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हेमंत सरकार की सबसे लंबी कैबिनेट मीटिंग; दर्द और दवा की राजनीति से साधे कई समीकरण

हेमंत सोरेन सरकार ने इस कैबिनेट मीटिंग में 53 फैसले लिए लेकिन दो की सबसे ज्यादा चर्चा है

JMM नेता और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
अपडेटेड 16 अप्रैल , 2026

बीते बुधवार यानी 15 अप्रैल को सीएम हेमंत सोरेन ने कैबिनेट की बैठक ली. कहा यह जा रहा है कि हेमंत 2.0 की यह अब तक की सबसे लंबी कैबिनेट मीटिंग रही और कई मामलों में महत्वपूर्ण भी रही, जहां कुल 53 फैसले लिए गए. लेकिन दो फैसले ऐसे थे, जिनसे साफ पता चलता है कि हेमंत सोरेन दर्द और दवा की राजनीति एक साथ साधने में सफल रहे.

दरअसल, सरकार ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से मगही, भोजपुरी, मैथिली और अंगिका को हटा दिया गया था. जबकि बिहार से सटे इलाकों में यही भाषाएं बोली जाती हैं. पलामू और गढ़वा जिलों के लिए राज्य सरकार ने स्थानीय भाषा के रूप में नागपुरी और कुडुख (उरांव) का चयन किया था.

कांग्रेस कोटे के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर पलामू इलाके से आते हैं, उन्होंने सरकार के इस निर्णय के खिलाफ आवाज उठाई. पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय गोड्डा इलाके से आती हैं, जहां अंगिका बोली जाती है. उन्होंने भी सरकार के इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह सीएम से किया था.

अब सीएम हेमंत सोरेन ने अपनी सरकार के पुराने फैसले को पलट दिया है. बताया जा रहा है कि अब पलामू इलाके में भोजपुरी और मगही, वहीं संताल परगना इलाके में अंगिका भाषा को शामिल किया जाएगा. इसके असर को ऐसे समझिए कि JTET की परीक्षा दस साल के बाद हो रही है. लगभग चार लाख से अधिक परीक्षार्थी इसका इंतजार कर रहे हैं. झारखंड एकेडमिक काउंसिल 28 अप्रैल से इसके लिए आवेदन लेने जा रही है.

कुल मिलाकर सबके लिए 'विन-विन सिचुएशन' है. इस फैसले से हेमंत सोरेन की छात्र हितैषी छवि को और बल मिलेगा, क्योंकि उनके इस फैसले से राज्य के एक लाख से अधिक युवाओं को सीधा फायदा होगा. वहीं दोनों कांग्रेसी मंत्रियों के लिए यह बात कही जाने लगी है कि वे सरकार के फैसले को अपने लोगों के हित में बदलने का माद्दा रखते हैं.

इसके इतर, हेमंत सोरेन अपने कोर आदिवासी वोटर को यह बताने में सफल रहे कि उन्होंने तथाकथित बाहरी भाषा को रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन कांग्रेस के विरोध के कारण ऐसा नहीं हो सका. अब JTET  की नियमावली को नए सिरे से परिभाषित किया जाएगा. यानी चित भी मेरी, पट भी मेरी.

एक फैसला, 7 लाख लोगों को राहत

अब दूसरे फैसले पर आते हैं. कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्य में अनधिकृत या अवैध तरीके से बने भवनों को नियमित किया जाएगा. अवैध मकान का मतलब वे मकान हैं, जिनका निर्माण करने से पहले उनका नक्शा पास नहीं कराया गया है, या फिर नक्शा पास कराने के बावजूद उसका पालन नहीं किया गया है.

अब नए नियम के तहत राज्यभर में 10 मीटर ऊंचाई (जी+2) तक के आवासीय भवनों को रेगुलराइज किया जाएगा. अधिकतम 300 वर्ग मीटर क्षेत्र तक के मकान इस दायरे में आएंगे. सरकार ने इसके लिए "झारखंड रेगुलराइजेशन ऑफ अनऑथराइज्डली कंस्ट्रक्टेड बिल्डिंग रूल्स, 2026" के गठन को भी स्वीकृति दी है.

प्रस्ताव के मुताबिक, रेगुलराइजेशन के लिए आवासीय भवनों पर न्यूनतम 10 हजार रुपए और गैर-आवासीय भवनों पर 20 हजार रुपए शुल्क तय किया गया है. बिना स्वीकृत नक्शे के बने भवनों को वैध कराने के लिए मकान मालिकों को पेनाल्टी भी देनी होगी. यह योजना केवल उन्हीं भवनों पर लागू होगी, जो 31 दिसंबर 2019 से पहले बने हैं. इसके तहत राज्य भर में 10 मीटर की ऊंचाई तक के आवासीय भवनों को रेगुलराइज किया जा सकेगा. अनुमान है कि राज्यभर के 40 शहरों के 7 लाख से अधिक मकान मालिकों को इसका सीधा फायदा होने जा रहा है.

ये वो लोग हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से भी निराशा हाथ लगी थी. ऐसे मकानों को वैध करने के लिए झारखंड में साल 2017 से प्रयास चल रहे थे. एक कमेटी ओडिशा, मध्य प्रदेश और तेलंगाना के मॉडल का अध्ययन कर मसौदा तैयार कर चुकी थी. तब तक मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में साफ कहा था कि "बिना नक्शा पास कराए, या नक्शा के इतर बनाए गए मकान पूरी तरीके से अवैध हैं. चाहे वह मकान कितना भी पुराना क्यों न हो, उसे वैध करार नहीं दिया जा सकता. लोगों को नियम तोड़ने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता."

इस दौरान राज्य भर में कई जगहों पर अवैध निर्माण को कभी कोर्ट तो कभी सरकार के आदेश से तोड़ा जा रहा था. नया नियम लाखों लोगों के लिए जीवन भर की पूंजी को वैध बनाकर रखने का एक मौका है, जिसे सरकार ने दिया है. इस निर्णय से साफ हो रहा है कि दर्द और दवा की राजनीति में भी हेमंत ने विरोधियों को पीछे छोड़ा है.

एक और फैसला, जिसकी सब सराहना कर रहे हैं

गिरिडीह जिले की 14 महीने की बच्ची वामिका एक दुर्लभ बीमारी 'स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी' से ग्रसित है. राज्य सरकार ने उसके इलाज के लिए 9 करोड़ रुपया स्वीकृत किया है. गिरिडीह वह जिला है जहां से राज्य सरकार के प्रभावी मंत्रियों में से एक सुदिव्य कुमार सोनू आते हैं. कल्पना सोरेन जिस विधानसभा का प्रतिनिधित्व करती हैं यानी गांडेय, वह भी इसी जिले के अंतर्गत आता है.

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