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BJP की चार्जशीट Vs सीट वार मेनिफेस्टो, बंगाल में ममता ने लोकल मुद्दों को कैसे बनाया हथियार?

ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस BJP की आलोचनाओं का मुकाबला करने के लिए हर विधानसभा सीट पर मजबूत तैयारी कर रही है

ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
अपडेटेड 5 फ़रवरी , 2026

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. पहली बार ऐसा होने जा रहा है, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) 294 सीटों के लिए अलग-अलग घोषणापत्र जारी कर रही है. इससे पहले के चुनावों में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी राज्य स्तर पर एक ही घोषणापत्र जारी करती थीं.

TMC के कार्यकर्ता उस घोषणापत्र में किए गए वादों को गांव-गांव तक पहुंचाते थे. हर विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाने वाला यह घोषणापत्र पश्चिम बंगाल की राजनीति में बिल्कुल नया प्रयोग है. इतना ही नहीं, यह तृणमूल कांग्रेस की लंबे समय से चली आ रही चुनावी रणनीति में भी बड़ा बदलाव है.

TMC के सीटवार घोषणापत्र जारी करने का प्रयोग इस बात की ओर भी इशारा करता है कि स्थानीय सत्ता-विरोधी लहर को व्यापक कल्याणकारी वादों से दबाना मुश्किल है. TMC से जुड़े एक सीनियर नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि TMC का हर उम्मीदवार अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए घोषणापत्र जारी करेगा, जो पार्टी के आंतरिक सर्वे पर आधारित होगा.

इन सर्वे में स्थानीय स्तर पर लोगों के असंतोष का विस्तार से विश्लेषण किया गया है. इस सर्वे में तीन प्रमुख बातों को ध्यान में रखा गया; पहला- नागरिक सेवा व प्रशासनिक सेवा की खामियां, दूसरा- स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के कारण कल्याणकारी योजनाओं का रुकना, तीसरा- लॉ एंड ऑर्डर यानी कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताएं जैसे मुद्दे.

TMC के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस के चुनावी इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, लेकिन अब मतदाता अपने-अपने क्षेत्रों के बारे में तीखे सवाल पूछ रहे हैं. एक स्थानीय घोषणापत्र इन सवालों का जवाब दे सकता है."

यह फैसला TMC के अंदरूनी सूत्रों के जरिए बताए गए गंभीर आंतरिक फीडबैक के आधार पर लिया गया एक रणनीतिक बदलाव है. पार्टी के सर्वे में कथित तौर पर हर विधानसभा क्षेत्र में बार-बार सामने आने वाली शिकायतों का पता चला, जिससे यह साफ हो गया कि आम लोगों के बीच असंतोष कहां और क्यों है?

सूत्रों का मानना है कि इनमें से कई शिकायतें निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर विपक्ष के जरिए फैलाई जा रही शिकायतों से काफी हद तक मेल खाती हैं. यहीं से पश्चिम बंगाल चुनाव में BJP की भूमिका शुरू होती है. पश्चिम बंगाल BJP इकाई ने हाल ही में TMC के खिलाफ सीट वार आरोपपत्र जारी किए हैं.

BJP सूत्रों के मुताबिक, ये दस्तावेज लगभग 240 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं के बीच वितरित हो चुके हैं, और बाकी क्षेत्रों में आने वाले हफ्तों में बांटा जाएगा. BJP के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इसका उद्देश्य सत्ता-विरोधी भावना को ठोस रूप देना है. BJP ने बाढ़ग्रस्त इलाकों की सड़कों, खराब अस्पतालों, अधूरी कल्याणकारी योजनाओं, भर्ती घोटालों और रोजमर्रा की शासन व्यवस्था की विफलताओं को TMC के खिलाफ प्रचार में हथियार बनाया है.

इस प्रक्रिया में शामिल BJP के एक पदाधिकारी ने कहा, "ये सैद्धांतिक आरोप नहीं हैं. ये उन चीजों से संबंधित हैं जिनका सामना लोग अपने जीवन में हर दिन करते हैं." आरोपपत्रों में स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता दी गई है.

उदाहरण के लिए, दक्षिण दिनाजपुर के हरिरामपुर में दायर आरोपपत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यान्वयन में सुनियोजित भ्रष्टाचार का जिक्र है. BJP का कहना है कि असली लाभार्थियों से रिश्वत की मांग हो रही है और अपात्र लोगों को धोखाधड़ी से योजना में शामिल किया गया है.

BJP के इस आरोपपत्र में भूमि हड़पने, रेत खनन, रुके हुए पेयजल परियोजनाओं और महिलाओं के खिलाफ बार-बार होने वाले अपराधों का भी उल्लेख है, जो प्रशासनिक विफलता की भयावह तस्वीर पेश करते हैं. कृष्णानगर उत्तर में BJP के आरोपपत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के चरमरा जाने को प्रमुखता दी गई है, जिसमें जिला अस्पतालों के निष्क्रिय होने का जिक्र है.

इसके अलावा, जल निकासी व्यवस्था की विफलता, धार्मिक जुलूसों के दौरान पुलिस की मनमानी और प्रभावी नागरिक निगरानी का अभाव BJP के बयान का हिस्सा हैं.

शहरी सीटों का भी BJP आरोपपत्र में प्रमुखता से जिक्र है. दमदम के 'आरोपपत्र' में कथित तौर पर लंबे समय से चले आ रहे जलभराव, खराब जल निकासी व्यवस्था, नगर निगम भर्ती में रिश्वतखोरी और स्कूल शिक्षकों की भर्ती घोटाले पर लोगों का ध्यान केंद्रित दिलाने का प्रयास किया गया है. इसमें चुनावी निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि मतदाता सूचियों में अभी भी मृत लोगों के नाम शामिल हैं.

इसी तरह हावड़ा उत्तर में लोगों का ध्यान कानून व्यवस्था और नगरपालिका की बदहाली, निर्वाचित नगर निकायों का अभाव, जबरन वसूली, अवैध निर्माण और असुरक्षित पेयजल पर दिलाने की कोशिश की गई है.

बांकुरा के आदिवासी बहुल रानीबांध (ST) सीट पर BJP का आरोप है कि कल्याणकारी योजनाएं लागू करने में राज्य सरकार विफल रही हैं. अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है, राशन की दुकानों में घटिया अनाज वितरित किया जा रहा है और इस पूरे इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है.  

कालना क्षेत्र में स्थानीय TMC नेताओं पर हिंसक धमकियों, नगर निगम भर्ती में भ्रष्टाचार और जल निकासी एवं स्वच्छता व्यवस्था में खामियों का आरोप लगाया गया है. मेमारी में BJP ने कृषि संकट, पंचायत निधि के कथित दुरुपयोग, पीएम आवास योजना में अनियमितताएं और स्वास्थ्य सेवा एवं शिक्षा के बुनियादी ढांचे के अभाव का मुद्दा उठाया है.

अब सवाल उठता है कि BJP के इन आरोपपत्र का उद्देश्य क्या है? दरअसल, स्थानीय विधायकों, पार्षदों और पार्टी पदाधिकारियों का नाम लेकर BJP जानबूझकर चुनावी चर्चा को नेतृत्व-केंद्रित लड़ाइयों से हटाकर निर्वाचन क्षेत्र स्तर की जवाबदेही की तरफ मोड़ रही है. इसी बदलाव ने TMC को अपने विधानसभावार घोषणापत्र की योजना बनाने के लिए मजबूर किया है.  

TMC के सूत्रों का कहना है कि स्थानीय घोषणापत्र BJP के नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए तैयार किए गए हैं. साथ ही इनमें वास्तविक कमियों को स्वीकार किया गया है. पहले से उठाए गए सुधारात्मक कदमों की सूची दी गई है और BJP की ओर से लगाए गए आरोपों का खंडन किया गया है.

TMC के एक रणनीतिकार ने कहा, "BJP स्थानीय विफलताओं के माध्यम से चुनाव को परिभाषित करने की कोशिश कर रही है. हमारा जवाब है कि हम स्थानीय स्तर पर मतदाताओं से बात करें, न कि किसी केंद्रीय दस्तावेज के पीछे भागें. TMC की यह जवाबी रणनीति सफल होगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है.

वर्षों से खस्ताहाल बुनियादी ढांचे या कथित भ्रष्टाचार से जूझ रहे मतदाता अंतिम समय में किए गए वादों को संदेह की नजर से देख सकते हैं. फिर भी, यह बदलाव अपने आप में महत्वपूर्ण है. आगामी विधानसभा चुनाव अब केवल विचारधारा या करिश्मा के आधार पर नहीं, बल्कि वार्ड-दर-वार्ड, विधानसभा क्षेत्र-दर-विधानसभा क्षेत्र शासन के मूल्यांकन के आधार पर तय किए जा रहे हैं. यह एक ऐसा पहलू है, जिसे न तो TMC और न ही विपक्षी BJP नजरअंदाज कर सकती है.

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