छत्तीसगढ़ की BJP सरकार के एक आदेश का विपक्षी कांग्रेस जोरदार विरोध कर रही है. इस आदेश के मुताबिक सरकारी स्कूलों में हर दिन हिंदू स्तुति और प्रार्थनाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है. कांग्रेस का आरोप है कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एजेंडे का हिस्सा है.
कांग्रेस का कहना है कि यह आदेश धर्मनिरपेक्षता की भावना का उल्लंघन करता है और इसे वापस लिया जाना चाहिए. पार्टी ने सरकार से कहा है कि वह सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गिरती गुणवत्ता पर ध्यान दे.
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र 16 जून से शुरू हुआ. स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 जून को एक विस्तृत आदेश जारी कर सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि सुबह कक्षाएं शुरू होने से पहले स्कूलों में राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरू मंत्र का गायन/पाठ हो और महान व्यक्तित्वों के जीवन का वर्णन किया जाए.
आदेश में कहा गया है कि छात्रों को दोपहर के भोजन के अवकाश के दौरान भोजन मंत्र का पाठ भी करना होगा. दिन की छुट्टी से पहले उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का गायन भी करना होगा.
कांग्रेस ने कहा कि यह फैसला दूसरे धर्मों के छात्रों के साथ भेदभाव करता है. कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला का कहना है, "अगर अब दूसरे समुदाय भी यह मांग करने लगें कि स्कूलों में कुरान, गुरु ग्रंथ साहिब या बाइबल के पाठ सुनाए जाएं तो क्या होगा?" उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने स्कूलों को ‘RSS से जुड़े सरस्वती शिशु मंदिरों की तर्ज पर’ चलाना चाहती है.
कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि यदि छात्र अपनी इच्छा से गाएं या पाठ करें तो यह स्वीकार्य है लेकिन किसी एक धर्म पर आधारित आदेश सभी पर नहीं थोपा जाना चाहिए.
सरकार के निर्देश में दावा किया गया है कि इस व्यवस्था से छात्रों का बौद्धिक विकास होगा और भारत की संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ेगी. इस फैसले का बचाव करते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि इन प्रार्थनाओं से छात्रों के चरित्र निर्माण में मदद मिलेगी.

