
नए साल के दूसरे ही दिन रांची के दो भाई-बहन अंश (5 साल) और अंशिका (4 साल) गायब हो गए थे. FIR दर्ज हुई, लेकिन पुलिस सामान्य छानबीन करके रह गई. इसके बाद आम नागरिकों के साथ विपक्षी दल और सोशल मीडिया पर यह मुद्दा छा गया और पुलिस-प्रशासन पर दबाव बढ़ने लगा. मामले की जांच के लिए विशेष खोजबीन दस्ता यानी SIT टीम गठित हुई और आखिरकार दोनों बच्चे बरामद हो गए.
दबाव का आलम यह था कि गरीब परिवार को दोनों बच्चे जब बरामद हुए तो डीजीपी तदाशा मिश्रा खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्हें मीडिया के सामने लाईं. इसी SIT की ओर से की जा रही छानबीन के दौरान झारखंड में बाल तस्करी में सक्रिय एक बड़ी गैंग का खुलासा हुआ. गैंग से पूछताछ के बाद बीते 18 जनवरी को 12 बच्चे और फिर 19 जनवरी को 38 बच्चे एक साथ बरामद किए गए हैं. इन बच्चों को फिलहाल चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने पेश किया गया है.
कमेटी की चेयरपर्सन कुंती साहू ने बताया कि इन 50 बच्चों में पांच से कम उम्र के 19 बच्चे हैं. जबकि पांच से दस साल के 10 बच्चे और 10 से 18 साल के 29 बच्चे हैं. 0 से 6 तक के उम्र के बच्चों को स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी में रखा गया है. वहीं 6-18 साल तक के बच्चों को चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन में रखा गया है.

कुंती साहू के मुताबिक, “इन बच्चों के वेरिफिकेशन में लंबा समय लग सकता है, क्योंकि इन्हें पहले फ्रेंडली माहौल में रखना होगा. तब जाकर इनका नाम पता मालूम चलेगा. हो सकता है इनमें से किसी का नाम बदल दिया गया हो, ऐसे में डीएनए टेस्ट की व्यवस्था हम कर रहे हैं. किसी के पास आधार कार्ड नहीं है, जो कि स्वभाविक है. लेकिन फिलहाल जो अंदाजा लग पाया है वो यह कि सभी बच्चे झारखंड के ही हैं. ऐसे में थोड़ी मशक्कत के बाद हम इन्हें इनके असली मां-बाप तक जरूर पहुंचा देंगे.’’
पुलिस ने अब तक कुल 15 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें पांच झारखंड के हैं, बाकि खानाबदोश (गुलगुलिया) समुदाय से संबंधित बताए जा रहे हैं. दरअसल बीती 12 जनवरी को रांची ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर के अनुरोध पर देश भर के 400 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), जो मानव तस्करी या बच्चों से संबंधित किसी मामले में काम करते हैं, ने ऑनलाइन बैठक की. इस दौरान कई संस्थाओं ने कहा कि देश भर में बच्चों के अपहरण के मामलों में गुलगुलिया समुदाय के लोगों का हाथ सामने आया है. इस इनपुट के बाद झारखंड पुलिस ने अपनी जांच को इस दिशा में मोड़ा. इसी जांच के दौरान इन लोगों के बारे में पता चला.
रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि जो 50 बच्चे मिले हैं, उनमें से 15 के माता-पिता का पता चल गया है. बाकियों का सत्यापन कराया जा रहा है. तस्करी के आरोप में गिरफ्तार हुए लोगों की भूमिका का भी पता चल गया है.
इधर पुलिस की छापामारी देखते हुए रांची व इसके आसपास के इलाकों में अस्थाई तौर पर रह रहे गुलगुलिया समुदाय के लोग प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में भाग गए हैं. एक छापामार दल वहां भी भेजा गया है. पुलिस की जांच के दौरान यह भी पता चला कि यह गैंग पश्चिम बंगाल और यूपी में भी बच्चों की खरीद बिक्री में शामिल है.
सैंकड़ों बच्चे अब भी माता-पिता के इंतजार में
तस्करों के हाथ लगे बच्चों की बरामदगी के लिए सुप्रीम कोर्ट में वाराणसी की गुड़िया स्वयंसेवी संस्थान की तरफ से एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है. इस पर सुनवाई करते हुए बीते 24 सितंबर 2025 को जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने कहा था, “किसी राज्य से तस्करी किए गए बच्चे का संबंध दूसरे राज्य के निवासियों से हो सकता है और तस्करी किसी तीसरे राज्य से होकर किसी अन्य क्षेत्र में या कभी-कभी विदेशों तक भी हो सकती है. ऐसे मामलों में लापता बच्चों को खोजने और जांच में सहयोग देने के लिए समन्वित प्रयास की जरूरत है.’’
बेंच ने आदेश दिया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की देखरेख और नियंत्रण में एक साझा पोर्टल होना चाहिए जहां इन बच्चों से जुड़ी जानकारी दर्ज हो. कोर्ट ने देशभर के राज्यों से जिलावार गायब हुए बच्चों से जुड़े 2020 से अब तक के आंकड़े भी मांगे. इनके मुताबिक साल 2020 से 2025 तक देशभर में कुल 4,24,107 बच्चे गायब हुए थे. जिसमें 4,20,535 बच्चों को बरामद भी किया जा चुका था. इस आधार पर कुल 3,572 बच्चे अब भी गायब हैं.
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई अब भी जारी है. याचिकाकर्ता के वकील सुनील सिंह ने बताया “बीते 9 दिसंबर को भी सुनवाई हुई थी. छह रिमाइंडर के बाद भी झारखंड, पश्चिम बंगाल और नागालैंड ने गायब हुए बच्चों से संबंधित आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए थे.’’ उन्होंने बताया कि इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह निर्देश दिया है कि गायब हुए बच्चों से जुड़े मामलों के लिए वह सभी राज्यों में और राज्यों के सभी जिलों में एक नोडल ऑफिसर नियुक्त करने का निर्देश दे. साथ ही केंद्र में भी एक नोडल ऑफिसर नियुक्त किया जाए. इन सभी की जानकारी मिशन वात्सल्य पोर्टल पर भी नाम और नंबर के साथ जारी करने का आदेश है. इस याचिका पर अगली सुनवाई 10 फरवरी को होनी है.
इसके बाद झारखंड सरकार ने झारखंड स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन सोसाइटी के निदेशक विजय कुमार सिन्हा को नोडल ऑफिसर नियुक्त किया है. वे बताते हैं कि मिसिंग चाइल्ड से संबंधित आंकड़े हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किए गए हैं. आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में साल 2020 से लेकर 2025 तक कुल 3,025 बच्चे गायब हुए, जिसमें 2,788 को बरामद कर उनके परिजनों तक पहुंचा दिया गया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक 237 बच्चे अब भी गायब हैं. यहां गौर करने वाली बात है कि यह आंकड़ा उन बच्चों का है जिनके गायब होने से संबंधित सूचना या FIR पुलिस के पास है. यानी कई बच्चे ऐसे भी हो सकते हैं जिनका सूचना प्रशासन के पास न हो.
इस सब के बीच कोडरमा जिले का 13 साल का एक बच्चा अभिनंदन कुमार बीते सोमवार यानी 19 जनवरी को लापता हुआ. मामला दर्ज हुआ, लेकिन अगली सुबह उसका शव झाड़ियों में मिला.

