साल 2024 की तारीख 15 सितंबर. झारखंड में BJP और पूर्व सीएम चंपाई सोरेन, दोनों की राजनीति के लिहाज से अहम मोड़ वाली रही. जीवन भर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) में रहने वाले, कार्यकर्ता से सीएम पद तक का सफर तय करने वाले चंपाई सोरेन उस दिन पीएम नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करने वाले थे.
वे BJP में शामिल हो रहे थे. पीएम मोदी जब रांची पहुंचे, भारी बारिश हो रही थी. इसके बावजूद वे सड़क मार्ग से 126 किलोमीटर दूर जमशेदपुर पहुंचे. यहां चंपाई सोरेन को BJP ने बड़े राजनीतिक संदेश के साथ पार्टी में शामिल कराया था. उस समय चंपाई सोरेन को कोल्हान में BJP का बड़ा आदिवासी चेहरा बताया गया था.
समय बदला, चीजें बदली. अब चंपाई नाराज चल रहे हैं. ताजा घटनाक्रम में पूर्व सीएम एक बार फिर चर्चा में हैं. बीते 13 जनवरी को हुए प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी से लेकर कई राष्ट्रीय स्तर तक के नेताओं के आने पर चंपाई की अनुपस्थिति पहले तो लोगों के नजर में नहीं आई, लेकिन नगर निकाय चुनाव को लेकर हुई प्रत्याशियों की घोषणा के बाद मामला खुलकर सामने आ गया है.
बताया जा रहा है कि चंपाई सोरेन पार्टी से नाराज हैं. इस संबंध में उनका कहना है कि पार्टी की ओर से उन्हें बैठकों और रायशुमारी की सूचना ही नहीं दी जाती. उनकी दलील है कि जब बुनियादी जानकारी तक साझा नहीं की जाती तो फिर सक्रिय भूमिका निभाने का सवाल कहां उठता है. चंपाई साथ ही आरोप लगाते हैं, “इन सब के पीछे पार्टी के अंदर का कोई प्रभावशाली व्यक्ति काम कर रहा है और जो नहीं चाहता कि मैं पार्टी के भीतर सक्रिय रहूं.’’
चंपाई सोरेन सरायकेला-खरसांवा जिले की सरायकेला सीट से BJP के एकमात्र आदिवासी विधायक हैं. वे जिस इलाके से आते हैं, यानी कोल्हान, वहीं से पूर्व सीएम रघुबर दास, पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा आते हैं. वरिष्ठ नेता होने के बावजूद दोनों किनारे हैं. पार्टी में इस वक्त नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की ही सबसे ज्यादा चलती है. इधर BJP नेताओं का कहना है कि चंपाई सोरेन अक्सर मोबाइल बंद रखते हैं, ऐसे में उनसे संपर्क नहीं हो पाता है. उनके पीए चंचल गोस्वामी को कार्यक्रमों-बैठकों की सूचना दी जाती है, पर वे शामिल नहीं होते. हालांकि चंचल गोस्वामी ने इस पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया.
आखिर माजरा क्या है
खबर है कि सरायकेला के पास की सीट आदित्यपुर नगर निगम और सरायकेला नगर पंचायत में चंपाई ने BJP समर्थित प्रत्याशियों के खिलाफ अपने समर्थकों को खड़ा कर दिया है. आदित्यपुर नगर निगम में BJP ने संजय सरदार को अपना समर्थन दिया है. वहीं इसी सीट पर चंपाई ने अपनी समर्थक सावित्री लियांगी को उतार दिया है. यही नहीं, सरायकेला नगर पंचायत में पार्टी समर्थित प्रत्याशी सुमित चौधरी के खिलाफ उनके पूर्व विधायक प्रतिनिधि सानंद आचार्या चुनाव लड़ रहे हैं. बीते 7 फरवरी को जमशेदपुर में जब BJP कार्यकर्ताओं की बैठक हो रही थी, वहां राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा मौजूद थे, लेकिन चंपाई पूरी बैठक से नदारद रहे.
आखिर चंपाई के विरोधी तेवर अब जमीन पर क्यों दिखने लगे? नजदीकी सूत्रों के मुताबिक खटास की शुरूआत 11 नवंबर 2025 को हुए घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के समय से ही चल रहा है. इस उपचुनाव में उनके बेटे बाबूलाल सोरेन BJP की तरफ से प्रत्याशी थे, लेकिन पार्टी ने न तो चुनाव लड़ने के लिए फंड दिया और न ही उचित्त सहयोग किया. समर्थकों का मानना है कि अगर उनका बेटा जीत जाता तो शायद BJP में उनका कद बढ़ जाता. यही वजह थी कि परिणाम उनके पक्ष में नहीं गया. इसके बाद अब जब निकाय चुनाव की आहट हुई. BJP ने जिन शैलेंद्र सिंह को आदित्यपुर नगर निकाय चुनाव का प्रभारी बनाया, उन्होंने रायशुमारी तो दूर, शिष्टाचार मुलाकात तक के लिए उनसे संपर्क नहीं किया.
जानकारों का कहना है कि चंपाई सोरेन जिस राजनीतिक बैकग्राउंड (JMM) से आते हैं, वहां संगठन की कोई बहुत बड़ी भूमिका कभी नहीं रही. JMM का हर विधायक अपने-अपने इलाके में अपना JMM चलाता है. जबकि BJP में संगठन व्यवस्थित तरीके से काम करता है. ऐसे में चंपाई इस व्यवस्था में खुद को ज्यादा फिट नहीं कर पा रहे हैं.
पूर्व सीएम के समर्थकों को BJP से पहले उनसे और चंपाई को पार्टी से पहले अपने समर्थकों से ज्यादा मतलब है. उनके सार्वजनिक कार्यक्रम भी BJP से इतर चलते रहते हैं. नाम न छापने की शर्त पर चंपाई के एक करीबी ने कहा कि चंपाई को कोल्हान टाइगर कहा जाता है. टाइगर को पिंजरे में बंद करके नहीं रखा जा सकता. वह अपने इलाके में अपने हिसाब से ही चलेगा.
वहीं चंपाई सोरेन के छोटे बेटे बबलू सोरेन भी कुछ इसी तरफ इशारा करते हैं. वे कहते हैं, ‘’जिन नेताओं को लगता है कि वे चंपाई सोरेन के बिना इस इलाके में कुछ कर लेंगे, चुनाव जीत लेंगे, वही बेहतर बता सकते हैं कि क्या चल रहा है. हम लोगों को पार्टी से कोई दिक्कत नहीं है. अभी भी चुनाव को लेकर ही क्षेत्र में सक्रिय हैं. आम जन और अपने लोगों के साथ बैठक कर रहे हैं.’’ हालांकि दूसरा पक्ष इसका यह है कि चंपाई के समर्थक अभी तक BJP के नेता नहीं बने हैं. इलाके में उनकी पहचान चंपाई के समर्थक की ही है. ऐसे में BJP अपने किसी पुराने कार्यकर्ता की जगह नए आए चंपाई के समर्थक को भला चुनाव क्यों लड़ाएगी!
पूरे प्रकरण पर BJP के राज्यसभा सांसद और झारखंड इकाई के अध्यक्ष आदित्य साहू कहते हैं, “चंपाई सोरेन पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं. लगातार आठ बार चुनाव जीत चुके हैं. उन्हें किसी बात की कोई नाराजगी नहीं है. हो सकता है कि किसी खास मुद्दे पर वे भिन्न मत रखते हों, पार्टी उनके उस मत का भी पूरा सम्मान करती है. जहां तक बात नगर निकाय चुनाव की है, वे अपनी पार्टी के पक्ष में ही काम कर रहे हैं.’’
चंपाई और BJP में प्यार-तकरार के बीच जो एक बात सबसे स्पष्ट रूप से निकल कर आती है वह है- राजनीतिक संस्कृति. दोनों को ही एक दूसरे को समझने और उसके मुताबिक ढ़लने में शायद अभी और वक्त लगेगा.

