2025 में पहलगाम आतंकी हमले और भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद जम्मू-कश्मीर का पर्यटन बुरी तरह प्रभावित हो गया. इसकी बड़ी वजह यह है कि जम्मू कश्मीर में करीब दस लाख लोगों का रोजगार पर्यटन से जुड़ा हुआ है.
ऐसे में पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट का सबसे ज्यादा नुकसान स्थानीय लोगों और फिर राज्य की अर्थव्यवस्था को उठाना पड़ा. हालांकि, उमर अब्दुल्ला सरकार नए साल में इस नुकसान को पीछे छोड़ आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है.
इसी का परिणाम है कि गुलमर्ग के विश्व प्रसिद्ध स्की ढलानों और नई सोनमर्ग सुरंग को सरकार ने पर्यटकों के लिए खोलने का फैसला किया है. इस तरह बर्फ से ढकी इन ढलानों पर एक बार फिर सर्दी के मौसम में एडवेंचर स्पोर्ट्स शुरू हो गया है.
मुख्यमंत्री हर हाल में सर्दी के मौसम का फायदा उठाना चाहते हैं. यही कारण है कि उन्होंने राज्य के कमजोर होते पर्यटन उद्योग में एक बार फिर से जान फूंकने के लिए महत्वाकांक्षी साहसिक-पर्यटन अभियान शुरू किया है.
एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ATOAI) ने 17 से 20 दिसंबर तक कश्मीर में अपना 17वां सम्मेलन आयोजित किया है. श्रीनगर की डल झील के किनारे स्थित शेर-ए-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए सीएम अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के एडवेंचर टूरिज्म के शुरुआत की औपचारिक घोषणा की.
अब्दुल्ला ने 17 दिसंबर को श्रीनगर के आसमान में पहली बार बैलून की सवारी करने के बाद कहा, “जम्मू कश्मीर सिर्फ स्कीइंग के लिए ही नहीं, बल्कि व्हाइट वॉटर राफ्टिंग, ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए भी मशहूर है. हमने हाल ही में पैराग्लाइडिंग के लिए प्रशिक्षकों और पायलटों के एक बैच को प्रशिक्षित किया है. हॉट एयर बैलूनिंग की श्रेणी में अभी हमारे पास कुछ नहीं है, लेकिन हमने आज एक छोटी सी शुरुआत की है और इसे आगे बढ़ाने की संभावना है.”
देशभर में साहसिक गतिविधियों का नेतृत्व कर रहे ATOAI के 150 से अधिक सदस्य कश्मीर में रोमांच के अवसरों का जायजा लेने के लिए श्रीनगर पहुंचे. 21 दिसंबर को कड़ाके की ठंड (चिल्लई कलां) शुरू हो गई, जो सबसे ज्यादा 40 दिनों तक सर्दियों का समय होता है. इसी दौरान सदस्यों ने राज्य के विभिन्न स्थलों की जांच की. करीब 51 सदस्य गुलमर्ग गए, 25 सदस्य पहलगाम और 15 ने सोनमर्ग का दौरा किया.
श्रीनगर में एक मीडिया कॉन्फ्रेंस में ATOAI के अध्यक्ष अजीत बजाज ने कहा, “हमारा मानना है कि जम्मू और कश्मीर भारत का एडवेंचर डेस्टिनेशन है. हम यहां की सरकार के साथ मिलकर अधिक से अधिक एडवेंचर टूरिस्ट्स को आकर्षित करना चाहते हैं. हमने स्थानीय एडवेंचर व्यवसायों के साथ B2B (बिजनेस टू बिजनेस) सेशन आयोजित किए हैं. भारत भर के एडवेंचर ऑपरेटर्स ने यहां के स्थानीय ऑपरेटर्स से मुलाकात की है और हम उनके साथ मजबूत संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं.”
22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले और पाकिस्तान में आतंकी सामग्रियों के खिलाफ भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर का पर्यटन उद्योग संकट से घिर गया. आतंकी हमले के बाद उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर के 48 पर्यटन स्थलों को बंद करने का आदेश दिया था. इनमें से 36 स्थल फिर से खुल चुके हैं, जबकि बाकी अभी भी बंद हैं.
पिछले साल जब युद्ध के बादल छंटने लगे, तो अब्दुल्ला ने कश्मीर में पर्यटकों को वापस लाने के लिए पूरे भारत में प्रचार अभियान चलाया. हालांकि, इस अभियान को कोई खास सफलता नहीं मिली. डल झील पर लगभग खाली पड़ी शिकारा नावें और वीरान होटल 2025 के दौरान पर्यटन की बदहाली की याद दिलाते रहे.
2024 में जम्मू और कश्मीर में पर्यटकों की संख्या अब तक की सबसे अधिक रही. अमरनाथ यात्रा और वैष्णो देवी के धार्मिक यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु समेत अन्य जगहों पर करीब 2.3 करोड़ पर्यटक आए थे. हालांकि, 2025 की पहली छमाही में पर्यटकों की यह संख्या घटकर आधी यानी 75 लाख रह गई, जबकि 2024 की इसी अवधि में यह संख्या 1.5 करोड़ थी.
कृषि और बागवानी के बाद पर्यटन जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख क्षेत्र है. राज्य की अर्थव्यवस्था में 7 फीसद से ज्यादा योगदान पर्यटन का है. 2025-26 के बजट में अब्दुल्ला सरकार ने पर्यटन के लिए 390 करोड़ रुपये आवंटित किए.
एडवेंचर स्पोर्ट्स शुरू किए जाने की एक बड़ी वजह ये भी है कि मुख्यमंत्री स्वयं इन खेलों के शौकीन हैं. सर्दी में गुलमर्ग के स्की ढलान उनके पसंदीदा जगहों में से एक हैं. गुलमर्ग के स्की ढलानों के आधुनिकीकरण के लिए JSW समूह को जिम्मा सौंपा गया है.
गुलमर्ग के पर्यटन सहायक निदेशक ताहिर मोहिउद्दीन ने इंडिया टुडे को बताया, “गुलमर्ग के स्की ढलानों के आधुनिकीकरण की योजना से पर्यटन विभाग को जबरदस्त ऊर्जा मिला है. इस साल जम्मू कश्मीर में हम चमकदार रोशनी, सुविधाओं और किफायती दरों के साथ नाइट स्कीइंग को एक नए स्तर पर ले जाएंगे.”
जनवरी की शुरुआत में सीएम अब्दुल्ला ने नवनिर्मित स्कीइंग प्रशिक्षण संस्थान में 14 दिवसीय एकीकृत स्की प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का उद्घाटन किया. अधिकारी मोहिउद्दीन के मुताबिक, इस पाठ्यक्रम से इच्छुक स्कीयरों को स्कीइंग की बुनियादी बातों की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी.
इन प्रयासों के बीच सबसे बड़ी समस्या जलवायु परिवर्तन है, जिसके कारण कश्मीर घाटी के पहाड़ों और मैदानों में समय पर बर्फ नहीं गिर पा रही है. सर्दियां बढ़ रही हैं, लेकिन पर्याप्त बर्फबारी नहीं हो रही है. बर्फबारी जम्मू कश्मीर में दीर्घकालिक जल सुरक्षा और खाली ग्लेशियरों को फिर से भरने के लिए बेहद जरूरी है.
बर्फ के पिघलने से गुलमर्ग के स्की ढलानों को भी नुकसान होगा. अब्दुल्ला ने कृत्रिम बर्फ बिछाने का संकेत दिया है, ताकि यहां के 'शून्य से नीचे के तापमान' का फायदा उठाया जा सके. अब्दुल्ला ने कहा, “अगर बर्फ नहीं होगी तो मैं गुलमर्ग को स्कीइंग के लिए एक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं प्रोजक्ट कर सकता. अगर ग्लेशियर पिघलने लगेंगे तो मैं उन्हें आइस क्लाइम्बिंग या पर्वतारोहण के लिए पर्यटन स्थल के रूप में नहीं प्रोजेक्ट कर सकता. दुर्भाग्य से, हम अपनी आंखों के सामने उन ग्लेशियरों को खुद से दूर जाते देख रहे हैं.”
इस बीच उद्योग जगत के नेता ATOAI सम्मेलन से मिलने वाले नतीजों को लेकर उत्साहित हैं. कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव फैज बख्शी ने कहा, “इसका बहुत बड़ा प्रभाव पड़ने वाला है. पर्यटक कश्मीर लौटने लगे हैं और गुलमर्ग के ज्यादातर होटल 20 दिसंबर से ही बुक हैं.”
- कलीम गिलानी

