एक नदी विकास परियोजना के तहत पुनर्वास की कथित खामियों को लेकर मध्य प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र अशांत है. पन्ना और छतरपुर जिलों में फैले 22 गांवों के लगभग 7,000 परिवारों ने केन नदी के तट पर लगातार 12 दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया. उनकी शिकायत है कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के कारण उनके विस्थापन के लिए मुआवजे में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था.
हालांकि 16 अप्रैल को, दो जिला प्रशासनों द्वारा लोगों को उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन को 10 दिनों के लिए टाल दिया गया.
इस आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान खींचा क्योंकि ग्रामीण केन नदी के तट पर स्थित दौधन में चौबीसों घंटे डेरा डाले हुए थे. दौधन नदी जोड़ो परियोजना में बांध का स्थल है. इनमें से कई ग्रामीण गोंड और सौर जैसे आदिवासी समुदायों से हैं.
गांव वालों का कहना है कि उनकी जमीन के अधिग्रहण और बदले में मुआवजा देने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. उन्हें केवल वहां से हट जाने के लिए कहा गया था. सूत्रों के अनुसार, कुछ विस्थापित परिवारों को 5 लाख रुपए का भुगतान किया गया, जबकि न्यूनतम मुआवजा 7.86 लाख रुपए था.
ग्रामीणों द्वारा उठाया गया दूसरा मुद्दा यह है कि मुआवजे की राशि तय करते समय उनके घरों और संपत्तियों का कोई सर्वे नहीं किया गया था. साथ ही, लगभग 7,000 विस्थापित परिवारों में कई लोग वयस्क थे. इस आधार पर वे स्वतंत्र परिवारों के रूप में अलग मुआवजे के पात्र थे.
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की आधारशिला 2024 में रखी गई थी. दो चरणों वाली इस परियोजना के तहत, केन नदी बेसिन के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी बेसिन के पानी की कमी वाले क्षेत्रों में भेजने की योजना है. सिंचाई और पीने के पानी की आपूर्ति को बढ़ावा देने के अलावा, यह परियोजना बिजली भी पैदा करेगी. इस परियोजना से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों को लाभ होगा. लेकिन आलोचकों का दावा है कि नदी जोड़ने से मानव बस्तियों, जंगलों और वन्यजीव क्षेत्रों के विशाल हिस्से जलमग्न हो जाएंगे.
पन्ना और छतरपुर में विरोध प्रदर्शन का समन्वय छतरपुर जिले के बिजावर निवासी अमित भटनागर कर रहे हैं. वह विस्थापित व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था जन किसान संगठन से जुड़े हैं. भटनागर ने आरोप लगाया कि प्रशासन ग्रामीणों पर दबाव बनाने के लिए घर गिराने के नोटिस भेजने जैसे दमनकारी उपाय अपना रहा है.
प्रदर्शनकारियों को 2022 की नेगुआ, रूंझ और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं से उजड़े लोगों का समर्थन मिला है. आरोप है कि इन परियोजनाओं में मुआवजे का पूर्ण वितरण नहीं किया गया है.
प्रशासन का दावा है कि केन-बेतवा परियोजना के बेदखल लोगों ने सर्वे कराने के आश्वासन के बाद अपना विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया. छतरपुर जिले के कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कहा, "प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि कुछ लोग सर्वे से छूट गए थे. हमने इन पहलुओं को शामिल करने के लिए एक और सर्वे के लिए कहा है. उनके द्वारा उठाया गया दूसरा बिंदु सरकारी स्तर के नीतिगत निर्णयों से संबंधित था. हमने सरकार को इस बारे में अवगत करा दिया है."

