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हाथरस हादसा : पुलिस की नौकरी से लेकर यौन शोषण के आरोप में जेल जाने तक, क्या है भोले बाबा की कहानी?

यूपी के हाथरस जिले में 2 जुलाई को मची भगदड़ में अब तक 122 लोगों की मौत हो चुकी है. हादसे के बाद से ही कथावाचक नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा भूमिगत है

डील-डाल के साथ चश्मा पहने नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा
डील-डाल के साथ चश्मा पहने नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा
अपडेटेड 3 जुलाई , 2024

हमारे यहां एजेंटों की महिमा अपरंपार है. चाहे परीक्षाओं का आयोजन हो, सरकारी नौकरी की बात, या फिर ईश्वर की भक्ति ही क्यों न हो; इनसे बचना बहुत मुश्किल काम है. धर्म के मामले में स्थिति और गंभीर है क्योंकि इन एजेंटों की 'कृपा' के शिकार ज्यादातर वे गरीब और अशिक्षित लोग हैं जो आसानी से इनके चंगुल में फंस जाते हैं.

जो बातें अब सामने आ रही हैं उसके बाद यह कहने में संकोच नहीं कि ऐसे ही एक धार्मिक एजेंट के चंगुल में फंसे लोग यूपी के हाथरस जिले में 2 जुलाई को आयोजित एक सत्संग में हिस्सा लेने पहुंचे थे. जिले के पुलराई गांव में हो रहे 'भोले बाबा' नाम के कथावाचक का सत्संग जब खत्म हुआ, तो लोग उनकी चरण-धूलि लेने के लिए उतावले हो उठे. नतीजा यह हुआ कि भयानक भगदड़ मची और अब तक के आंकड़ों के मुताबिक, 122 लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं.

शुरुआती जांच में इस घटना के पीछे जो कुछ वजहें सामने आई हैं उनमें सत्संग में उम्मीद से अधिक लोगों का इकट्ठा होना, चरण-धूलि हासिल करने के प्रयास में एक-दूसरे पर गिरना और स्वास्थ्य सुविधाओं की लचर व्यवस्था प्रमुख हैं. आजतक के मुताबिक, पुलिस एफआईआर में इस बात का जिक्र है कि 80 हजार लोगों के कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति ली गई और तीन गुना ज्यादा यानी ढाई लाख लोगों की भीड़ जुटा ली गई.

इलाके का दौरा करने के बाद मीडिया से बातचीत में यूपी के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने बताया, "कथावाचक के मुख्य सेवादार ने दरख्वास्त देकर सूचित किया था कि सत्संग कार्यक्रम में 80 हजार के करीब लोग शामिल होंगे. लेकिन इस सीमा का उल्लंघन कर उम्मीद से अधिक लोग पहुंच गए. वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात थी. मेरी जानकारी में आया है कि लोग उनके (कथावाचक) पैर छूने के लिए दौड़े और उनकी चरण-धूलि एकत्र करने की कोशिश की, जिससे भगदड़ मच गई. कई लोग पास के नाले में गिर गए."

कहा जा रहा है कि इस हादसे के बाद भोले बाबा उर्फ नारायण साकार हरि भूमिगत है. FIR में भी भोले बाबा को आरोपी नहीं बनाया गया है. मुख्य आरोपी आयोजक और सेवादार देवप्रकाश मधुकर है. दूसरे नंबर पर अन्य आयोजक और अन्य सेवादार आरोपी हैं. अब यहां सवाल उठता है कि यह भोले बाबा है कौन? इसकी अब तक की कहानी क्या रही है?

'भोले बाबा' बनने से पहले था यूपी पुलिस में कांस्टेबल

2 जुलाई यानी हादसे से पहले हाथरस की सड़कें जिस नारायण साकार हरि नाम के कथावाचक के सत्संग के पोस्टरों से पटी थीं, वह एक समय में यूपी पुलिस के स्थानीय खुफिया विभाग में कांस्टेबल रहा था. इस कथावाचक को लोग भोले बाबा और विश्व हरि के नाम से भी जानते हैं. लेकिन इसका वास्तविक नाम सूरजपाल सिंह जाटव है जो कासगंज जिले के पटियाली के बहादुरपुर गांव का निवासी है.

58 साल का सूरजपाल सिंह एक दलित परिवार से है. 1997 की बात है जब वह इटावा में कांस्टेबल की नौकरी कर रहा था. इसी दौरान उस पर यौन शोषण की एक एफआईआर दर्ज हुई. इस मामले में उसे कांस्टेबल की नौकरी से निलंबित कर दिया गया. वह करीब एक दशक तक सेवा में रहा था और इस दौरान उसने करीब 18 पुलिस थानों और स्थानीय खुफिया विभाग में अपनी सेवाएं दी.

बीबीसी से बातचीत में इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार बताते हैं कि छेड़खानी वाले मामले में सूरजपाल एटा जेल में काफी लंबे समय तक कैद में रहा और जेल से रिहाई के बाद ही वह बाबा की शक्ल में लोगों के सामने आया.

नौकरी से वीआरएस लेकर सूरजपाल बना 'भोले बाबा'

जब सूरजपाल के कैद की अवधि खत्म हुई तो वह अदालत की शरण में गया जहां उसकी नौकरी फिर बहाल हो गई. उसे आगरा में तैनाती मिली, लेकिन इस बार उसका इरादा कुछ और था. उसने नौकरी से वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) ले लिया. इसके बाद वह अपने गांव नगला बहादुरपुर पहुंचा, जहां कुछ दिन रुकने के बाद उसने  ईश्वर से संवाद होने का दावा किया और खुद को भोले बाबा के तौर पर स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया.

रंजीत सिंह, जो बाबा के आश्रम में काम करते रहे हैं, उन्होंने एनडीटीवी से बातचीत में बाबा के काले कारनामों का खुलासा किया है. रंजीत ने बताया, "मेरे पापा इनके आश्रम में 15 साल रहे हैं. भोले बाबा का जहां गांव है हम वहीं से हैं. मेरा बचपन उसी गांव में गुजरा है. बाबा के पिताजी नन्हें बाबू थे, जो किसान थे. पुलिस की नौकरी छोड़ने के बाद बाबा ने सत्संग का ढोंग रचाकर पहले अपने एजेंट तैयार किए. एजेंट इकट्ठा करने के बाद बाबा ने उनको पैसा दिया."

वे आगे बताते हैं, "इसके बाद यहां लोग आने शुरू हुए. ये एजेंटों को पैसे देकर ये कहलवाता था कि उनको बाबा की उंगली पर चक्र दिख रहा है. जैसे बाबा बोलते थे उनके एजेंट वैसे ही बोलते थे. एजेंट, बाबा के हाथ में चक्र तो कभी त्रिशूल दिखने की बात करके जनता को भ्रमित करते थे. जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे-वैसे बाबा अपने एजेंटों को देश के दूसरे राज्यों में भेजकर वहां अपने सत्संग आयोजित कराने लगा. भोली भाली जनता को के सामने ये एजेंट बाबा की महिमा का ऐसा गुणगान करते थे कि जनता इन्हें भगवान की तरह देखने लगी."

बिना दान दक्षिणा के कई आश्रम

दिलचस्प यह है कि भोले बाबा अपने भक्तों से कोई भी दान, दक्षिणा और चढ़ावा आदि नहीं लेता है लेकिन इसके बावजूद उसके कई आश्रम स्थापित हो चुके हैं. यूपी में कई दूसरे जगहों पर स्वामित्व वाली जमीन पर आश्रम स्थापित करने का दावा भी किया जा रहा है. भोले बाबा अपने सत्संगों में अपने भक्तों की सेवा सेवादार बनकर करते नजर आता है. हालांकि इस बात में बहुत संशय नहीं है कि वह ये सब अपने भक्तों में लोकप्रिय होने के लिए सोच समझकर करता हो.

भोले बाबा पारंपरिक बाबाओं की तरह गेरुआ पहने या धोती-कुर्ता में नहीं नजर आता बल्कि वह हमेशा सफेद कपड़ों में दिखता है. रंगीन धूप का चश्मा पहनता है. वह पैंट-शर्ट और शूट तक पहने नजर आता है. भोले बाबा के गांव में उसका आश्रम 30 एकड़ में फैला हुआ है. वह कारों के काफिले के साथ चलता है और उसके पास निजी बॉडीगार्ड भी हैं.

हालांकि इंटरनेट पर वह बहुत लोकप्रिय नहीं हैं. सोशल मीडिया पर उसके भक्तों की बहुत मौजूदगी नहीं दिखाई देती. वह मीडिया से दूरी बनाए रखता है, लेकिन जमीन पर खासकर ग्रामीण इलाकों में उसके लाखों की संख्या में अनुयायी हैं. उसके अनुयायी जिनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं, आमतौर पर गुलाबी कपड़े पहनती हैं और उसे "भोले बाबा" के रूप में पूजती हैं.

पत्नी या मामी, कौन हैं ये माताश्री?

भोले बाबा के सत्संगों में अक्सर उसके साथ एक महिला बैठी नजर आती है. कई दावों में इस महिला को बाबा की पत्नी या सेविका बताया जा रहा है. लेकिन आजतक के मुताबिक, भक्तों के बीच 'माताश्री' के नाम से पहचाने जानी वाली महिला बाबा की पत्नी नहीं, बल्कि रिश्ते की मामी लगती है.

हालांकि इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बहादुर नगर गांव की प्रधान नाजिस खानम के पति जफर अली बताते हैं, "वह (भोले बाबा) शादीशुदा है और उसके कोई बच्चे नहीं हैं. पुलिस की नौकरी छोड़ने के बाद उसने अपना नाम भोले बाबा रख लिया, जबकि उसकी पत्नी को माताश्री के नाम से जाना जाता है." 

अली के मुताबिक बाबा का परिवार संपन्न है और वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर का है. उसके बड़े भाई की कुछ साल पहले मौत हो गई थी, जबकि छोटे भाई राकेश, जो एक किसान हैं, अभी भी अपने परिवार के साथ गांव में रहते हैं.

"नशे और लड़कियों का आदी है भोले बाबा"

एनडीटीवी से बातचीत में रंजीत सिंह ने दावा किया है कि, "बाबा के आश्रम में 16-17 साल की कई लड़कियां रहती है जिन्हें ये अपनी शिष्या बताता है. वह इन लड़कियों से गलत काम भी करवाता है. साथ ही बाबा सिगरेट और शराब का आदी है. ये बाबा नहीं बल्कि पाखंडी बाबा है. बहादुरनगर में कई लोगों की मौत हुई है, जो मैंने भी देखी है."

रंजीत ने आगे कहा कि,"मेरे पापा को इस बाबा ने धमकी भी दी थी. कहा था कि मैं तुम्हें बहुत पैसा दूंगा तुम मेरे पास आ जाओ. बाबा कम उम्र की लड़कियों के साथ गलत काम भी करता है. हम इसके पुराने आश्रम में भी आते थे. बाबा बहादुरनगर के आश्रम में किसी भी लोकल की एंट्री नहीं होने देता. अगर कोई भी बाहर का आदमी दिखता है तो सारी चीजें को बंद कर दिया जाता है. अगर पुलिस ही आश्रम की तरफ आते दिखती है तो पहले लड़कियों को पीछे के रास्ते से भगा देता है और आश्रम को बंद कर देता है."

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