scorecardresearch

नवाबी संस्कृति की नगरी लखनऊ AI हब बनेगी तो क्या-क्या बदल जाएगा?

योगी सरकार की AI सिटी योजना से लखनऊ को ग्लोबल टेक हब बनाने, हज़ारों रोज़गार और मज़बूत स्टार्टअप इकोसिस्टम का रास्ता खुलेगा

Charbagh Railway Station Lucknow
चारबाग रेलवे स्टेशन, लखनऊ
अपडेटेड 5 जनवरी , 2026

नवाबों की तहज़ीब, अदब और नज़ाकत के लिए पहचाना जाने वाला लखनऊ अब एक नए दौर की दहलीज़ पर खड़ा है. योगी आदित्यनाथ सरकार इस ऐतिहासिक शहर को देश की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिटी बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा रही है. 

जिस लखनऊ की पहचान कभी इमामबाड़ों, चिकनकारी और गंगा-जमुनी संस्कृति से रही, वही शहर अब भविष्य की तकनीक, डेटा और एल्गोरिद्म का केंद्र बनने जा रहा है. राज्य सरकार ने AI सिटी के लिए ज़मीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 

यह कदम बजट में प्रावधान किए जाने के लगभग एक साल बाद उठाया गया है, जिसे नीति निर्धारकों और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों के बीच एक निर्णायक मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है. सरकार का साफ़ इरादा है कि लखनऊ को सिर्फ़ प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि देश के बड़े IT और AI हब के बराबर खड़ा किया जाए.

योजना विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार के मुताबिक, लखनऊ AI सिटी को एक समर्पित और आत्मनिर्भर टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इसके लिए डिफेंस एक्सपो साइट के पास ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा चिह्नित किया गया है. आलोक कुमार के मुताबिक कुल क्षेत्रफल का लगभग 60 फीसदी हिस्सा कोर ज़ोन होगा, जहां AI इनोवेशन सेंटर, टेक्नोलॉजी पार्क और एडवांस्ड रिसर्च फैसिलिटीज विकसित की जाएंगी. शेष 40 फीसदी क्षेत्र में आवासीय, वाणिज्यिक और सामाजिक बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, ताकि यह सिर्फ़ कार्यस्थल नहीं बल्कि एक जीवंत टेक्नोलॉजी सिटी बने. 

सरकार के अधिकारियों के अनुसार, AI सिटी प्रोजेक्ट को दो चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले चरण में कोर टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रहेगा, जबकि दूसरे चरण में रेज़िडेंशियल और सोशल इकोसिस्टम को मज़बूत किया जाएगा. इस मॉडल के ज़रिये सरकार ऐसे टेक प्रोफेशनल्स और कंपनियों को आकर्षित करना चाहती है, जो काम और जीवन के संतुलन को प्राथमिकता देते हैं. 

लखनऊ को AI सिटी बनाने की सोच अचानक नहीं आई. पिछले महीने दिसंबर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन से मुलाकात की थी. इसके बाद लखनऊ में AI सिटी विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया. एक आधिकारिक बयान में कहा गया था कि इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को AI के क्षेत्र में ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करना है. जुलाई 2025 में इस योजना को बड़ा फंड मिला, जिसने इसे कागज़ से ज़मीन पर उतारने की प्रक्रिया को तेज़ कर दिया.

सरकार की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक AI सिटी में अत्याधुनिक डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, AI रिसर्च लैब, स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर और ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए आधुनिक वर्कस्पेस विकसित किए जाएंगे. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “यह सिर्फ़ एक टेक पार्क नहीं होगा, बल्कि ऐसा इकोसिस्टम होगा जहां रिसर्च, इनोवेशन और प्रोडक्ट डेवलपमेंट एक साथ आगे बढ़ेंगे.” सरकार को उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट से स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ताक़त मिलेगी और भविष्य की तकनीकों पर आधारित हज़ारों रोज़गार के अवसर पैदा होंगे. योगी सरकार के एक प्रवक्ता के अनुसार, “हमारा लक्ष्य भारतीय और अंतरराष्ट्रीय AI कंपनियों को एक ही स्थान पर विश्व स्तरीय सुविधाएं देना है, ताकि वे अपने प्रोजेक्ट को तेज़ी से विकसित और स्केल कर सकें.” सरकार ने साफ़ किया है कि AI सिटी को दुनिया के शीर्ष 20 ग्लोबल AI हब में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है. 

लखनऊ की एक बड़ी ताक़त उसका शैक्षणिक और तकनीकी इकोसिस्टम है. IIM और IIT जैसे संस्थान पहले से ही रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट में अहम भूमिका निभा रहे हैं. IT विशेषज्ञों का मानना है कि AI सिटी इन संस्थानों के साथ मिलकर एक मज़बूत और भविष्य के लिए तैयार टैलेंट पूल तैयार करेगी. IIIT लखनऊ से जुड़े एक प्रोफेसर का कहना है, “अगर इंडस्ट्री और अकादमिक संस्थानों के बीच सही तालमेल बनता है, तो लखनऊ AI के क्षेत्र में बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों को चुनौती दे सकता है. यहां पहले से ही प्रतिभा मौजूद है, ज़रूरत है उसे सही प्लेटफॉर्म देने की.”

सरकार का दावा है कि AI सिटी से हज़ारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार पैदा होंगे. IT प्रोफेशनल्स, डेटा साइंटिस्ट, इंजीनियर, रिसर्चर और स्टार्टअप आंत्रपेन्योर के लिए यह एक बड़ा अवसर होगा. साथ ही, स्थानीय युवाओं को राज्य के भीतर ही अच्छी क्वालिटी के रोज़गार मिलेंगे, जिससे नौकरी के लिए दूसरे शहरों में पलायन कम होगा. AI सिटी को ग्रीन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल पर विकसित किया जाएगा. सरकारी दस्तावेज़ों के अनुसार, ऊर्जा दक्ष इमारतें, स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट और पर्यावरण के अनुकूल ट्रांसपोर्ट सिस्टम इस परियोजना का हिस्सा होंगे. एक अधिकारी ने बताया कि “हम चाहते हैं कि यह सिटी तकनीकी रूप से एडवांस होने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार भी हो.”

इस पूरी योजना को केंद्र सरकार के इंडिया AI मिशन से भी बड़ा सहारा मिला है. मार्च 2025 में मंज़ूर हुए इस मिशन के तहत लखनऊ को AI इकोसिस्टम डेवलप करने के लिए 10,732 करोड़ रुपये का फंड मिला है. यह निवेश ऐसे समय में आ रहा है, जब लखनऊ को देश के पहले AI सिटी के रूप में विकसित करने की योजनाएं ज़मीन पर उतर रही हैं. प्रस्तावित निवेश में 10,000 ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स, मल्टी-मॉडल लैंग्वेज मॉडल और एक AI इनोवेशन सेंटर शामिल है. राज्य सरकार विज़न 2047 के अनुरूप ड्राफ़्ट AI पॉलिसी लाने की तैयारी में है. सरकार का दावा है कि यह निवेश देश के किसी भी अन्य टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर की तुलना में 67 फीसदी अधिक है.

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इतना बड़ा कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर रिसर्च और इंडस्ट्री दोनों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है. एक डेटा साइंटिस्ट के अनुसार, “आज AI में सबसे बड़ी चुनौती कंप्यूटिंग पावर की होती है. अगर लखनऊ में यह सुविधा बड़े पैमाने पर उपलब्ध होती है, तो स्टार्टअप्स और रिसर्चर को दिल्ली या विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.” AI सिटी का असर सिर्फ़ टेक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा. सरकार लखनऊ के लिए AI आधारित हाई-टेक ट्रैफ़िक मैनेजमेंट सिस्टम का प्रस्ताव भी तैयार कर रही है. इसके ज़रिये ट्रैफ़िक जाम, सड़क सुरक्षा और शहरी प्रबंधन को बेहतर बनाने की योजना है. अधिकारियों का कहना है कि AI का इस्तेमाल शहर के रोज़मर्रा के जीवन को आसान और सुरक्षित बनाने में किया जाएगा.

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह परियोजना योगी सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश की छवि को कानून-व्यवस्था और निवेश के लिहाज़ से बदला जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषक और लखनऊ में अवध गर्ल्स कालेज की प्राचार्य बीना राय कहती हैं, “लखनऊ को AI सिटी बनाना सिर्फ़ तकनीकी फैसला नहीं है. यह एक संदेश है कि यूपी अब पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर भविष्य की अर्थव्यवस्था में अपनी जगह बनाना चाहता है.”

नवाबी विरासत और आधुनिक तकनीक का यह संगम लखनऊ की पहचान को नया आयाम देने जा रहा है. अगर योजनाएं तय समय पर ज़मीन पर उतरती हैं, तो आने वाले वर्षों में लखनऊ सिर्फ़ तहज़ीब का शहर नहीं, बल्कि भारत के AI भविष्य की धड़कन भी बन सकता है.

Advertisement
Advertisement