1 जून को पश्चिम बंगाल में BJP सरकार ने अपना मंत्रिमंडल विस्तार किया. इसमें 35 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली. इससे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है. इन 35 नए मंत्रियों में 13 कैबिनेट रैंक (पूर्ण मंत्री) के हैं जबकि 3 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री हैं.
19 विधायकों को राज्य मंत्री बनाया गया है. शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई को केवल 5 मंत्रियों के साथ पदभार संभाला था, जिनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निसिथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदीराम टुडू शामिल थे. BJP सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे.
1 जून को हुए मंत्रिमंडल विस्तार की एक खास बात यह रही कि इसमें भाषाई विविधता नजर आई. अलग-अलग समुदायों से आने वाले मंत्रियों ने बंगाली, हिंदी, अंग्रेजी, नेपाली, संताली और राजबंशी भाषाओं में शपथ ली. इससे राज्य के विभिन्न समुदायों और इलाकों का प्रतिनिधित्व साफ दिखाई दिया.
कैबिनेट मंत्री अजय कुमार पोद्दार और राज्य मंत्री उमेश राय ने हिंदी में शपथ ली. स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री राजेश महतो ने अंग्रेजी में शपथ ली. राज्य मंत्री जोएल मुर्मू और अमिया किस्कू ने संताली भाषा में शपथ ली. वहीं, आनंदमय बर्मन ने राजबंशी भाषा का इस्तेमाल किया, जबकि विशाल लामा ने नेपाली में शपथ ली. ये सब उत्तर बंगाल और पहाड़ी इलाकों की भाषाई तथा सांस्कृतिक विविधता के प्रतीक हैं.
13 कैबिनेट मंत्रियों में कई अनुभवी नेता हैं जबकि कुछ नए चेहरे महत्वपूर्ण सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं. तापस रॉय एक वरिष्ठ नेता हैं जिन्होंने कांग्रेस से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया. फिर तृणमूल कांग्रेस में गए और आखिर में BJP में शामिल हुए. वे उत्तर कोलकाता से कैबिनेट मंत्री बनने वाले इकलौते नेता हैं. मनोज ओरांव ने उत्तर बंगाल के आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व किया.
अर्जुन सिंह BJP के सबसे पहचाने जाने वाले हिंदी भाषी चेहरों में से एक हैं और वे बैरकपुर के औद्योगिक क्षेत्र से आते हैं. मंत्रिमंडल की सूची में और भी कई ऐसे ही नाम शामिल हैं, जैसे- मुर्शिदाबाद के नेता गौरीशंकर घोष, वरिष्ठ BJP नेता दीपक बर्मन, डॉक्टर से राजनेता बने शरद्वत मुखोपाध्याय, पूर्वी मेदिनीपुर के विधायक अरूप कुमार दास, पूर्व पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक स्वपन दासगुप्ता, RSS प्रशिक्षित नेता और पूर्व पत्रकार जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, कृषि वैज्ञानिक कल्याण चक्रवर्ती, पूर्व CPI(M) युवा नेता शंकर घोष और राम जन्मभूमि आंदोलन के शुरुआती दिनों से जुड़े वरिष्ठ BJP नेता दूध कुमार मंडल.
स्वतंत्र प्रभार वाले तीन राज्य मंत्री हैं, जिनमें मालती रवा रॉय (राजबंशी नेता, कूचबिहार), राजेश महतो (कुर्मी नेता, आरक्षण आंदोलन से जुड़े) और इंद्रनील खान (डॉक्टर व BJP युवा मोर्चा के प्रमुख) का नाम शामिल है. 19 राज्य मंत्रियों में पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा, आदिवासी नेता जोएल मुर्मू, अमिया किस्कू, बिशाल लामा, डॉक्टर हरेकृष्ण बेरा, शिक्षक शांतनु प्रमाणिक, वकील मौमिता बिस्वास मिश्रा और पहली बार विधायक बनी पूर्णिमा चक्रवर्ती (जिन्होंने श्यामपुकुर में पूर्व मंत्री शशि पांजा को हराया) शामिल हैं.
इसके अलावा और भी कई विधायकों को राज्य मंत्री बनाया गया, जिनमें वकील भास्कर भट्टाचार्य, वरिष्ठ विधायक दिबाकर घरामी, आदिवासी नेता नदिर चंद बाउरी, पहली बार विधायक बनीं गार्गी दास घोष, दलित नेता कलिता मांझी, राज्य की सबसे युवा विधायक बिराज बिस्वास, पूर्व तृणमूल कांग्रेस जिला नेता सुमना सरकार, राजबंशी नेता आनंदमॉय बर्मन और दक्षिण 24 परगना की BJP चेहरा दीपंकर जना.
BJP ने चार प्रमुख टॉलीवुड चेहरों रुद्रनील घोष, पापिया अधिकारी, रूपा गांगुली और हिरण चटर्जी को कैबिनेट में जगह नहीं दी. टॉलीवुड से किसी भी कलाकार को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से एंटरटेनमेंट सेक्टर को लेकर सरकार की लंबी अवधि की रणनीति पर काफी चर्चा और अटकलें शुरू हो गई हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP आंतरिक गुटबाजी में फंसने से बचना चाहती है. अगर टॉलीवुड के किसी एक व्यक्ति को मंत्री बना दिया जाता तो टॉलीवुड इंडस्ट्री के बाकी विधायकों के अंदर नाराजगी बढ़ सकती थी. इससे पार्टी का संतुलन बिगड़ सकता था और नई विवाद शुरू हो सकते थे. एंटरटेनमेंट सेक्टर से जुड़े विभाग को सरकार ऐसे लोगों के हाथ में सौंपना चाहती है जो आंतरिक प्रतिद्वंद्विता से दूर हों.
दूसरी ओर, इन चार विधायकों को बाहर रखने से उनकी अहमियत कम नहीं हो गई है. राजनीतिक गलियारों में कई लोग मानते हैं कि ये चारों (रुद्रनील घोष, पापिया अधिकारी, रूपा गांगुली और हिरण चटर्जी) सांस्कृतिक मामलों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों पर अनौपचारिक सलाहकार की भूमिका निभाते रहेंगे. कलाकारों और टेक्नीशियन्स के साथ उनका लगातार संपर्क और अनुभव भविष्य में नीतियां बनाने पर असर डाल सकता है. भले ही सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों का विभाग किसी भी नेता को सौंपा जाए.
मंत्रिमंडल विस्तार ने बंगाल में चल रही दो समानांतर कहानियों को उजागर किया है. एक ओर, BJP सरकार ने एक ऐसा मंत्रिमंडल बनाने का प्रयास किया है जो भौगोलिक स्थिति, जाति, समुदाय, भाषा और राजनीतिक अनुभव के आधार पर संतुलन बनाए रखे. बंगाल के इतिहास में काफी हद तक ऐसा पहली बार है जब किसी भी मंत्रिमंडल में उत्तर बंगाल से इतना महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है. विधानसभा अध्यक्ष रथिन घोष भी इसी क्षेत्र से हैं. दूसरी ओर, सरकार के सामने एंटरटेनमेंट सेक्टर को स्थिर करने की चुनौती है जो अभी भी आंतरिक विभाजन और भविष्य की दिशा को लेकर सवालों से जूझ रहा है.

