जून की 14 और 15 तारीख को गोवा में आयोजित ‘इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवॉर्ड्स-2026’ में हिस्सा लेने के लिए बिहार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता भी पहुंचे थे. इस कार्यक्रम में उन्होंने बिहार के ग्लोबल हेरिटेज डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का महत्वाकांक्षी विजन पेश किया.
राज्य ने पर्यटन को केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं बल्कि आर्थिक विकास और निवेश को गति देने वाले एक प्रमुख माध्यम के रूप में पेश किया. ‘रीइमैजिनिंग बिहार ऐज़ ए ग्लोबल हेरिटेज डेस्टिनेशन’ सत्र में गुप्ता ने कहा कि बिहार पुरानी धारणाओं से बाहर निकलकर एक विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में उभरने के लिए प्रतिबद्ध है.
गुप्ता ने रियायती हेलीकॉप्टर पर्यटन सेवा शुरू करने की योजना की घोषणा की और बताया कि सीतामढ़ी स्थित पुनौरा धाम को अयोध्या के राम मंदिर परिसर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. पुनौरा धाम को माता सीता का जन्मस्थान माना जाता है.
बिहार के पर्यटन मंत्री ने आगे कहा, “हमारा प्रयास है कि पुनौरा धाम को व्यापक रामायण सर्किट से जोड़ा जाए ताकि अयोध्या आने वाले श्रद्धालु बिहार भी आएं.” उन्होंने कहा कि इससे धार्मिक पर्यटन और राज्य की सांस्कृतिक पहचान, दोनों को मजबूती मिलेगी.
पर्यटन दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) के महाप्रबंधक चंदन चौहान ने कहा कि दुनिया में बहुत कम ऐसे क्षेत्र हैं जहां आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का इतना बड़ा समूह मौजूद हो.
साथ ही उन्होंने बिहार पर्यटन से जुड़े प्रभावशाली आंकड़े भी प्रस्तुत किए. साल 2025 में बिहार में 6.54 करोड़ घरेलू पर्यटक और 7.40 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे. बिहार में यूनेस्को की दो विश्व धरोहर स्थल हैं- बोधगया का महाबोधि मंदिर और नालंदा महाविहार के अवशेष. साथ ही बिहार को बौद्ध और जैन धर्म की जन्मभूमि तथा सिख धर्म से ऐतिहासिक जुड़ाव के लिए भी पहचाना जाता है.
सिर्फ गंतव्य आधारित पर्यटन से आगे बढ़ते हुए राज्य ने विभिन्न पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए एक नेटवर्क बनाने की बात कही है, जिसमें बौद्ध, जैन, सिख, रामायण, शक्ति, सूफी, गांधी, शिव और ईको-टूरिज्म सर्किट शामिल हैं. अधिकारियों का कहना है कि इन स्थलों को एकीकृत पर्यटन अनुभव के रूप में जोड़ने से पर्यटकों की संख्या और उनके ठहरने की अवधि दोनों बढ़ सकती हैं.
बिहार के पर्यटन मंत्री के जरिए दिखाए गए इस प्रजेंटेशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निजी निवेश आकर्षित करने के लिए किए गए नीतिगत सुधारों पर केंद्रित था. बिहार ने अपनी पर्यटन नीति के तहत पूंजी सब्सिडी, ब्याज अनुदान, होमस्टे सहायता, ब्रांडिंग सहयोग और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के अवसरों की जानकारी दी.
सरकार ने धार्मिक और विरासत पर्यटन, नदी पर्यटन, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, MICE टूरिज्म (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन टूरिज्म) को प्राथमिकता वाला क्षेत्र बताया. बिहार के पर्यटन मंत्री ने कई प्रमुख परियोजनाओं का भी जिक्र किया जो वर्तमान में विकसित की जा रही हैं.
इनमें सीतामढ़ी का पुनौरा धाम, सोनपुर का हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर, बोधगया का बौद्ध मेडिटेशन एंड एक्सपीरियंस सेंटर, पटना और गया में प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी परियोजनाओं के अलावा तिरुमला तिरुपति देवस्थानम और ईशा फाउंडेशन के साथ साझेदारियां शामिल हैं.
इसके अलावा, बिहार ने ईको-टूरिज्म और नदी पर्यटन की संभावनाओं पर भी जोर दिया. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य, कंवर झील और राज्य की प्रमुख नदी प्रणालियों से जुड़े परियोजनाओं के जरिए बिहार की पर्यटन पहचान को तीर्थस्थलों से आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
प्रजेंटेशन का समापन एक व्यापक संदेश के साथ हुआ कि बिहार की सबसे बड़ी चुनौती आकर्षणों की कमी नहीं, बल्कि उसकी छवि से जुड़ी धारणाएं हैं. राज्य का मानना है कि बुनियादी ढांचे में निवेश, नीतिगत समर्थन, डिजिटल नवाचार और अपनी अद्वितीय सभ्यतागत विरासत के बल पर बिहार खुद को भारत के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में शामिल कर सकता है.
बिहार के पर्यटन योजनाओं से जुड़ी पांच प्रमुख बातें :
- बिहार खुद को एक वैश्विक विरासत पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए वह बौद्ध, जैन और सिख धर्मों की जन्मभूमि होने तथा बोधगया और नालंदा जैसे विश्वप्रसिद्ध स्थलों की पहचान का लाभ उठा रहा है.
- धार्मिक पर्यटन राज्य की पर्यटन रणनीति का मुख्य आधार बना हुआ है. पुनौरा धाम, हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर, बोधगया और अन्य तीर्थस्थलों में बड़े निवेश की योजना है.
- सरकार निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए पूंजी सब्सिडी, ब्याज अनुदान, होमस्टे प्रोत्साहन और PPP अवसर प्रदान कर रही है ताकि पर्यटन अवसंरचना का तेजी से विकास हो सके.
- पर्यटन में विविधता लाना प्रमुख लक्ष्य है. इसके तहत ईको-टूरिज्म, नदी पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन, वेलनेस टूरिज्म और MICE टूरिज्म को पारंपरिक तीर्थ पर्यटन के साथ बढ़ावा दिया जा रहा है.
- राज्य की सबसे बड़ी चुनौती उसकी संभावनाएं नहीं बल्कि उसकी छवि (बिहार की इमेज) है. अधिकारियों का मानना है कि बिहार की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी है लेकिन लंबे समय से बनी धारणाओं और जागरूकता की कमी के कारण उसे पर्याप्त पहचान नहीं मिल पाई है.

