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ईरान-इजरायल युद्ध की आंच में तपा यूपी का पर्यटन कारोबार

खाड़ी देशों में युद्ध के हालात और हवाई रूट बंद होने से यूपी में टूर-ट्रैवल कारोबार पर गहरा असर. अनुमान है कि इस सेक्टर को सिर्फ मार्च में ही 300 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो सकता है

आगरा में विदेशी सैलानियों की आमद काफी कम हो चुकी है
अपडेटेड 3 मार्च , 2026

पश्चिम एशिया में भड़के संघर्ष ने उत्तर प्रदेश के पर्यटन उद्योग को अचानक झटका दिया है. ईरान और इजरायल के बीच बढ़े सैन्य टकराव, और उसमें अमेरिका की भूमिका के बाद जिस तरह खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता फैली है, उसका सीधा असर यूपी के पर्यटन, ट्रैवल कारोबार और एयर कनेक्टिविटी पर दिखने लगा है.

मार्च, जो आमतौर पर होली और ईद से पहले यात्रा का व्यस्त महीना माना जाता है, इस बार अनिश्चितता और रद्द बुकिंगों का महीना बनता जा रहा है. आगरा, वाराणसी और लखनऊ जैसे शहरों में टूर ऑपरेटरों के फोन लगातार बज रहे हैं, लेकिन नई बुकिंग के लिए नहीं बल्कि कैंसिलेशन और रिफंड के लिए. आगरा में होली पर आने वाला स्पेन के 50 पर्यटकों का एक ग्रुप अपना टूर रद्द कर चुका है.

इस कारोबार से जुड़ी कंपनी 'ली पैसेज टू इंडिया' के उपाध्यक्ष राजेश शर्मा कहते हैं, “यूरोपियन फ्लाइट्स अगर एयरस्पेस बंद होने के कारण रूस की तरफ से लंबा रूट लेकर आएंगी तो किराया बढ़ेगा. महंगे टिकट के कारण पर्यटक टूर कैंसिल कर सकते हैं. अभी तो शुरुआत है, लेकिन अगर हालात नहीं सुधरे तो अप्रैल-मई की बुकिंग भी प्रभावित होंगी.” 

खाड़ी देशों के एयरस्पेस पर पाबंदियों और कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस उड़ानें थमने से सबसे बड़ा झटका एयर कनेक्टिविटी को लगा है. दुबई और अबू धाबी रूट, जो यूरोप और अमेरिका जाने के लिए अहम ट्रांजिट हब माने जाते हैं, फिलहाल बाधित हैं. Air India ने मिडिल ईस्ट की कई उड़ानें अस्थाई रूप से सस्पेंड कर दी हैं. IndiGo ने एडवायजरी जारी कर यात्रियों से अपनी फ्लाइट स्टेटस जांचने को कहा है. Emirates, Lufthansa और British Airways जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने भी या तो ऑपरेशन रोके हैं या रूट डायवर्ट किए हैं.

ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों का अनुमान है कि केवल मार्च महीने में ही उत्तर प्रदेश की ट्रैवल इंडस्ट्री को करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है. 'एफटीएल हॉलीडेज' के एक अधिकारी के मुताबिक छुट्टियों के सीजन के लिए पूरे यूपी से 13 हजार से ज्यादा पैकेज बुक थे, जिनमें दुबई, दोहा, कुवैत सिटी, मनामा जैसे लोकप्रिय गंतव्य शामिल थे. यदि प्रति यात्री औसत खर्च दो लाख रुपये माना जाए तो केवल पैकेज कैंसिल होने से लगभग 260 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार ठप हो चुका है. इसमें होटल बुकिंग, लोकल ट्रांसफर, वीजा फीस और एडवांस भुगतान शामिल हैं, जो फिलहाल अटके पड़े हैं. 

स्थिति सिर्फ आउटबाउंड टूरिज्म तक सीमित नहीं है. यूपी में हर साल पारसी नववर्ष नवरोज (मध्य मार्च के बाद) के दौरान बड़ी संख्या में ईरानी पर्यटक आते थे, खासकर आगरा और वाराणसी जैसे सांस्कृतिक शहरों में. इस बार हालात ऐसे हैं कि उनके आने की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है. आगरा में विदेशी पर्यटकों पर निर्भर होटल और गाइड समुदाय में चिंता साफ दिख रही है. 'टूरिज्म गिल्ड ऑफ आगरा' के पूर्व अध्यक्ष राजीव सक्सेना कहते हैं, “अमेरिका के विरोध में कई देशों में प्रदर्शन हो रहे हैं. अगर ऐसी स्थिति में एडवाइजरी जारी होती है और नागरिकों को भारत यात्रा टालने को कहा जाता है, तो मार्च का पूरा सीजन प्रभावित हो सकता है. इसका असर सिर्फ इस महीने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले महीनों की बुकिंग पर भी पड़ेगा.”

आगरा का मामला अलग से चिंता पैदा करता है. ताजमहल के कारण यह शहर विदेशी पर्यटकों पर काफी हद तक निर्भर है. अगर यूरोप और अमेरिका से आने वाली उड़ानों में व्यवधान बना रहा तो आगरा के होटल, गाइड, ट्रांसपोर्टर, हस्तशिल्प कारोबारी और फोटोग्राफर सभी प्रभावित होंगे. ईरान–इजरायल संघर्ष के कारण खाड़ी रूट बाधित होने से उत्तर प्रदेश में पर्यटन और ट्रैवल सेक्टर से जुड़ी नौकरियों पर सीधा दबाव बढ़ गया है. 

उद्योग से जुड़े अनुमान बताते हैं कि प्रदेश में करीब 40 से 50 हजार लोग सीधे तौर पर ट्रैवल एजेंसियों, टूर ऑपरेटरों, टिकटिंग स्टाफ, होटल, गाइड, ड्राइवर और एयरपोर्ट सर्विस से जुड़े हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से हस्तशिल्प, रेस्टोरेंट, टैक्सी और इवेंट कारोबार में लगे लोगों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है. अगर मार्च से शुरू हुआ यह संकट लंबा खिंचता है और गर्मियों का सीजन भी प्रभावित होता है, तो हजारों अस्थाई और कमीशन आधारित नौकरियां पहले खतरे में आएंगी. 

छोटे ट्रैवल ऑपरेटरों में स्टाफ कटौती, वेतन में देरी और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की छंटनी की आशंका बढ़ गई है, जिससे शहरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. होली का समय विदेशी सैलानियों के लिए खास आकर्षण होता है, लेकिन इस बार रंगों का त्योहार फीका पड़ता दिख रहा है. स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है. अगर अमेरिका और इजरायल अपने नागरिकों को भारत यात्रा टालने की सलाह देते हैं तो इसका असर सीधे यूपी के पर्यटन पर पड़ेगा. अमेरिकी और इजरायली पर्यटक वाराणसी और आगरा जैसे शहरों में नियमित रूप से आते रहे हैं. एडवाइजरी जारी होने की स्थिति में होटल बुकिंग और टूर पैकेज बड़े पैमाने पर रद्द हो सकते हैं.

लखनऊ और वाराणसी एयरपोर्ट से मार्च के लिए 20 हजार से अधिक फ्लाइट बुकिंग कैंसिल होने की बात सामने आ रही है. खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले हजारों प्रवासी उत्तर प्रदेश से जुड़े हैं. ईद से पहले उनकी वापसी की टिकटें पहले से बुक थीं, लेकिन एयरस्पेस बंद होने और उड़ानों के रद्द होने से उनकी यात्राएं अधर में लटक गई हैं.” 'ट्रिपल प्लस टूर्स इंटरनेशनल' के एक अधिकारी के अनुसार करीब 7 हजार यात्रियों की वापसी टिकटें प्रभावित हुई हैं. अगर प्रति यात्री औसत खर्च 50 हजार रुपये माना जाए तो करीब 35 करोड़ रुपये का सीधा आर्थिक असर केवल इस श्रेणी में पड़ा है. 

लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और नोएडा के टूर ऑपरेटरों के सामने दोहरी चुनौती है. एक तरफ ग्राहकों को रिफंड देना है, दूसरी ओर एयरलाइंस और विदेशी होटलों से अपनी अग्रिम राशि वापस पाने की जद्दोजहद है. कई छोटे ऑपरेटरों का कैश फ्लो टूट गया है.  अगर बुकिंग लंबे समय तक ठप रहीं तो जिन लोगों ने बैंक से लोन लेकर कारोबार बढ़ाया था, उनके लिए ईएमआई चुकाना मुश्किल हो सकता है.

युद्ध की आशंका ने सिर्फ पर्यटन नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक असर भी डाला है. विदेश यात्रा पर जाने वाले भारतीय पर्यटक भी असमंजस में हैं. दुबई और तुर्की घूमने की योजना बना चुके कई परिवारों ने फिलहाल यात्रा टाल दी है. कुछ लोग वैकल्पिक रूट से जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन टिकट दरों में संभावित वृद्धि उन्हें रोक रही है. अगर जापान के रास्ते यूरोप और अमेरिका जाने का विकल्प ही बचता है तो लंबी दूरी और बढ़ी लागत दोनों यात्रियों के निर्णय को प्रभावित करेंगी. 

ताजा हालात में दुबई में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक आयोजनों पर भी असर पड़ा है. आयोजकों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन फंसे यात्रियों की मदद कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की अनिश्चितता ने कार्यक्रमों की योजना पर असर डाला है. यह असर सीधे यूपी के कलाकारों, शायरों और इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों तक पहुंचता है जो खाड़ी देशों में कार्यक्रमों के जरिए कमाई करते हैं.

ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संघर्ष जल्दी थमता है तो अप्रैल या मई से स्थिति संभल सकती है. दूसरी तरफ अगर हालात बिगड़ते हैं और एयरस्पेस लंबे समय तक बंद रहते हैं तो गर्मियों की छुट्टियों का सीजन भी प्रभावित होगा. तब नुकसान का आंकड़ा 300 करोड़ से कहीं ऊपर जा सकता है.

पर्यटन विशेषज्ञ लवकुश मिश्र कहते हैं, “सरकार और उद्योग संगठनों के सामने अब राहत और पुनरुद्धार की रणनीति बनाने की चुनौती है. टूर ऑपरेटर चाहते हैं कि एयरलाइंस रिफंड प्रक्रिया तेज करें और जीएसटी या अन्य करों में अस्थायी राहत दी जाए. साथ ही घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रचार अभियान चलाए जाएं ताकि कुछ हद तक नुकसान की भरपाई हो सके.”

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