मुंबई में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की 31 अगस्त से दो दिवसीय बैठक ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी. इस तस्वीर के प्रमुख किरदार राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने मुंबई की बैठक में उनकी पार्टी को लेकर चल रही सारी अटकलों पर विराम लगा दिया. दरअसल विपक्षी गठबंधन की कवायद के साथ ही यूपी में समाजवादी पार्टी (सपा) की सहयोगी रालोद को लेकर अटकलें शुरू हो गई थीं.
इन अटकलों को पटना में हुई विपक्षी दलों के बैठक में जयंत चौधरी की गैरहाजिरी से बल मिला था. हालांकि बेंगलुरु में हुई विपक्षी गठबंधन की दूसरी बैठक में तो जयंत चौधरी शामिल हुए लेकिन उसके बाद राज्यसभा में दिल्ली से जुड़े विधेयक में चौधरी की अनुपस्थिति ने एक बार फिर कयासबाजी का दौर तेज कर दिया था. इसी बीच कुछ भाजपा नेताओं ने भी जयंत चौधरी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने के दावे करके भी अटकलों को और तेज भी कर दिया था.
मुंबई में विपक्षी दलों की महामंथन बैठक में जयंत चौधरी पूरी सक्रियता के साथ मौजूद रहे. जयंत ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, लालू यादव और राहुल गांधी के साथ मुलाकात की. 'इंडिया' की बैठक खत्म होने के बाद भी जयंत चौधरी एक दिन और मुंबई में रुके. उन्होंने एनसीपी नेता शरद पवार और शिवसेना के संजय राउत से मिलकर 'इंडिया' गठबंधन में रालोद की स्थिति मजबूत की. उनकी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शाहिद सिद्दीकी को गठबंधन की कैम्पेन कमेटी में स्थान मिलने से यह साफ हो गया कि विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़े हैं.
मुंबई बैठक से लौटने के बाद जयंत चौधरी अब पश्चिमी यूपी में रालोद की सियासी जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं. जयंत ने अगले लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी की संरचना को मजबूत करने के लिए 11 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में पश्चिमी यूपी के पांच मंडलों- मुरादाबाद, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर और आगरा- के 22 जिलों के पार्टी के संगठनात्मक पदाधिकारियों की एक बैठक बुलाई है. रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी बताते हैं कि पश्चिम यूपी क्षेत्र के सभी क्षेत्रीय और जिला अध्यक्षों को बैठक में भाग लेने और मौजूदा जमीनी स्तर की राजनीतिक स्थिति के बारे में अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए कहा गया है. पश्चिमी यूपी की सभी 25 लोकसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने की रालोद की कवायद को जयंत चौधरी के नए रुख के रूप में देखा जा रहा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे बताते हैं, "सभी पार्टियां पश्चिमी यूपी में अपने संगठन की मजबूती के लिए कार्यक्रम करती रहती हैं. रालोद की 11 सितंबर को होने वाली बैठक को लेकर किसी प्रकार की कयासबाजी करना गलत है. रालोद अपने गठबंधन सहयोगियों का सबसे ज्यादा सम्मान करती है."
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन में रालोद भी शामिल हुई थी. गठबंधन के बावजूद रालोद नेता अजित सिंह और जयंत चौधरी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में रालोद ने अपनी बढ़ती ताकत का एहसास कराया. सपा और आजाद समाज पार्टी (आसपा) के साथ गठबंधन करके रालोद ने पश्चिमी यूपी की 33 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था. इनमें से 8 पर पार्टी को विजय मिली थी. इसके बाद जयंत चौधरी लगातार कार्यक्रमों के जरिए रालोद की ताकत बढ़ाते रहे. दिसंबर 2022 में मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सपा और आसपा के सहयोग से रालोद ने जीत दर्ज कर सत्तारूढ़ भाजपा को अपनी बढ़ती ताकत का एहसास कराया. यह सिलसिला वर्ष 2023 के नगरीय निकाय चुनाव में भी जारी रहा. जब रालोद ने खतौली और जानसठ नगर पालिका परिषद पर कब्जा जमाकर अपनी बढ़ती ताकत का एहसास कराया.
इसी तरह जाट मतदाताओं का मिजाज बताने वाली बड़ौत, मुरादनगर, हापुड़, अनूपशहर, चंदौसी, गजरौला, अतरौली, खैर, इगलास समेत कई नगर पालिका परिषद में भाजपा को हराकर रालोद ने पश्चिमी यूपी के बदलते मिजाज को स्पष्ट कर दिया. विधानसभा उपचुनाव हारने के बाद खतौली नगर पालिका परिषद के चुनाव में भाजपा को एक बार फिर पटखनी देकर जयंत चौधरी ने साबित किया कि उपचुनाव की जीत कोई तुक्का नहीं थी. यहां यहां रालोद-सपा-आसपा के गठबंधन के आगे भाजपा उम्मीदवार तीसरे नंबर पर पहुंच गए.
जयंत चौधरी पश्चिमी यूपी के जातिगत समीकरणों को भी बखूबी साध रहे हैं. सहारनपुर के दलित नेता और आजाद समाज पार्टी (आसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर के साथ जयंत चौधरी की केमिस्ट्री काफी परवान चढ़ रही है. जुलाई में जंतर-मंतर पर चंद्रशेखर के धरने में शामिल होकर जयंत चौधरी ने दलित नेता के साथ अपने रिश्ते जाहिर कर दिए थे. माना जा रहा है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जयंत चौधरी रालोद को गठबंधन में मिलने वाली लोकसभा सीटों में से एक पर चंद्रशेखर का समर्थन कर सकते हैं. मेरठ विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर सुधीर शर्मा बताते हैं, "पश्चिमी यूपी में भाजपा के हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एजेंडे के जवाब में जयंत चौधरी जाट, दलित, गुर्जर और मुस्लिम वोटों का पिरामिड खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं." सावन के महीने के दौरान रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी ने बागपत स्थित पुरा महादेव मंदिर में पहली बार जलाभिषेक करने के साथ किसान भवन मंदिर समिति को दान देकर भी एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया.
जातिगत समीकरण साधने के साथ रालोद कई कार्यक्रमों के जरिए भी मतदाताओं पर अपनी पकड़ मजबूत करने का भरसक प्रयास कर रहा है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे बताते हैं, "जयंत जी ने रालोद के कार्यक्रमों की संरचना इस प्रकार की है कि हर वर्ग के लोगों तक पार्टी कार्यकर्ता पहुंच सकें. पिछले एक महीने से पार्टी समरसता अभियान चला रही है इसके तहत पहले चरण में पार्टी कार्यकर्ता 1600 गावों में जाएंगे. जयंत जी के नेतृत्व में पश्चिमी यूपी के सभी जिलों में किसान पंचायत का आयोजन किया गया है. किसान संदेश यात्रा निकाली गई है तो बहुजन उदय अभियान के जरिए दलित वर्ग तक भी पहुंचा गया है. अग्निवीर पंचायत, भाईचारा सम्मेलन के जरिए पश्चिमी यूपी के हर तबके तक कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर सत्तारूढ़ भाजपा की गड़बडि़यों को उजागर किया है."
जयंत चौधरी की यह कवायद वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में 'इंडिया' गठबंधन के तले पश्चिमी यूपी की अधिक से अधिक सीटों पर दावा मजबूत करने का एक प्रयास भी है. पश्चिमी यूपी में अभी जो राजनीतिक तस्वीर सामने आ रही है उसके मुताबिक रालोद को 'इंडिया' गठबंधन में सात से आठ सीटें मिल सकती हैं. पश्चिमी यूपी की बागपत, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, अमरोहा, अलीगढ़, हाथरस और मथुरा लोकसभा सीटों पर रालोद का दावा मजबूत माना जा रहा है. फिलहाल जयंत चौधरी पिछले दो लोकसभा चुनावों से जारी रालोद के सूखे को वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में खत्म करने के लिए जमकर पसीना बहा रहे हैं.

