पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत से वहां के कारोबारी माहौल और उद्योगों की दिशा में एक नया मोड़ आने की आहट सुनाई देती है. 4 मई को चुनावी रुझान BJP के पक्ष में आने के साथ ही प. बंगाल से जुड़ी कंपनियों जैसे-आईटीसी, बंधन बैंक, सीईएससी आदि के शेयर शुरुआती कारोबार में चढ़े.
BJP को कारोबारियों की तरफ झुकाव वाली पार्टी माना जाता है और उसने अपने चुनावी घोषणापत्र में भी चार बड़े इंडस्ट्रियल जोन बनाने से लेकर पुरानी मिलें खोलने तक के वादे किए थे. जाहिर है कि अब पार्टी की जोरदार जीत से उद्यमी काफी उत्साहित हैं.
दिग्गज उद्यमी और आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने चुनाव नतीजों पर अपने ट्वीट में कहा, “चुनाव नतीजों से बंगाल का उद्योग जगत बहुत उत्साहित है. विकास अपने एजेंडे पर वापस आ जाएगा. इससे रोजगार और निवेश बढ़ेगा. BJP को मिला जनादेश वह उत्प्रेरक है जिसका बंगाल की अर्थव्यवस्था लंबे समय से इंतजार कर रही थी.”
आजादी से पहले देश के लोग उद्योग लगाने, पढ़ने और इलाज कराने कोलकाता जाया करते थे. लेकिन आज की तारीख में इन तीनों कामों के लिए पश्चिम बंगाल के लोग वहां से बाहर जाने लगे. वामदलों की सरकारों और तृणमूल कांग्रेस की 15 साल की सरकार का रुख कुल मिलाकर ऐसा रहा जिससे राज्य निजी पूंजी को ज्यादा नहीं लुभा पाया यानी उद्योग धंधे यहां नहीं लग पाए.
यहां तक कि तृणमूल कांग्रेस की जड़ें भी सिंगूर में टाटा नैनो की फैक्ट्री लगाने के विरोध से ही जमीं. पश्चिम बंगाल आबादी और कारोबार के लिहाज से देश के शीर्ष 5 राज्यों में है. आर्थिक तौर पर देखा जाए तो 18 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के साथ पश्चिम बंगाल पांचवें स्थान पर और आबादी के लिहाज से देश का चौथा बड़ा राज्य है.
लेकिन कुछ आंकड़े निराश भी करते हैं. केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 1 अप्रैल 2011 से 31 मार्च 2025 तक 6,668 कंपनियां राज्य छोड़कर चली गईं. इनमें से 1,308 महाराष्ट्र, 1,297 दिल्ली, 879 उत्तर प्रदेश और 511 छत्तीसगढ़ चली गईं यानी इनके मुख्यालय पश्चिम बंगाल में बंद कर दिए गए. इस पलायन की कई वजहें हो सकती हैं जिनमें कंपनियों का अपना गुणा-भाग भी शामिल है. हालांकि जब ये आंकड़े संसद में रखे गए तब तृणमूल कांग्रेस ने इसका तीखा विरोध किया था. लेकिन उसका चुनावी फायदा उसे नहीं मिला.
अब जबकि सत्ता की चाबी BJP के हाथ में है तो उसे घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करना होगा. BJP ने अपने घोषणापत्र में कारोबारी सहूलियत के लिए सिंडीकेट सिस्टम खत्म कर सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने, सिंगूर में इंडस्ट्रियल पार्क बनाने, बदहाली से गुजर रहे चाय उद्योग और जूट उद्योग में जान फूंकने, अशोकनगर ऑयल फील्ड डेवलप करने, जर्जर मिलों का पुनरुद्धार, हल्दिया पोर्ट के आसपास विकास कर ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने की बात कही है.
BJP ने कहा है कि वह बंद पड़ी जूट मिलों को भी खोलेगी. महत्वपूर्ण यह है कि BJP ने चार बड़े इंडस्ट्रियल जोन बनाने की बात कही है. साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्य उद्योग यानी एमएसएमई के लिए कर्ज और तकनीकी सहयोग का इंतजाम करने का ऐलान किया. जाहिर है इन सबका मकसद पश्चिम बंगाल के भीतर ही रोजगार पैदा करना है.
खत्म की गई परमानेंट नौकरियों को फिर से चालू किया जाएगा. आलू उत्पादकों को निर्यात और पैकेजिंग की सुविधाएं जिला स्तर पर दी जाएंगी ताकि किसानों को बढ़िया कीमत मिले. जाहिर है आने वाले वक्त में पश्चिम बंगाल के लोग इन घोषणाओं को पूरा होते देखना चाहते हैं ताकि वे बदलाव महसूस कर सकें.

