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हेमंत सोरेन को असम में मिला नया साथी, कांग्रेस की बढ़ी बेचैनी

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) असम में जय भारत पार्टी (JBP) के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है

Hemant  Soren with JBP Leader Teharu Gorh
सीएम हेमंत सोरेन के बाईं ओर जेबीपी अध्यक्ष तेहारू गौड़ और पीछे झारखंड के मंत्री चमरा लिंडा
अपडेटेड 11 मार्च , 2026

हेमंत सोरेन की अगुवाई में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) सधे हुए कदमों से असम की राजनीति में घुसने की कोशिश कर रहे हैं. इसी कड़ी में 10 मार्च को उन्हें असम में एक नए राजनीतिक दल का साथ मिला. आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उभरते राजनीतिक समीकरणों के बीच हेमंत सोरेन ने बिस्वनाथ जिले में नवगठित 'जय भारत पार्टी' (JBP) की तरफ से आयोजित एक बैठक में हिस्सा लिया.

असम में यह उनकी दूसरी जनसभा थी. इससे पहले 1 फरवरी को जब वे पहली बार असम में जनसभा करने गए थे, तब उन्हें 'ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ असम' का साथ मिला था. पिछले तीन महीनों से JMM) के कई नेता असम के विभिन्न इलाकों का दौरा कर रहे हैं और कई संगठनों से चर्चा कर रहे हैं. पार्टी विशेष रूप से वहां सदियों से रह रहे 'टी ट्राइब' (चाय बागान जनजातियों) के बीच पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है.

चुनाव की तैयारी के लिए JMM के कई वरिष्ठ आदिवासी नेता लगातार असम का दौरा कर रहे हैं. इसी सिलसिले में झारखंड के आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा पिछले एक सप्ताह से वहां कैंप कर रहे हैं.

आखिर JBP की क्षमता कितनी है?

JBP की स्थापना 9 नवंबर 2024 को प्रदीप नाग के नेतृत्व में हुई थी. प्रदीप ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ असम के नेता रहे थे. 8 अप्रैल 2025 को उनके निधन के बाद फिलहाल तेहारू गौड़ पार्टी के अध्यक्ष हैं. वे पूर्व में कांग्रेस नेता रहे हैं और एक बार पंचायत चुनाव भी जीत चुके हैं.

JBP के महासचिव जूना कुजूर बताते हैं, "मई 2025 में हुए पंचायत चुनाव में हमारी पार्टी ने कुल 121 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे. संसाधनों की कमी के कारण हमने कोई खास प्रचार नहीं किया, फिर भी हमारे 26 प्रत्याशियों को जीत मिली. इससे पहले अप्रैल 2025 में हुए बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल के चुनाव में हमने 9 प्रत्याशी उतारे थे. वहां जीत तो नहीं मिली, लेकिन हमारे उम्मीदवारों की मौजूदगी की वजह से BJP और कांग्रेस, दोनों के उम्मीदवार हार गए थे."

जय भारत पार्टी की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में हेमंत सोरेन
जय भारत पार्टी की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में हेमंत सोरेन

कुजूर के मुताबिक, "यहीं से हमें भरोसा हुआ कि हम विधानसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं. संसाधनों के लिए हमने पिछले साल 28 दिसंबर को रांची जाकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी. हमने कहा था कि अगर वे आर्थिक और अन्य मदद करें, तो हम कई सीटें जीत सकते हैं."

ऐसे में सवाल है कि क्या JBP इस स्थिति में है कि वह JMM का सहयोग करे, या JMM इस साथ को जीत में बदल पाएगी? JBP के केंद्रीय अध्यक्ष तेहारू गौड़ दावा करते हैं, "अगर सोरेन हमारा समर्थन करते हैं तो मुझे भरोसा है कि हम सभी 40 सीटें जीत सकते हैं. अगर JMM के साथ गठबंधन का प्रदर्शन मजबूत रहता है, तो राज्य में सरकार बनाने की प्रक्रिया पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा." गौड़ दावा करते हैं कि उनकी पार्टी और JMM के बिना असम में कोई सरकार नहीं बनेगी. उनके अनुसार, राज्य के छोटे समुदायों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है और अब लोग राजनीतिक बदलाव चाहते हैं.

जूना के मुताबिक, दोनों दलों ने मिलकर 'मिशन-40' तैयार किया है. इसके तहत दोनों दल मिलकर कुल 40 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. ये सभी सीटें मुस्लिम बहुल हैं या आदिवासी बहुल. आने वाले समय में सीटों का बंटवारा किया जाएगा. फिलहाल यह तय हुआ है कि जिस सीट से JBP लड़ेगी, वहां JMM अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी.

JMM की तैयारी

JMM सूत्रों के मुताबिक, झारखंड के मंत्री चमरा लिंडा को असम में संगठन खड़ा करने और नए दलों के साथ संभावित गठबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वे एक सप्ताह से असम में ही जमे हुए हैं, जबकि रांची में विधानसभा का सत्र चल रहा है. यही नहीं, हेमंत सोरेन ने JBP के कार्यक्रम के बाद 10 मार्च को ही तेजपुर विश्वविद्यालय के पास झारोनी में 'नॉर्थ ईस्ट मुस्लिम स्टूडेंट्स यूनियन' (NEMSU) की तरफ से आयोजित इफ्तार पार्टी में भी हिस्सा लिया.

क्या इन छोटी पहलों से हेमंत सोरेन असम विधानसभा की कुछ सीटों पर प्रभाव डाल सकते हैं? पहले ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन और अब JBP के साथ आने का संकेत है कि छोटे लेकिन प्रभावी संगठनों से हाथ मिलाया जाए. JMM फिलहाल असम में दोनों प्रमुख दलों से नाराज या उपेक्षित क्षेत्रीय नेताओं को साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है. पार्टी महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य कहते हैं, "हम पूरी तैयारी के साथ असम चुनाव लड़ने जा रहे हैं. छोटे दलों को साथ लेने की प्रक्रिया अभी जारी है. चुनाव की घोषणा के साथ ही स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी."

इस पूरी कवायद को कांग्रेस कैसे देख रही है

झारखंड में JMM और कांग्रेस गठबंधन की सरकार चला रहे हैं, लेकिन असम में कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है. वहां मुख्य मुकाबला BJP और कांग्रेस के बीच है. ऐसे में हेमंत सोरेन की सक्रियता से असम कांग्रेस असहज दिख रही है.

झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बंधु तिर्की को असम में चुनावी अभियान का ऑब्जर्वर बनाया गया है. वे पिछले छह महीनों से लगातार असम का दौरा कर रहे हैं. तिर्की कहते हैं, "हम सहज महसूस नहीं कर रहे हैं. इसी सिलसिले में हमारे जनरल सेक्रेटरी जितेंद्र भंवर और वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई 12 मार्च को रांची आ रहे हैं. दोनों हेमंत सोरेन से मिलकर असम की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करेंगे."

वे आगे कहते हैं, "असम की जनता परिवर्तन चाहती है. अगर इंडिया गठबंधन के किसी भी दल की चूक से नुकसान हुआ, तो इसका सबसे ज्यादा खमियाजा वहां के आदिवासियों, खासकर माइग्रेटेड आदिवासियों को उठाना पड़ेगा. गठबंधन के सभी दलों को यह बात समझकर ही निर्णय लेना होगा." बता दें कि बंधु तिर्की की बेटी शिल्पी नेहा तिर्की झारखंड में कृषि मंत्री हैं.

JMM ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी. अगर वह आदिवासी बहुल सीटों पर उम्मीदवार उतारती है, तो इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को हो सकता है. हालांकि, कांग्रेस यह भी मानती है कि जिस तरह ममता बनर्जी असम में खाता नहीं खोल पातीं, वैसे ही हेमंत सोरेन का प्रभाव भी सीमित रह सकता है. बावजूद इसके, किसी भी संभावित नुकसान को रोकने के लिए कांग्रेस हेमंत सोरेन से बातचीत को प्राथमिकता दे रही है.

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