जरा सोचिए कि आप एक नदी पर बने पुल पर गाड़ी चला रहे हैं और अचानक वह पुल बीच से टूट जाता है, जिससे गाड़ियां सैकड़ों फीट नीचे नदी में गिर जाती हैं! असल में, 9 जुलाई की सुबह ऐसा ही दर्दनाक हादसा हुआ, जब गुजरात की महिसागर नदी पर वडोदरा और आणंद जिलों को जोड़ने वाला करीब 1 किलोमीटर लंबा गंभीरा पुल अचानक टूट गया.
इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई. 9 जुलाई की सुबह करीब 7:30 बजे, पुल के 23 खंभों में से दो के बीच का 10-15 मीटर लंबा कंक्रीट स्लैब भारी ट्रैफिक की वजह से टूट गया. इसके चलते तीन ट्रक, दो वैन, एक रिक्शा, एक पिकअप और दो मोटरसाइकिलें नदी में गिर गईं. एक तेल टैंकर पुल के टूटे किनारे पर लटक गया और बाल-बाल बचा.
इस हादसे में पांच लोग घायल हुए. इसके साथ ही गुजरात में जर्जर हो रहे बुनियादी ढांचे और सरकारी व्यवस्था की विफलताओं को लेकर एक बार फिर चिंता और आरोपों का सिलसिला शुरू हो गया.
यह पुल 1985 में बनकर शुरू हुआ था और मध्य गुजरात को सौराष्ट्र से जोड़ने वाला एक अहम रास्ता था, जिससे सामान और लोगों की आवाजाही होती थी. स्थानीय लोग इसकी खराब हालत को लेकर लंबे समय से आगाह कर रहे थे. वे बताते थे कि जब वाहन गुजरते थे तो पुल में कंपन होता था और उसके ढांचे में टूट-फूट साफ दिखाई देती थी.
लोकल मीडिया ने उस सुबह पुल के पास काम कर रहे मछुआरे नरेंद्र माली से बात की. उन्होंने भयावह दृश्य का वर्णन करते हुए बताया कि पहले अचानक एक तेज आवाज आई और फिर एक के बाद एक वाहन नदी में गिरने लगे. माली ने बताया, "हमने अपनी नावों को वाहनों की ओर मोड़ा और लोगों को बचाने की कोशिश शुरू की." लेकिन ज्यादातर लोगों को बचाया नहीं जा सका.
राहत और बचाव का काम तेज तो था लेकिन बेहद मुश्किल भी था. मौके पर 20 से ज्यादा फायर कर्मी, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें, दो फायर बोट, तीन फायर टेंडर, 10 से ज्यादा एंबुलेंस और पांच से अधिक मेडिकल टीमें पहुंचीं. बचाव दल ने नावों और गोताखोरों की मदद से मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला.
इसके अलावा पानी में डूबे वाहनों को निकालने के लिए क्रेनों का इस्तेमाल किया गया. आगे कोई और हादसा न हो, इसके लिए प्रशासन ने उस पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी. वडोदरा के कलेक्टर अनिल धमेलिया ने बताया कि अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं. घायलों में से एक ने कुछ घंटों बाद दम तोड़ दिया, जिससे मौत का आंकड़ा 10 हो गया.
बहरहाल, इस हादसे के बाद विपक्षी दल के नेताओं ने तीखी आलोचना की और इसे सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा बताया. गुजरात में कांग्रेस विधायक दल के नेता अमित चावड़ा ने जवाबदेही की मांग की. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "हमने 2017 में ही सरकार से मांग की थी कि इस पुल की खराब हालत को देखते हुए उस पर भारी वाहनों का आवागमन बंद किया जाए."
कांग्रेस ने इसे लेकर एक बड़ा बयान भी जारी किया. इसमें पार्टी ने कहा कि यह हादसा "गुजरात मॉडल के पीछे छिपे भ्रष्टाचार और बर्बादी" को दिखाता है. पार्टी ने आरोप लगाया कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भारी गड़बड़ी और कुप्रबंधन हो रहा है. स्थानीय लोगों की चेतावनियों और कांग्रेस के पहले से भारी वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की मांगों के बावजूद पुल पर बिना किसी बड़े सुधार के आवागमन चलता रहा.
हालांकि सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल बार-बार नियमित मरम्मत के दावे करते रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की अनसुनी गुहारों को देखते हुए ये दावे खोखले ही नजर आते हैं.
कांग्रेस के अलावा, आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी बीजेपी से जवाब मांगा. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "क्या गुजरात में पिछले 30 सालों से सत्ता में बैठी बीजेपी ये बताएगी कि इतने घटिया और जानलेवा पुल बार-बार कैसे बनते हैं जो इतनी आसानी से गिर जाते हैं? आम लोगों को इस लापरवाही और भ्रष्टाचार की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है, जबकि सत्ता में बैठे लोग इन्हें बचाते रहते हैं."
यूं गुजरात में पुल गिरने की घटनाओं का एक चिंताजनक इतिहास रहा है, जो रखरखाव की कमी और निगरानी की लापरवाही को दिखाता है. 30 अक्टूबर 2022 को विधानसभा चुनाव से एक महीने पहले, मोरबी का पुल गिर गया था, जिसमें 135 लोगों की मौत हो गई थी और 56 लोग घायल हुए थे.
इस पुल की मरम्मत घड़ी बनाने वाली कंपनी ओरपैट ने की थी और इसे बिना स्थानीय प्रशासन से अनुमति (क्लियरेंस सर्टिफिकेट) लिए दोबारा खोल दिया गया था. इससे भ्रष्टाचार और सरकारी निगरानी पर गंभीर सवाल उठे थे. गुजरात सरकार ने भले ही तुरंत बचाव और मुआवजा दिया, लेकिन व्यवस्था में सुधार को लेकर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं दिखाई.
इसी तरह, अक्टूबर 2023 में बनासकांठा जिले के पालनपुर शहर में एक निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज का हिस्सा गिरने से दो लोगों की मौत हो गई. इससे पहले, जून 2023 में दक्षिण गुजरात के तापी जिले में मिंढोला नदी पर बना एक उद्घाटन के लिए तैयार पुल का हिस्सा गिर गया. इसमें कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि यह पुल कुछ ही दिनों में वाहन की आवाजाही के लिए खोला जाने वाला था.
उसी साल सितंबर में, गणेश पंडाल के पास दर्शन के लिए भीड़ जुटी हुई थी, तभी नाले को ढकने वाला एक कंक्रीट स्लैब टूटकर गिर गया. इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कम से कम एक दर्जन लोग घायल हो गए. करीब 20 लोग नाले में गिर गए. त्योहार के मौसम में हुई इस घटना से पूरे शहर में डर और दहशत फैल गई.
पिछले साल अगस्त में भोगावो नदी पर बना एक पुल गिर गया था, और नवंबर में आणंद में बुलेट ट्रेन परियोजना स्थल पर एक अस्थायी ढांचा ढह गया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई.
इस तरह की घटनाएं, भले ही इनमें कम लोगों की जान गई हो, लेकिन ये एक कड़ी चेतावनी हैं कि कितनी बड़ी त्रासदी हो सकती थी. इन मामलों की जांच और अदालती कार्यवाहियां अब भी जारी हैं, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई है.

