अप्रैल की 9 तारीख को बिहार के फारबिसगंज में ऐसी घटना घटी जिसने पूरे देश को सकते में डाल दिया. एक सत्तू विक्रेता ने चाकू से गला रेतकर सरेआम सड़क पर एक पिकअप ड्राइवर की हत्या कर दी. बाद में इस घटना से आक्रोशित लोगों ने सत्तू विक्रेता की जबरदस्त पिटाई कर दी.
पिटाई से बुरी तरह जख्मी सत्तू विक्रेता को बचाया नहीं जा सका. पहले तो इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश हुई, क्योंकि दोनों में से एक हिंदू और एक मुस्लिम था. मगर धीरे-धीरे जब मामला खुलने लगा तो पता चला कि दोनों सूखे नशे के आदी थे और साथ में नशा करते थे.
सूखा नशा एक बोलचाल का शब्द है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से उन नशीले पदार्थों के लिए किया जाता है जो तरल (जैसे शराब) नहीं होते. ये अक्सर पाउडर, गोली, क्रिस्टल या सूखी पत्तियों के रूप में होते हैं, जैसे – हेरोइन, ब्राउन शुगर, एमडीएमए (MDMA), मेथ (Methamphetamine) और एलएसडी (LSD) की गोलिया या फिर गांजा, अफीम डोडा. वैज्ञानिक और कानूनी भाषा में इन्हें साइकोट्रोपिक सब्सटेंस कहा जाता है
जहां तक इस घटना का मामला है, पहले फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास ने इसकी पुष्टि की. बाद में सत्तू विक्रेता रवि चौहान की दादी ने भी मीडिया को बताया कि ड्रग्स का आदी सत्तू विक्रेता नशे की वजह से घर से दूर रहता था और कई दफा उनके साथ भी मारपीट कर चुका था. ऐसे में अब माना जा रहा है कि ड्रग्स के नशे की वजह से सत्तू विक्रेता ने यह क्रूरतम अपराध किया है.
सूखे नशे के असर में अपराध की यह क्रूरतम घटना बिहार में अपने तरह की पहली वारदात नहीं है. इसी महीने पटना जिले के एक गांव में तीन साल की एक बच्ची के साथ रेप और उसके बाद यौन हिंसा की दहला देने वाली घटना घटी थी. तीन अप्रैल, 2026 को घटी उस घटना में भी यह जानकारी मिली कि बच्ची का चाचा, जो ड्रग्स लेने का आदी था, उसने उस बच्ची को बेच दिया था. बच्ची की मां ने मीडिया को बताया, "उसने इंजेक्शन खरीदने के लिए मेरी बच्ची को बेच दिया."
शराबबंदी के लिए जाने जाने वाले बिहार में जहां सरकार इस अभियान को एक चरण आगे यानी संपूर्ण नशाबंदी तक ले जाने की बात करती है, वहां ऐसी घटनाएं दहलाती और परेशान करती हैं. ये तो बड़ी घटनाएं हैं. जानकारों का कहना है कि राज्य में पिछले एक दशक से ड्रग्स एडिक्शन के मामलों में जो तेजी आई है, उसकी वजह से छिनतई और चोरी जैसी वारदातों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है.
इसी साल 11 फरवरी को विधान परिषद में रविंद्र प्रसाद सिंह ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान मुद्दा उठाया कि राज्य में मादक पदार्थों का सेवन काफी बढ़ने के कारण युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है. इसकी वजह से चोरी और छीना-झपटी जैसी घटनाएं भी काफी बढ़ गई हैं. इस प्रस्ताव पर कई विधायक सहमत दिखे.
जानकार बताते हैं कि नशे की लत की वजह से युवा पहले उधार पैसे मांगते हैं. जब उनका उधार का रास्ता बंद होता है तो वे चोरी और छिनतई की तरफ शिफ्ट होते हैं. इसकी शुरुआत उनके घर से होती है, बाद में वे बाहर भी ऐसे अपराध करने लगते हैं. धीरे-धीरे इन युवाओं का इस्तेमाल संगठित अपराध के लिए होता है.
बताया जाता है कि बिहार में शराबबंदी के बाद युवा तेजी से वैकल्पिक नशे की तरफ शिफ्ट हुए. वे पहले गांजा और फिर स्मैक की तरफ बढ़ गए. बिहार के सबसे पुराने नशामुक्ति केंद्रों में से एक 'दिशा नशामुक्ति केंद्र' की संचालक राखी सिंह कहती हैं, " शराबबंदी के बाद एक-दो साल के लिए हमारे पास मरीज आने काफी कम हो गए, मगर उसके बाद हमारे पास गांजे की लत वाले एडिक्ट आने लगे. फिर स्मैक वालों की भीड़ बढ़ने लगी. हमने समझा कि जब शराबबंदी हुई तो युवा लोग पहले गांजा की तरफ शिफ्ट हुए, फिर उन्हें स्मैक की आदत लगी. अब कोरेक्स, गांजा, इंजेक्शन और स्मैक के एडिक्ट ज्यादा आते हैं."
राखी की इस टिप्पणी की पुष्टि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के आंकड़ों से भी होती है. 2015 में जहां बिहार में सिर्फ 14.37 किलो गांजा, 1.12 किलो हेरोइन और 1.97 किलो अफीम जब्त हुई थी, 2025 तक यह आंकड़ा कई हजार गुना बढ़ गया है. इस साल बिहार में लगभग 28 हजार किलो गांजा, 24 सौ किलो अफीम और पॉपी स्ट्रॉ, 3.25 लाख कोडीनयुक्त कफ सिरप की बोतलें और 3.48 लाख नशीले टेबलेट की बरामदगी हुई है.
जाहिर है इन सबकी वजह से अपराध भी लगातार बढ़ रहे हैं. मगर सरकार कार्रवाई की बात कहकर अपनी पीठ थपथपाती है.
बजट सत्र के दौरान विधानसभा में गृह मंत्री सम्राट चौधरी का कहना था, "सूखे नशे के खिलाफ सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है. चाहे ब्राउन शुगर हो, स्मैक हो, हेरोइन हो या कोकीन और अफीम, हमने इन्हें रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. 2025 में सरकार ने 2161 मामले दर्ज किए हैं और 3520 लोगों को गिरफ्तार किया है. हमने इसके लिए स्टेट लेवल की एक यूनिट भी खड़ी की है. सीमावर्ती इलाकों में भी हमने डीआईजी स्तर के अधिकारी की तैनाती की है, ताकि इसे रोका जा सके. जहां से भी हमें ड्रग्स से संबंधित सूचना मिलेगी, वहां कार्रवाई की जाएगी."

