बीजू जनता दल (BJD) को अपना पॉलिटिकल गियर शिफ्ट करने का ऑफर दूसरी बार मिल रहा है. राज्यसभा चुनाव के बाद आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनाव में BJD और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने की चर्चा तेज हो गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा है कि अगर पार्टी का हाईकमान मंजूरी देता है, तो दोनों दलों के बीच गठबंधन संभव हो सकता है.
बता दें कि साल 2027 में राज्य में पंचायत चुनाव संभावित हैं. हालांकि राज्य सरकार ने इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है. पंचायती राज विभाग ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि वे अप्रैल 2026 तक महिलाओं, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सीट आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करें.
इधर भक्त चरण दास के इस बयान ने खासा ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि यह ओडिशा की पारंपरिक प्रतिस्पर्धी राजनीति में संभावित बदलाव का संकेत देता है. कांग्रेस और BJD लंबे समय से राज्य में प्रतिद्वंद्वी रहे हैं. ऐसे में सहयोग की बात अहम मानी जा रही है.
भक्त चरण दास ने कहा, "अगर भविष्य में BJD और हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे यह चाहते हैं कि ओडिशा में धर्मनिरपेक्ष दलों के बीच गठबंधन जरूरी है, और जो पहल राज्यसभा चुनाव के दौरान शुरू हुई थी उसे आगे चुनावों में भी लागू करने की जरूरत समझी जाती है, तो अखिल भारती कांग्रेस समिति (AICC ) इस पर फैसला ले सकती है."
इधर BJD ने भी कांग्रेस के इस बयान से पूरी तरह किनारा करने के बजाय सांकेतिक तौर पर समर्थन ही दिया है. पार्टी के वरिष्ठ नेता देबी प्रसाद मिश्रा ने परोक्ष रूप से इस संभावना का समर्थन करते हुए कहा कि हर क्षेत्र और विभिन्न मुद्दों में संभावनाएं होती हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का बयान किसी आकलन और विचार-विमर्श के आधार पर ही दिया गया होगा.
मिश्रा ने आगे संकेत दिया कि अंतिम फैसला मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और राज्य के हितों पर निर्भर करेगा. उन्होंने कहा कि BJD अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेंगे. उन्होंने आगे कहा, "कई लोग कह रहे हैं कि BJD, BJP की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में लौटेगी, जबकि कुछ का कहना है कि वह कांग्रेस के गठबंधन यूपीए में शामिल हो सकती है. ये सभी संभावनाएं हैं."
साथ आना जरूरी और मजबूरी
इस वक्त राज्य में कुल 6,794 ग्राम पंचायत, 314 पंचायत समिति, 45 नगरपालिका और 5 नगर निगम हैं. इनके 80 प्रतिशत से अधिक जिला परिषद, ग्राम पंचायत और अन्य नगर निकायों पर BJD के लोग काबिज हैं. लेकिन बीते दो सालों में BJP ने प्रशासनिक तौर पर कई फैसले लेकर BJD समर्थित नेताओं को BJP में आने के मौके दिए हैं और उन्हें मजबूर भी किया है.
इसके लिए वर्तमान सरकार "ओडिशा पंचायत समिति लेखा प्रक्रिया (संशोधन) नियम, 2025" लेकर आई. इसके मुताबिक ब्लॉक से जिला स्तर तक के अधिकारियों को पंचायत प्रतिनिधियों के मुकाबले अधिक वित्तीय अधिकार दे दिए गए हैं. अब बिल निर्वाचित प्रतिनिधियों के काउंटर-सिग्नेचर के बिना ही पास किए जा सकेंगे. अब विकास खंड अधिकारी (BDO) 20 लाख और इंजीनियर 5 लाख से 4 करोड़ रुपए तक की योजनाओं को बिना किसी पंचायत प्रतिनिधि के अनुमोदन या हस्ताक्षर के पास कर सकते हैं. अब व्यवस्था में खुद को बनाए रखने के लिए BJD समर्थित पंचायत प्रतिनिधि BJP में शामिल हो रहे हैं.
इस नियम के खिलाफ BJD ने सितंबर 2025 में राज्यभर में प्रदर्शन भी किया. लेकिन सरकारी फैसले पर कोई असर नहीं पड़ा. इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों के BJP में शामिल होने का सिलसिला चल पड़ा. आए दिन राज्यभर में कहीं न कहीं BJD समर्थित पंचायत प्रतिनिधि BJP का दामन थाम रहे हैं.
दूसरी वजह यह भी है कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद पहले नुआपाड़ा विधानसभा उपचुनाव और फिर राज्यसभा की चार सीटों में से चौथी सीट पर मिली हार ने BJD को सोचने पर मजबूर किया है. पार्टी को लग रहा है कि खुद को BJP के करीब दिखाने वाली राजनीति से अब काम नहीं चलेगा. इसका फायदा उठाकर BJP आने वाले दिनों में उसे कमजोर करती जाएगी.
ऐसे में BJD को कमजोर कांग्रेस के बजाय ताकतवर BJP को अपना मुख्य राजनीतिक दुश्मन घोषित करना होगा. जिस तरह पार्टी अगला नेता किसे बनाया जाए इसे लेकर उलझन में है, ठीक उसी तरह सालों तक BJP को मुद्दों के आधार पर समर्थन देने की रणनीति छोड़ने को लेकर वह खुलकर बाहर आने के बजाय झिझक दिखा रही है.
राजनीतिक विश्लेषक इन घटनाक्रमों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं. कांग्रेस-BJD गठबंधन की संभावना राज्य के चुनावी समीकरणों को काफी हद तक बदल सकती है. स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक आते ही अब सभी की नजर दोनों दलों के हाईकमान और उनके अगले कदमों पर टिकी हुई है.
इन दोनों दलों के संभावित गठबंधन के बीच BJP भी पीछे नहीं हट रही है. उसने अपनी तैयारी को एक कदम और आगे बढ़ा दिया है. बीते 6 अप्रैल को पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर "गांव चलो अभियान" की शुरुआत की गई है. राज्य BJP इस अभियान के तहत डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों को प्रमुखता से उजागर कर रही है. यह आगामी पंचायत चुनाव के लिए मंच तैयार करने जैसा है.

