लोकसभा चुनाव 2024 की घोषणा करने के दौरान 16 मार्च को ईवीएम पर उठे सवाल के जवाब में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शायराना अंदाज में कहा था, "अधूरी हसरतों का इल्जाम हर बार हम पर लगाना ठीक नहीं, वफा खुद से नहीं होती खता ईवीएम की कहते हो."
उन्होनें आगे कहा ईवीएम पूरी तरह से सुरक्षित है उसमें निष्पक्ष नतीजे आते हैं. लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नेता मुख्य निर्वाचन आयुक्त के जवाब से इत्तेफाक नहीं रखते. उन्हें अब भी ईवीएम पर भरोसा नहीं है. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 26 मार्च को अपने विधानसभा क्षेत्र पाटन में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. इस सम्मेलन में कार्यकर्ताओं की ओर से यह सवाल उठाया गया कि, ईवीएम के रहते चुनाव नहीं जीता जा सकता.
पूर्व सीएम जब मंच पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करने आए तब उन्होंने कहा, "यदि कार्यकर्ता चाह लें तो ईवीएम से चुनाव नहीं होगा. इसका एक फार्मूला है अगर 384 लोग अपने खर्च पर लोकसभा के चुनाव में नामांकन दाखिल कर लें तो ईवीएम से चुनाव नहीं कराया जा सकता, इसलिए सब नामांकन दाखिल करें और चुनाव में शामिल हों."
उनके इस बयान के आधार पर कार्यकर्ताओं ने प्रस्ताव पारित कर दिया कि चुनाव में इतने ही नामांकन दाखिल करेंगे. इंडिया टुडे से बात करते हुए भूपेश बघेल ने कहा, "दुर्ग के साथ राजनांदगांव के लोग चाहेंगे तो वहां भी मतपत्रों से चुनाव होगा. मैंने किसी को नामांकन दाखिल करने नहीं कहा, लेकिन कोई चुनाव लड़ना चाहे तो यह उसका अधिकार है."
हालांकि 384 नामांकन दाखिल करने में मोटा खर्च भी होगा. सामान्य वर्ग और ओबीसी वर्ग के प्रत्याशियों को नामांकन दाखिल करने के लिए 25 हजार रूपए और एससी-एसटी वर्ग को इसकी 50 प्रतिशत राशि जमा करना करनी होती है. इस हिसाब से 384 ओबीसी और सामान्य वर्ग के नामांकन दाखिल होने पर 96 लाख खर्च होंगे. सामान्य नागरिकों के लिए यह राशि अनावश्यक खर्च कर पाना आसान नहीं होगा.
मुश्किलें निर्वाचन आयोग के लिए भी कम नहीं होगी. क्योंकि लंबे समय से ईवीएम के जरिए चुनाव हो रहे हैं. सरकारी कर्मचारी ईवीएम चलाने में एक्सपर्ट हो गए हैं. मतपत्र से मतदान होने पर अकेले दुर्ग लोकसभा में लगभग 19 लाख मतदाता पर्ची की व्यवस्था करनी होगी. सभी 384 प्रत्याशियों के लिए एक मतपत्र में यदि एक एक इंच की जगह दी जाए तो मत पत्र का आकार 32 फिट का होगा.
बुकलेट की शक्ल में नाम छापने में भी कई पन्ने लगेंगे. चुनाव आयोग को सभी प्रत्याशियों के लिए उतने ही चुनाव चिन्ह जारी करने होंगे. अब तक देश में तेलंगाना के निजामाबाद में 185 उम्मीदवार मैदान में उतरने का रिकॉर्ड है. 2019 में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता ने इस सीट पर चुनाव लड़ा था. उनके सामने विरोध करने के उद्देश्य से 170 किसानों ने नामांकन दाखिल कर दिया था. अन्य दलों के उम्मीदवारों की संख्या मिलाकर 185 उम्मीदवार मैदान में थे.
यहां चुनाव कराने के लिए इलेक्शन कमीशन को मतपत्रों का इस्तेमाल करना पड़ा था. उस दौरान एम टू ईवीएम यूनिट्स चलन में थे. इसके एक कंट्रोल यूनिट में 4 बैलट यूनिट जोड़ने की क्षमता थी. एक बैलट यूनिट में 16 उम्मीदवारों के नाम शामिल किए जा सकते हैं. इस तरह 64 से अधिक उम्मीदवार होने पर बैलट पेपर से चुनाव करवाना चुनाव आयोग की मजबूरी हो गई.
इसका हल निकालते हुए चुनाव आयोग ने मशीन को अपडेट करके एम थ्री ईवीएम बनाया. इस नई मशीन के एक कंट्रोल यूनिट से 24 बैलट यूनिट कनेक्ट हो सकता है. हर एक यूनिट में 16 प्रत्याशियों के हिसाब से 384 उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिन्ह जोड़े जा सकते हैं.
छत्तीसगढ़ की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रीना बाबासाहेब कंगाले ने इस तरह की स्थियों के बारे में इंडिया टुडे से कहा, "निर्वाचन आयोग हर परिस्थिति के लिए तैयार रहता है. मतदाताओं की संख्या अधिक होने पर भी ईवीएम मशीन से चुनाव कराए जा सकते हैं."
बीजेपी संचार विभाग के अध्यक्ष अमित चिमनानी इंडिया टुडे से कहते हैं, "भूपेश बघेल ऐसे बयान देकर अपनी हार के कारण ढूंढ रहे हैं. ईवीएम पर लगी सारी याचिकाओं को कोर्ट ने रद्द किया है. इसके बाद भी कांग्रेस को भरोसा न होना हार मानने जैसा है."
इस संभावित स्थिति को लेकर राजनीति में रुचि रखने वालों के बीच चर्चाएं चल रही है. यदि चुनाव मतपत्र से होता है तो चुनाव दिलचस्प हो जाएगा. कई ऐसे चुनाव चिन्ह भी सामने आएंगे जिन्हें अब तक किसी चुनाव में नहीं देखा गया है.

