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'बाहरी' का टैग छोड़कर विजेता तक...महाराष्ट्र में कैसे एक नई ताकत बनकर उभरी AIMIM

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनावों में 125 सीटें जीतकर स्थापित दलों के लिए एक अप्रत्याशित चुनौती बनकर उभरी है

असदुद्दीन ओवैसी ने BMC चुनाव में जमकर प्रचार किया था
अपडेटेड 28 जनवरी , 2026

महाराष्ट्र में इसी महीने हुए चुनावों में AIMIM ने सभी नगर निकायों में 125 सीटें हासिल कीं. इनमें छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) की 33 सीटें, मालेगांव की 21 सीटें, नांदेड़-वाघाला की 15, मुंबई, सोलापुर और धुले की 8-8 सीटें और नागपुर की 6 सीटें शामिल हैं. इनमें जीतने वाले छह पार्षद गैर-मुस्लिम हैं-छत्रपति संभाजीनगर (तीन), नागपुर (2) और मुंबई (एक). सोलापुर और मालेगांव में AIMIM नगर निकायों में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी है.

बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) सहित 29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे. कुल 893 नगर निगम वार्डों में 2,869 पार्षदों का चुनाव हुआ. मुंबई को छोड़कर अन्य सभी नगर निकायों में बहु-सदस्यीय वार्ड प्रणाली है, जिसमें नागरिक तीन से पांच पार्षदों का चुनाव करते हैं.

अन्य स्थापित मुख्यधारा के राजनीतिक दलों की तुलना में AIMIM का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है. बतौर उदाहरण, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 155 सीटें हासिल कीं, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का अगुवाई वाली एनसीपी को क्रमशः 36 और 324 सीटें मिलीं. मुंबई में एनसीपी (एससीपी) को सिर्फ एक सीट मिली. राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने पूरे महाराष्ट्र में सिर्फ 13 सीटें जीतीं, जिनमें से छह मुंबई की हैं.

अब AIMIM 5 फरवरी को होने वाले 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनावों में हिस्सा लेने वाली है.

मुंबई में AIMIM ने मुस्लिम बहुल गोवंडी-मानखुर्द क्षेत्र में सात सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया है; इसने अणुशक्तिनगर के चीता कैंप में भी एक सीट जीती. इन क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी झुग्गी बस्तियां हैं.

समाजवादी पार्टी (SP) विधायक और महाराष्ट्र में पार्टी अध्यक्ष अबू असीम आजमी 2009 से लगातार चार कार्यकाल से विधानसभा में मानखुर्द-शिवाजीनगर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जबकि वरिष्ठ NCP नेता और पूर्व मंत्री नवाब मलिक की बेटी सना मलिक अणुशक्तिनगर से विधायक हैं.

मुंबई में NCP ने तीन सीटें जीतीं, जबकि सपा को सिर्फ दो सीटें मिलीं, जो पहले क्रमशः नौ और छह की तुलना में काफी कम है. बीएमसी के सदन में 2017-22 में AIMIM के दो पार्षद थे.

AIMIM के एक सूत्र ने बताया कि मुसलमानों ने रणनीति के तहत मतदान करके अपने प्रतिनिधि चुने. पार्टी ने मुंबई में 30 उम्मीदवार उतारे थे और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी और उनके भाई व हैदराबाद के विधायक अकबरुद्दीन ने शहर भर में प्रचार किया था. उन्होंने कहा, “जो वोट पहले समाजवादी पार्टी और एनसीपी को जाते थे, वे अब हमें मिले हैं.”

महाराष्ट्र में AIMIM के एकमात्र विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल ने इस सफलता को अल्पसंख्यकों का मुख्यधारा के सियासी दलों से मोहभंग होने का नतीजा बताया. साथ ही जोड़ा, “जिसे परखा जा चुका है और जो असफल रहा है, उसे फिर से परखना मूर्खता है.” विधानसभा में मुस्लिम बहुल मालेगांव मध्य का प्रतिनिधित्व करने वाले इस्माइल ने दावा किया कि अन्य समुदायों के लोग भी AIMIM की ओर आकृष्ट हो रहे हैं.

हालांकि, सपा के पूर्व विधायक और मुंबई अध्यक्ष यूसुफ अब्राहानी ने आरोप लगाया कि AIMIM BJP के इशारे पर मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा, “स्पष्ट तौर पर ऐसा लगता है कि उन्हें BJP का समर्थन प्राप्त है.” साथ ही, जोड़ा कि AIMIM का उदय “सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा देगा.” अब्राहानी ने कहा, “यह एक बहुत खतरनाक ट्रेंड है. इससे हिंदू और अधिक हिंदू और मुसलमान और अधिक कट्टर मुसलमान होते जाएंगे. यह देश के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि इससे सामाजिक ताना-बाना बिगड़ता है.”

AIMIM के पूर्व विधायक वारिस पठान ने अब्राहानी के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है. उन्होंने कहा, “आलोचक हमारी जीत को पचा नहीं पा रहे हैं, इसलिए ऐसे आरोप लगा रहे हैं. वे अपनी हार के कारणों को समझने की कोशिश नहीं कर रहे.” पठान ने कहा कि यह सफलता दरअसल “असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व के लिए वोट” है.

मुंबई के एक वरिष्ठ मुस्लिम राजनेता ने गोवंडी क्षेत्र में AIMIM की शानदार जीत को आजमी के खिलाफ पनपती नाराजगी और कानून-व्यवस्था और ड्रग माफिया, अपराध और खराब नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दों को लेकर आक्रोश का नतीजा बताया. उन्होंने कहा, “मुंबई में मुसलमानों की अच्छी-खासी तादाद है और वे सिर्फ गोवंडी में ही नहीं रहते. AIMIM कुर्ला, दक्षिण मुंबई और मालवाणी जैसे इलाकों में अपनी पकड़ बनाने में नाकाम रही है.” उन्होंने आगे कहा कि पार्टी की सफलता क्षणिक हो सकती है क्योंकि यह भावनात्मक और मजहबी राजनीति पर केंद्रित थी.

दिसंबर में सम्पन्न नगर निगम और नगर परिषद चुनावों में AIMIM की जीत विवादों से घिरी रही थी. मुंब्रा से ठाणे नगर निगम (टीएमसी) चुनाव जीतने वाली सहर शेख ने अपने विजय भाषण में ठाणे उपनगर को “हरा रंग” देने का आह्वान करके लोगों को चौंका दिया था.

एक और विवाद अमरावती जिले के अचलपुर नगर परिषद में विभिन्न समितियों के चुनावों के दौरान AIMIM और BJP के गठबंधन से जुड़ा था. इससे पहले, अकोला जिले के अकोट में BJP और AIMIM के पार्षदों ने 'अकोट विकास मंच' के बैनर तले सत्ता-साझाकरण समझौता किया था. हंगामा मचने  पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस समझौते को रद्द करने को कहा और स्थानीय BJP विधायक प्रकाश भरसखाले को पार्टी ने फटकार लगाई. इसके बाद, पांच AIMIM पार्षदों ने गठबंधन छोड़ दिया.

ताजा घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया के लिए ओवैसी से संपर्क नहीं साधा जा सका है. राजनीतिक विश्लेषक सरफराज आरजू का कहना है कि मुसलमानों ने अपने समुदाय के उन उम्मीदवारों को वोट दिया है जिनके जीतने की सबसे अधिक संभावना थी. उन्होंने कहा, “ओवैसी की लोकप्रियता भले ही सीमित दायरे में है लेकिन आम आदमी, खासकर युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं तक पहुंच चुकी है.”

AIMIM ने महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में पहली बार 2012 के नांदेड़ वाघाला नगर निगम चुनाव के दौरान प्रवेश किया था. उस समय उसने मराठवाड़ा क्षेत्र के मुस्लिम युवाओं को आतंकवाद के आरोपों में गिरफ्तार किए जाने और असम में मुस्लिम विरोधी हिंसा जैसे मुद्दों को चुनावों के दौरान जमकर उछाला था. AIMIM ने एक स्थानीय दलित संगठन के साथ गठबंधन में 11 सीटें जीतीं, जबकि दलित संगठन के खाते में दो सीटें आई थीं.

2014 में AIMIM ने महाराष्ट्र विधानसभा में दो सीटें हासिल कीं और 2019 में भी इतनी ही सीटें जीतीं. 2019 में AIMIM ने पूर्व लोकसभा सांसद और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन किया.

पूर्व पत्रकार सैयद इम्तियाज जलील ने 2019 में हैदराबाद के बाहर AIMIM के पहले सांसद बनकर एक इतिहास रच दिया. 2014 में विधानसभा के लिए चुने गए जलील ने औरंगाबाद से अविभाजित शिवसेना के दिग्गज नेता चंद्रकांत खैरे को करारी शिकस्त दी.

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान जलील त्रिकोणीय मुकाबले में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के संदीपन भूमरे से हार गए. पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे दूसरे स्थान पर रहे. इस मुकाबले में मराठा समुदाय के व्यापक ध्रुवीकरण ने भूमरे को जीत दिलाई. खैरे एक हिंदू दलित हैं. 2024 में AIMIM को विधानसभा में केवल एक सीट मिली, जबकि जलील औरंगाबाद (पूर्व) से BJP के अतुल सावे से हार गए.

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