सांसद निधि के खर्च में भ्रष्टाचार, भेदभाव या तमाम तरह की दूसरी शिकायतें अक्सर आती रहती हैं लेकिन राजस्थान से सामना आया मामला बिलकुल अलग है. दरअसल यहां तीन सांसदों ने अपनी सांसद निधि का पैसा सियासी रिश्तों को साधने पर खर्च कर डाला. झुंझुनूं से सांसद बृजेंद्र ओला, चूरू से सांसद राहुल कस्वां और भरतपुर से सांसद संजना जाटव ने सांसध निधि के तहत हरियाणा के कैथल में 1.20 करोड़ रूपए के विकास कार्य करवा दिए. ये तीनों कांग्रेस के सांसद हैं और यह आरोप BJP मीडिया सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लगाया है. इसमें उन्होंने बाकायदा बाकायदा डेटा शीट शेयर की है, जिसमें कामों और खर्च का ब्योरा है.
कैथल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला का निर्वाचन क्षेत्र है. यही वजह है कि राजस्थान की सत्तारुढ़ BJP ने इसे सियासी मुद्दा बना डाला. सूबे के गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा. बेढ़म ने कहा, ‘‘कांग्रेस सांसद राजस्थान के करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग कर हरियाणा में राजनीतिक लाभ ले रहे हैं.’’
एक अप्रैल 2023 को जारी सांसद निधि की नई गाइडलाइन के अनुसार सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाहर सालाना 25 लाख रुपए तक की अनुशंसा कर सकता है मगर भरतपुर सांसद संजना जाटव ने हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र के लिए 45.55 लाख रुपए के कार्यों की अनुशंसा की वहीं चूरू सांसद राहुल कस्वां ने 50 लाख रुपए की सिफारिश कर डाली जो नियमानुसार गलत है. इसके अलावा झुंझुनूं सांसद बृजेंद्र ओला ने भी कैथल विधानसभा क्षेत्र के लिए 24.71 लाख रुपए के कार्यों की सिफारिश की है. तीनों सांसदों ने सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच कैथल विधानसभा क्षेत्र में सांसद निधि का पैसा जारी किए जाने की सिफारिशें की हैं.
संजना जाटव, राहुल कस्वां और बृजेंद्र ओला ने सांसद निधि का पैसा कैथल विधानसभा क्षेत्र में टॉयलेट ब्लॉक, धर्मशालाओं की चारदीवारी, श्मशान में आरसीसी शेड, विभिन्न समाजों के सामुदायिक केंद्र, पब्लिक लाइब्रेरी में कुर्सी, टेबल, बुक शेल्फ, वॉटर कूलर, सड़क व नाली निर्माण, स्कूल व कॉलेज में कक्षा कक्षों का निर्माण और ओपन जिम बनाने जैसे कार्यों पर खर्च किए हैं.
जवाहर सिंह बेढ़म का यह भी आरोप है कि भरतपुर सांसद संजना जाटव ने सांसद निधि के तहत अपने निर्वाचन क्षेत्र भरतपुर में कम और दूसरे जिलों में ज्यादा सिफारिशें की. कैथल के अलावा उन्होंने भूपेंद्र यादव के निर्वाचन क्षेत्र अलवर में भी बड़ी तादाद में विकास कार्यों की अनुशंसा कर डाली. जाटव ने कुल 142 कार्यों की सिफारिश की जिनमें से सिर्फ 37 कार्य ही पूरे हुए हैं.
दरअसल यहां यह भी गौर करने वाली बात है कि भरतपुर, चूरू और झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र राजस्थान के ऐसे इलाके नहीं हैं जहां सबकुछ चकाचक हो, यानी इन्हीं इलाकों बहुत से विकास कार्य अधूरे पड़े हैं. इन जिलों में सड़कें बदहाल हैं, बिजली-पानी जैसी सुविधाओं का बुरा हाल है और सामुदायिक टॉयलेट व अन्य सुविधाओं की कमी है.
लेकिन अपने क्षेत्रों में ध्यान लगाने की जगह सांसद कैथल पर ही क्यों मेहरबान हैं, इसे लेकर कई सियासी सवाल खड़े हो रहे हैं. BJP का आरोप है कि कांग्रेसी सांसदों ने रणदीप सिंह सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला के क्षेत्र में सांसद निधि का पैसा इसलिए दिया है ताकि उनका राजनीतिक भविष्य सुरक्षित रहे. BJP आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा है, ‘‘कांग्रेस से बड़ी धोखेबाज पार्टी नहीं हो सकती. अपनी सांसद निधि का पैसा राजस्थान में खर्च नहीं कर रणदीप सिंह सुरजेवाला के बेटे के निर्वाचन क्षेत्र में खर्च करना विकास नहीं, वंशवाद और जनता के पैसे की खुली लूट है.’’
इधर, कांग्रेसी सांसदों ने इसे BJP की बौखलाहट करार दिया है. कांग्रेसी सांसदों का कहना है कि नियमानुसार हर सांसद अपने क्षेत्र के बाहर सांसद निधि के तहत कार्य करवा सकता है. BJP सांसद भी दूसरे राज्यों में सिफारिशें करते रहे हैं. इस मामले में घिरे चूरू सांसद राहुल कस्वां का कहना है, ‘‘सांसद निधि के नियमों में कुछ पैसा दूसरों राज्यों में दिए जाने का प्रावधान है. सांसद का काम केवल कार्य की सिफारिश करना है. काम की मंजूरी और दूसरे प्रावधान देखना अधिकारियों का काम है.’’
भरतपुर सांसद संजना जाटव अपने फैसले का बचाव करते हुए कहती हैं, ‘‘हमने सांसद निधि के नियमों के अनुसार ही पैसा खर्च करने की सिफारिश की है. रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी हमारे भरतपुर क्षेत्र में एक करोड़ रुपए दिए हैं, ऐसे में हमने पैसा देकर क्या गलती कर दीॽ BJP के हर राज्यसभा सांसद ने सांसद निधि का पैसा दूसरे राज्यों में खर्च करने की सिफारिशें की हैं.’’
क्या है सांसद-निधिॽ
23 दिसंबर 1993 को देश में पहली बार सांसदों को अपने क्षेत्रों के लिए सालाना 5 लाख रुपए की सांसद निधि दिए जाने की पहल हुई थी. लेकिन सांसद निधि का पैसा कैसे खर्च होगा, फरवरी 1994 में इसके दिशा-निर्देश जारी हुए. 1994 में सालाना 5 लाख रुपए की राशि को बढ़ाकर एक करोड़ और 1998 में एक करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपए किए जाने का फैसला हुआ.
2011 में इस राशि को सालाना 2 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दिया गया. कोरोना महामारी के वक्त 6 अप्रैल 2020 से 9 नवंबर 2021 तक सांसद निधि को निलंबित कर दिया गया था. इस समयावधि में सांसदों को किसी तरह की राशि आवंटित नहीं हुई. पिछले 30 वर्षों में इस योजना में करीब 9 बार संशोधन हुए हैं. एक अप्रैल 2023 को जारी सांसद निधि की गाइडलाइन के अनुसार सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाहर सालाना 25 लाख रुपए तक की अनुशंसा कर सकता है. सांसद की अनुशंसा पर संबंधित जिला कलक्टर कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करता है. काम करवाने की जिम्मेदारी सरकारी एजेंसियों या स्थानीय निकायों की होती है.
सांसद निधि का पैसा करदाताओं के टैक्स से आने वाला सरकारी फंड है जो पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा संचालित योजना है. इसका क्रियान्वयन सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से होता है. इस योजना में राज्य को सीधे पैसा नहीं मिलता, बल्कि हर सांसद को व्यक्तिगत रूप से सालाना 5 करोड़ रुपए की अनुशंसा करने की छूट होती है. राजस्थान में लोकसभा की 25 और राज्यसभा की 10 सीटें हैं. इस लिहाज से राजस्थान के सांसदों को इस निधि के तहत सालाना 175 करोड़ रुपए जारी होते हैं. वित्त मंत्रालय हर साल सांसद निधि के तहत 3940 करोड़ रुपए जारी करता है.

