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इंडिया गठबंधन का खेल बिगाड़ेंगे बसपा के मुस्ल‍िम उम्मीदवार!

लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा करने वाली बसपा ने मुस्ल‍िम बहुल सीटों पर मुस्ल‍िम उम्मीदवार उतारने की रणनीति बनाई है

बसपा प्रमुख मायावती
बसपा प्रमुख मायावती
अपडेटेड 13 मार्च , 2024

पश्च‍िमी यूपी में मुस्लिम राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मुरादाबाद मंडल में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अपनी चिरपरिचित रणनीति को अख्तियार करती दिख रही है. मुरादाबाद के पकबड़ा स्थ‍ित बसपा कार्यालय में 10 मार्च को पश्च‍िमी यूपी और उत्तराखंड के प्रभारी शमसुद्दीन राइन ने पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक ली. 

इसमें नगीना के सांसद और लेाकसभा में बसपा के नेता सदन गिरीश चंद्र,  मुख्य सेक्टर प्रभारी रणजीत सिंह के सामने शमसुद्दीन राईन ने ठाकुरद्वारा नगर पालिका के वर्तमान चेयरमैन इरफान सैफी को मुरादाबाद लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषि‍त किया.

इससे पहले 7 मार्च को अमरोहा के जोया इलाके में हाईवे स्थित बैंक्वेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शमसुद्दीन राइनी, गिरीश चंद ने अमरोहा में बसपा जिलाध्यक्ष सोमपाल सिंह की मौजूदगी में डॉ. मुजाहिद हुसैन उर्फ बाबू भाई को प्रत्याशी घोषित किया था. 

मूलरूप से डासना नगर पंचायत (गाजियाबाद) के रहने वाले डॉ. मुजाहिद हुसैन ने बिना देर किए अमरोहा में जनता से संपर्क अभियान शुरू कर दिया है. मुरादाबाद, अमरोहा लोकसभा सीट पर मुस्ल‍िम उम्मीदवार उतारने के बाद बसपा संभल में भी मुस्ल‍िम उम्मीदवार पर मंथन कर रही है. असल में मुरादाबाद मंडल की सभी सीटों पर मुस्ल‍िम मतदाताओं की आबादी 30 प्रतिशत या इससे अधिक है. 

मुस्ल‍िम मतदाताओं का रुझान इन सीटों पर हार-जीत तय करेगा. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जब बसपा ने समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था तब अमरोहा बिजनौर और नगीना लोकसभा सीट पर बसपा ने जीत हासिल की थी. मुरादाबाद के वरिष्ठ वकील अजीजुल हलीम बताते हैं, “बसपा के पास दलित वोट हैं और लोकसभा चुनाव में मुस्ल‍िम प्रत्याशी उतार कर वह दलित-मुस्ल‍िम गठजोड़ पर दांव खेल रही है. पश्च‍िम में पिछले कई चुनावों में बसपा की यही रणनीति रही है.”

दलित-मुस्ल‍िम की अच्छी आबादी वाले जिले सहारनपुर में भी बसपा ने मुस्ल‍िम उम्मीवार उतारा है. पिछले वर्ष दिसंबर में दोबारा बसपा ज्वाइन करने वाले माजिद अली को सहारनपुर में पार्टी का लोकसभा प्रभारी बनाया गया था. अब बसपा ने अपने सांसद हाजी फजलुर रहमान को किनारे कर माजिद अली को सहारनपुर लोकसभा सीट से उम्मीवार बनाया है. माजिद अली की पत्नी तस्मीम बानो को 2016 में हुए चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जिला पंचायत अध्यक्ष चुना गया था. इसके बाद माजिद पांच साल पार्टी में रहे. 2021 के जिला पंचायत चुनाव के दौरान बसपा और अली के बीच कुछ मतभेद हो गए. जिसके बाद उन्होंने 16 सितंबर 2021 को चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी ज्वाइन कर ली. इसके बाद करीब सवा दो साल बाद अली दोबारा बसपा में लौट आए. इस तरह बसपा ने पश्च‍िम में दलित-मुस्ल‍िम गठजोड़ के जरिए पार्टी की नैया पार लगाने की तैयारी की है. 

लोकसभा चुनाव अपने दम पर लड़ने की घोषणा करने वाली बसपा प्रमुख मायावती ने अब धीरे-धीरे उम्मीदवारों को लेकर अपने पत्ते खोलने शुरू किए हैं. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी से एक भी लोकसभा सीट न जीतने वाली बसपा ने पांच साल बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करके 10 सीटें जीती थीं. पार्टी के नेताओं के मुताबिक बसपा इस साल के लोकसभा चुनाव में 10 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है. 

पार्टी नेताओं के मुताबिक बसपा की नजर प्रदेश की मुस्लिम बहुल 13 लोकसभा सीटों पर है. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने इनमें से 5 पर जीत हासिल की थी. इनमें बिजनौर से मलूक नागर, अमरोहा से कुंवर दानिश अली, सहारनपुर से हाजी फोलूर रहमान, नगीना से गिरीश चंद्र और श्रावस्ती से राम शिरोमणी जीते थे. इस बार बसपा ने मुस्ल‍िम बहुल सीटों पर मुस्ल‍िम उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई है ताकि पार्टी के परंपरागत दलित वोटों के साथ मिलकर जिताऊ गठजोड़ तैयार किया जा सके. 

बसपा ने इंडिया गठबंधन से पहले मुस्ल‍िम बहुल सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार कर सपा और कांग्रेस के लिए चुनौती और बढ़ा दी है. अजीजुल हलीम बताते हैं, “मुस्ल‍िम बहुल सीटों पर बसपा के मुस्ल‍िम उम्मीवार इंडिया गठबंधन के सहयोगियों कांग्रेस और सपा को असहज कर सकते हैं. लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन इस बात पर भी निर्भर करेगा कि मुस्ल‍िम वोट कितना एकमुश्त इनके पास जाता है. अगर बसपा मुस्ल‍िम मतों में सेंधमारी करने में कामयाब हो गई तो इंडिया गठबंधन को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा और इसका फायदा भाजपा को होगा.”

पीलीभीत से अनीश अहमद खान को उम्मीदवार बनाने के साथ बसपा ने समाजवादी पार्टी के गढ़ माने जाने वाली कन्नौज सीट पर कानपुर देहात स्थित रसूलाबाद निवासी अकील अहमद पट्टा पर भरोसा जताया है. अकील अहमद की मुस्लिम वोटरों में अच्छी पैठ रही है. वहीं दूसरी तरफ इस सीट पर भाजपा ने मौजूदा सांसद सुब्रत पाठक को ही मैदान में उतारा है. बसपा के  उम्मीदवार उतारने के बाद इस सीट पर त्रिकोणीय लड़ाई हो जाएगी. बसपा के इस कदम से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इस सीट से अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने की अटकलें हैं. 

मुस्लि‍म उम्मीवार उतारने से नाराज सपा नेता बसपा को भाजपा के इशारे पर काम करने वाली पार्टी करार दे रहे हैं. यूपी में 10 सीटों पर हुए राज्य सभा चुनाव के कुछ दिन बाद दो मार्च को केंद्र सरकार ने केंद्र ने बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद को वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी है. केंद्र सरकार के इस निर्णय की टाइमिंग महत्वपूर्ण है क्योंकि यूपी में बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह ने राज्य सभा चुनाव में भाजपा के आठवें उम्मीदवार संजय सेठ के पक्ष में मतदान किया था. इससे राज्य सभा चुनाव में अप्रत्याशित ढंग से उतारे गए भाजपा के आठवें उम्मीदवार को जीतने में मदद मिली थी. 

आकाश को सुरक्षा मुहैया कराकर भाजपा सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले बसपा को एक सकारात्मक संदेश दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों को लगता है कि लोकसभा चुनावों में बसपा के उम्मीदवार विपक्षी इंडिया एलायंस का ही वोट काटेंगे जिससे भाजपा को फायदा मिलेगा. 

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