उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और अटल बिहारी बाजपेयी सरकार में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री रहे मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का 19 मई को देहरादून में निधन हो गया. वे 92 वर्ष के थे. खंडूरी लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे. उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे उत्तराखंड और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई.
भुवन चंद्र खंडूरी उत्तराखंड के चौथे मुख्यमंत्री रहे. उनका जन्म 1 अक्टूबर 1934 को हुआ था. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर जॉइन की और लंबी सेवा के दौरान मेजर जनरल के पद तक पहुंचे. वे सेना में अपने शौर्य, अनुशासन और समर्पण के लिए खास तौर पर पहचाने जाते थे.
वर्ष 1990 में सेना से रिटायर होने के बाद वे दिल्ली स्थित सरकारी आवास खाली कर अपने गृह नगर देहरादून में सुकूनभरी जिंदगी बिताने की तैयारी कर चुके थे लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के आग्रह पर उन्होंने राजनीति में कदम रखा. उन्हें राजनीति में लाने का सुझाव उनके बाल सखा और BJP नेता केदार सिंह फोनिया ने दिया था.
वर्ष 1991 में वे पहली बार सांसद बने और अपनी प्रशासनिक क्षमता के कारण जल्द ही पार्टी नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए. बाजपेयी सरकार में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए उन्होंने स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना को धरातल पर उतारने और रिकॉर्ड समय में पूरा कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. करीब 5,800 किलोमीटर लंबी इस परियोजना ने दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को हाईवे नेटवर्क से जोड़कर देश के परिवहन, व्यापार और लॉजिस्टिक्स सिस्टम को नई रफ्तार दी. इसे भारत के आर्थिक विकास की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि इससे उद्योग, कृषि और व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा लाभ मिला.
मेजर जनरल खंडूरी ने परियोजना की मॉनिटरिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और समयबद्ध निर्माण पर विशेष ध्यान दिया. टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेज निर्णय क्षमता के कारण परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने में सफलता मिली. इसी वजह से उन्हें इस ऐतिहासिक हाईवे प्रोजेक्ट का चेहरा भी माना गया.
उन्होंने निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए ‘जल्दी काम पूरा करने पर बोनस और देरी पर जुर्माना’ की नीति लागू की. उनके कुशल नेतृत्व और सख्त प्रशासनिक क्षमता के कारण इस विशाल राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को उच्च गुणवत्ता और तय समय सीमा में पूरा किया जा सका. भारत के आधुनिक बुनियादी ढांचे की मजबूत नींव तैयार करने में उनका योगदान अहम माना जाता है.
सड़क सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए. सड़कों का विभाजन, सर्विस लेन और उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली जैसे सुरक्षा फीचर्स को उन्होंने अनिवार्य बनाया. साफ-सुथरी छवि, सख्त प्रशासन और विकासवादी सोच के कारण उन्हें उत्तराखंड की राजनीति में ईमानदार और सादगी पसंद नेता के तौर पर पहचान मिली.
पौड़ी गढ़वाल में जन्मे भुवन चंद्र खंडूरी दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रहे. उन्होंने सरकारी कामकाज में जवाबदेही बढ़ाने और सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया. सेना में मेजर जनरल के पद तक पहुंचने वाले खंडूरी राजनीति में भी अनुशासन बनाए रखने के लिए जाने जाते थे.

