scorecardresearch

गोवा में इतिहास और परंपराओं का कैसे हो रहा है डिजिटाइजेशन?

इतिहास और परंपराओं से जुड़े महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्स के डिजिटाइजेशन के लिए गोवा ने ऑडियो विजुअल अभिलेखागार (GSAVA) की शुरुआत की है

गोवा की संस्कृति को सहेजकर रखा जाएगा
गोवा की संस्कृति को सहेजकर रखा जाएगा
अपडेटेड 11 फ़रवरी , 2026

गोवा सरकार के अभिलेखागार (आर्काइव) विभाग ने राज्य के इतिहास और मौखिक परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने का फैसला किया है. इतिहास और परंपराओं से जुड़े महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्स के डिजिटाइजेशन के लिए गोवा ने ऑडियो विजुअल अभिलेखागार (GSAVA) की शुरुआत की है.

GSAVA ने राज्य सरकार के सामने एक रिसर्च विंग शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा है. इस ऑडियो-विजुअल संग्रह का उद्देश्य पुरातन वस्तुओं और संस्कृति की ऑडियो-विजुअल सामग्री को संरक्षित और डिजिटाइज़ करना है. साथ ही राज्य के मौखिक इतिहास और संस्कृति को डिजिटल रूप देकर लोगों तक पहुंचाना है.

अभिलेखागार विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "हम गांवों की उन परंपराओं, रीति-रिवाजों और प्रथाओं को डॉक्यूमेंट करेंगे, जिन्हें अब तक कहीं भी दर्ज नहीं किया गया है." GSAVA गोवा के त्योहारों, कलाओं और शिल्प कला जैसे विषयों के अलावा स्वतंत्रता सेनानियों के मौखिक इतिहास और पारंपरिक प्रथाओं पर गांव में रहने वाले बुजुर्गों के अनुभवों को भी रिकॉर्ड करेगा.

GSAVA प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, “गोवा के इतिहास और संस्कृति से जुड़े इन विषयों को अंतिम रूप दे दिया गया है और हमने लोगों से अपनी प्रतिक्रिया देने की अपील की है. हमें अब तक अच्छी प्रतिक्रिया मिली है.”

GSAVA के गठन को राज्य के 2025-26 बजट में मंजूरी दी गई थी. अब तक यह संस्था अनुसंधान के लिए अभिलेखों और किताबों पर निर्भर है. लेकिन, अब GSAVA ने अपने जरिए एकत्रित जानकारी को प्रमाणित करने के लिए अपने स्वयं के अनुसंधान विंग बनाने का प्रस्ताव रखा है.

विभाग ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डिंग के लिए एक एजेंसी को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया में है. अधिकारी ने कहा, "पर्याप्त डेटा एकत्रित हो जाने के बाद, इसे ऑनलाइन उपलब्ध कराने के बारे में निर्णय लिया जाएगा." गोवा का अभिलेखागार विभाग भारत का सबसे पुराना विभाग है और इसकी स्थापना पुर्तगाली उपनिवेशवादियों के समय में हुई थी.

इसकी स्थापना 25 फरवरी, 1595 को इतिहासकार डियोगो डो कौटो ने की थी, जो इसके पहले अभिलेखपाल भी थे. अभिलेखागार का नाम 'टोरे डो टोम्बो डो एस्टाडो दा इंडिया' रखा गया था.

संग्रह में मौजूद सबसे पुराना पुर्तगाली अभिलेख 1498 का ​​है. अभिलेखागार में एशिया और अफ्रीका में यूरोपीय विस्तार के इतिहास, विशेष रूप से भारत में पुर्तगाली साम्राज्य (1510-1961) के उदय, पतन और विघटन की घटना से जुड़ी हर जानकारी है. इसके अलावा, एशिया और अफ्रीका से यूरोपियों को बाहर निकालने के लिए एशियाई और अफ्रीकी शक्तियों के जरिए किए गए प्रयासों के बारे में स्रोत सामग्री यहां मौजूद है.

इसमें गोवा के स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित दस्तावेज, वसीयतनामा, चर्चों के अभिलेख और ग्राम समुदायों से संबंधित अभिलेख भी शामिल हैं. ये अभिलेख पुर्तगाली और मराठी की मोडी लिपि में हैं. कुछ संस्कृत, फारसी, अंग्रेजी, फ्रेंच और यहां तक ​​कि वियतनामी और स्वाहिली में भी हैं.

इस संग्रह में मराठी भाषा की गोयकनाडी लिपि में कन्नड़ भाषी अभिलेख भी हैं. अभिलेखागार में कुंडाइकर परिवार के निजी संग्रह भी हैं, जो पोंडा के पास कुंडाईम (कुंडाईम) गांव के कुलकर्णी या राजस्व अधिकारी थे. गोवा अभिलेखागार ने गिरजाघरों, संस्थानों, घरों, पुस्तकालयों और पारिवारिक संपत्तियों में मौजूद ऐतिहासिक पांडुलिपियों, पत्रों और निजी संग्रहों को खोजने के लिए एक सर्वे भी शुरू किया है.

सर्वे के बाद प्राप्त होने वाले इन दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन, संरक्षण और सूचीकरण किया जाएगा. यह कार्य केंद्र सरकार के ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत 'गोवा राज्य पांडुलिपि मिशन' के तहत किया जा रहा है.

Advertisement
Advertisement