है. शुरुआती क्षमता 2.5 लाख मीट्रिक टन कार्गो की है, जिसे भविष्य में 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकता है. इसका सीधा असर यूपी के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और एक्सपोर्ट क्षमता पर पड़ेगा. यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) क्षेत्र में पहले से ही कई औद्योगिक परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिन्हें इस एयरपोर्ट से बड़ा फायदा मिल सकता है. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही तरीके से योजना लागू हुई, तो जेवर एयरपोर्ट दिल्ली-NCR का एक वैकल्पिक आर्थिक केंद्र बन सकता है.
 
राजनीतिक मंच की तैयारी : रैली, भीड़ और संदेश
 
उद्घाटन से ठीक पहले एयरपोर्ट पर जो दृश्य देखने को मिले, वे विकास परियोजनाओं की एक परिचित तस्वीर भी पेश करते हैं. कहीं टाइल्स लग रही थीं, कहीं सड़कों की मरम्मत हो रही थी, तो कहीं बड़े टेंट खड़े किए जा रहे थे. एयरपोर्ट से लगे किशोरपुर के पास सड़क की स्थिति और अंतिम समय की तैयारियां यह संकेत देती हैं कि परियोजना को समय पर प्रस्तुत करने के लिए तेज़ी से काम निपटाया गया. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में यह सामान्य प्रक्रिया होती है और कई काम उद्घाटन के बाद भी जारी रहते हैं. टर्मिनल के अंदर चेक-इन काउंटर, कन्वेयर बेल्ट, बोर्डिंग गेट और सुरक्षा प्रणालियों की अंतिम जांच की जा रही थी. यानी तकनीकी रूप से एयरपोर्ट संचालन के लिए लगभग तैयार है, लेकिन आसपास का इकोसिस्टम अभी विकसित होने की प्रक्रिया में है.

प्रशासनिक अमले की अपनी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धताएं हैं तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ BJP इस उद्घाटन को एक बड़े राजनीतिक आयोजन में बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ रही. पार्टी ने कम से कम दो लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए अलीगढ़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस और मथुरा जैसे जिलों की संगठनात्मक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है. VIP, आम जनता और मीडिया के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं, अलग-अलग एंट्री गेट और बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतजाम इस आयोजन को एक ‘मेगा इवेंट’ का रूप देते हैं. यह सिर्फ एयरपोर्ट का उद्घाटन नहीं, बल्कि एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन है.

जेवर एयरपोर्ट पर अभी निर्माण कार्य जारी है
जेवर एयरपोर्ट पर अभी निर्माण कार्य जारी है

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल भीड़ दिखाना नहीं होता, बल्कि कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरना और संगठन की ताकत का परीक्षण करना भी होता है. नोएडा के रहने वाले राजनीतिक विश्लेषक शुभम तोमर के शब्दों में, “यह BJP का क्लासिक मॉडल है- इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को राजनीतिक इवेंट में बदलना और उसे चुनावी नैरेटिव का केंद्र बना देना.”
 
विकास बनाम जातीय राजनीति

पश्चिमी उत्तर प्रदेश हमेशा से जटिल सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का क्षेत्र रहा है. जाट, जाटव  मुस्लिम, गुर्जर और ओबीसी समुदायों के बीच संतुलन बनाना यहां हर पार्टी के लिए चुनौती रहा है. ऐसे में जेवर एयरपोर्ट BJP के लिए एक ऐसा मुद्दा बन सकता है, जो इन पारंपरिक विभाजनों को पार कर ‘साझा विकास’ की बात करता है.
 
रोजगार, उद्योग और कनेक्टिविटी के वादे के जरिए पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि उसका फोकस पहचान की राजनीति से आगे बढ़कर अवसरों की राजनीति पर है. गौतम बुद्ध नगर के सांसद महेश शर्मा ने भी इसी बात पर जोर दिया कि एयरपोर्ट से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी. यह बयान सीधे तौर पर उस वोटर को संबोधित करता है, जो आर्थिक अवसरों को प्राथमिकता देता है.
 
BJP पिछले कुछ वर्षों से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अपने ‘डिलीवरी मॉडल’ के रूप में पेश करती रही है. एक्सप्रेसवे, मेट्रो, डिफेंस कॉरिडोर और अब एयरपोर्ट- इन सबको जोड़कर एक ऐसा नैरेटिव तैयार किया जा रहा है, जिसमें सरकार को ‘काम करने वाली’ और ‘परिणाम देने वाली’ के रूप में दिखाया जाता है. दिल्ली-मेरठ RRTS और अन्य परियोजनाओं के उद्घाटन के बाद जेवर एयरपोर्ट इस श्रृंखला की अगली कड़ी है. राजनीतिक रूप से यह संदेश दिया जा रहा है कि यूपी तेजी से बदल रहा है और यह बदलाव केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखाई दे रहा है.
 
विपक्ष की चुनौती : क्या विकास ही काफी है?
 
हालांकि, विपक्ष इस पूरे नैरेटिव को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है. उनका तर्क है कि बड़े प्रोजेक्ट्स के बावजूद बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दे अभी भी बने हुए हैं. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वपूर्ण है, लेकिन चुनाव जीतने के लिए सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
 
पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन की यादें अभी भी ताजा हैं, और ऐसे में केवल विकास का मुद्दा हर वर्ग को समान रूप से प्रभावित करेगा या नहीं, यह देखना बाकी है. वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन एक स्पष्ट राजनीतिक संकेत है. यह दिखाता है कि वे 2027 के चुनावों में विकास को केंद्र में रखकर लड़ाई लड़ना चाहते हैं. यह आयोजन पश्चिमी यूपी से शुरू हो रहा है, जो राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है. यहां मजबूत पकड़ बनाना पूरे राज्य में संदेश देने के बराबर है. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जेवर एयरपोर्ट योगी सरकार के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक बन चुका है.

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