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क्या आखिरी वक्त में बदलने वाली है बिहार में सत्ता हस्तांतरण की स्क्रिप्ट?

'समृद्धि यात्रा' खत्म होने के बाद नीतीश कुमार की विदाई की सुगबुगाहट तो तेज है लेकिन गठबंधन के भीतर उठते बयानों और नागपुर की हलचल से एक नया संस्पेंस बनता दिख रहा है

समृद्धि यात्रा समापन कार्यक्रम में नीतीश कुमार
समृद्धि यात्रा समापन कार्यक्रम में नीतीश कुमार
अपडेटेड 27 मार्च , 2026

पिछले दो महीने और दस दिन से चल रही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'समृद्धि यात्रा' का 26 तारीख को समापन हो गया. जैसा कि अनुमान था, पटना के ज्ञान भवन में आयोजित समापन समारोह को मंच पर मौजूद BJP और JDU नेताओं ने विदाई समारोह का रूप दे दिया. 

विजय चौधरी, रविशंकर प्रसाद, नितिन नवीन, विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी जैसे नेताओं ने मुख्यमंत्री के कामकाज की जमकर तारीफ की. मगर इनमें दो टिप्पणियों ने लोगों का ध्यान विशेष रूप से अपनी ओर खींचा.

नीतीश के करीबी JDU नेता विजय कुमार चौधरी ने अपने भाषण के अंत में कहा, “इस बात को गौर से सुन लीजिए. आगे जो भी सरकार बनेगी, वह इनके हिसाब से ही चलेगी क्योंकि जनादेश इनके नाम पर ही मिला है.” वहीं उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “आगे भी इनके ही मार्गदर्शन में बिहार चलता रहेगा.” 

यह दिलचस्प है कि अपने इस कार्यकाल के महज तीन-चार महीने में ही मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तैयारी में जुटे नीतीश कुमार के बारे में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) नेता बार-बार यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि अगले पांच साल बिहार की सरकार उनके ही मार्गदर्शन में चलेगी. मगर क्या सब कुछ इतना सहज है, जितना NDA नेताओं के बयानों में दिख रहा है?

बिहार में NDA नेताओं की गतिविधियों से हाल तक लोग यह मानकर चल रहे थे कि नई सरकार को लेकर गठबंधन के बीच सहमति बन गई है. राज्यसभा चुनाव में जीत के बाद नीतीश जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे और इसके बाद बिहार में पहली बार BJP अपना सीएम बनाएगी. अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान नीतीश जिस तरह बार-बार अपने संबोधन के अंत में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाते थे और उनका हाथ उठाते थे, उससे यह संकेत मिलने लगा था कि अगले सीएम सम्राट ही होंगे. इस संकेत को समझते हुए खबरें भी चलने लगी थीं और सार्वजनिक समारोहों में इसे नए प्रोटोकॉल के तौर पर देखा जाने लगा था.

मगर हाल के दिनों में कुछ बड़े नेताओं के बयानों से ऐसा लगने लगा है कि अभी कुछ भी दावे से कहना मुश्किल होगा. इसकी शुरुआत JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा के बयान से हुई. उन्होंने कहा, “अभी यह तय नहीं है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा. यह NDA की बैठक में तय होगा.” इसी बयान में उन्होंने यह भी जोड़ा कि नीतीश कुमार सिर्फ सदन चलने पर ही दिल्ली में रहेंगे, बाकी समय वे बिहार में ही रहकर नई सरकार को मार्गदर्शन और निर्देश देते रहेंगे.

फिर JDU के एक अन्य बड़े नेता श्रवण कुमार ने यहां तक कह दिया कि कानूनी रूप से नीतीश अभी अगले छह महीने तक बिहार के मुख्यमंत्री रह सकते हैं.

इस बीच BJP नेताओं के दिल्ली और नागपुर जाने की खबरें सामने आने लगीं. सबसे पहले बिहार BJP के नेता संजय सरावगी के दिल्ली जाने और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने की खबर आई. जब वे दिल्ली से लौटे तो सत्ता परिवर्तन के सवाल पर उन्होंने कहा, “अभी तो पहले नीतीश जी को राज्यसभा में शपथ लेनी है. जब वे शपथ लेंगे, तब बदली हुई स्थिति में निर्णय लिया जाएगा कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा.” उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद NDA के नेता बैठकर फैसला लेंगे और इस प्रक्रिया में मुख्यमंत्री की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी.

इस दौरान बिहार BJP के तीन-चार बड़े नेताओं के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय (नागपुर) जाने की खबरें भी आईं. इनमें विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, दीघा के विधायक संजीव चौरसिया, बिहार सरकार में मंत्री रमा निषाद और क्षेत्रीय महासचिव नागेंद्र के नाम लिए जाने लगे.

सियासी गलियारों में चर्चा होने लगी कि जिस तरह मुख्यमंत्री के रूप में बार-बार सम्राट चौधरी का नाम सामने आ रहा है, उससे संघ बहुत खुश नहीं है और अब नए विकल्प तलाश रहा है.

बिहार में BJP और संघ की गतिविधियों पर नजर रखने वाले पत्रकार रमाकांत चंदन कहते हैं, “संघ इस बात से सहमत नजर नहीं आ रहा कि अगला सीएम नीतीश कुमार की पसंद का हो. उसे लगता है कि अगर ऐसा हुआ तो यह वैसी ही गलती होगी, जैसी झारखंड में रघुवर दास को सीएम बनाकर हुई थी. रघुवर दास के बाद झारखंड BJP के हाथ से निकल गया. संघ चाहता है कि चूंकि बिहार में पहली बार BJP को अपना सीएम बनाने का मौका मिला है, तो कोई ऐसा व्यक्ति बने जो BJP का पुराना साथी हो और स्थाई रूप से सत्ता संभाले. संघ की प्राथमिकता किसी अति पिछड़े चेहरे को सीएम बनाने की लगती है.” 

चंदन के मुताबिक BJP और संघ अब सम्राट चौधरी से इतर दूसरे नामों पर विचार कर रहे हैं क्योंकि सम्राट न तो BJP के पुराने नेता हैं और न ही उनका जुड़ाव संघ से रहा है. हाल के दिनों में जिस तरह वे नीतीश के करीब हुए हैं, उससे भी संघ सशंकित है.

रमाकांत चंदन की बात कुछ हद तक इसलिए सही लगती है क्योंकि संघ मुख्यालय जाने वाले नेताओं की सूची में तीन अति पिछड़ा समुदाय से हैं. हालांकि इन बातों में भी एक पेच है. विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की नागपुर यात्रा 'इंडियन यूथ पार्लियामेंट' के समापन समारोह में भाग लेने के लिए थी. वहां जाने पर उन्होंने संघ मुख्यालय का भ्रमण जरूर किया और प्रथम सरसंघचालक हेडगेवार की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया.

साथ ही जिस तरह NDA नेता यह कह रहे हैं कि नीतीश राज्यसभा की शपथ के बाद ही इस्तीफा देंगे और अभी तारीख तय नहीं है, उससे यह संदेश जा रहा है कि सत्ता हस्तांतरण के मसले पर अभी चीजें अंतिम रूप नहीं ले पाई हैं.

रमाकांत चंदन आगे कहते हैं, “नीतीश अपनी पार्टी के लिए गृह एवं सामान्य प्रशासन विभाग तो चाहते ही हैं, साथ ही विधानसभा अध्यक्ष का पद भी चाहते हैं.”

इस बीच कई JDU नेता मीडिया में अलग-अलग बयान दे रहे हैं. JDU एमएलसी खालिद अनवर कहते हैं, “नीतीश कुमार कहीं नहीं जा रहे. जो लोग उनके जाने की बात कह रहे हैं, वे उन्हें नहीं जानते. अभी उन्होंने पद छोड़ा कहां है? जब पद छोड़ेंगे, तभी तो कोई वैकेंसी होगी.” वहीं विधायक चेतन आनंद और निशांत के हमउम्र कई विधायक लगातार बयान दे रहे हैं कि निशांत ही सीएम बनेंगे.

नीतीश की समृद्धि यात्रा में कई भावुक दृश्य भी दिखे. भोजपुर की एक सभा में एक कार्यकर्ता पोस्टर लेकर खड़ा हो गया कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद न छोड़ें, अभी बिहार को उनकी जरूरत है. वहीं एक बुजुर्ग नारा लगाने लगे- 'बिहार मत छोड़िए'.

इस बीच विपक्षी नेता तेजस्वी यादव का बयान भी चर्चा में है कि नीतीश अपनी मर्जी से राज्यसभा नहीं जा रहे, बल्कि उन्हें दबाव बनाकर भेजा जा रहा है.

रमाकांत चंदन के अनुसार, “एक तरफ नीतीश अपने तरीके से गठबंधन पर दबाव बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ संघ इस बार कोई रिस्क लेने को तैयार नहीं है. BJP का भी अपना तरीका है कि वह अक्सर चौंकाने वाले फैसले लेती है.”

मगर वहीं हमारे सहयोगी चैनल आजतक के बिहार संवाददाता शशिभूषण कहते हैं, “नीतीश के इस्तीफे और सत्ता हस्तांतरण में वक्त भले लग रहा हो, पर आगे का रास्ता लगभग तय है. हमें यह मानकर चलना चाहिए कि अगले सीएम के तौर पर सम्राट चौधरी का नाम लगभग फाइनल है. किसी नए नाम के सामने आने की संभावना कम ही दिखती है.”

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