scorecardresearch

भजनलाल शर्मा की टीम में बड़े बदलाव की अटकलें; किसकी हो सकती है एंट्री?

राजस्थान में सितंबर-अक्टूबर में पंचायत और निकाय चुनाव होने हैं. इससे पहले मंत्रिमंडल विस्तार कर BJP जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है

राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा
राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा
अपडेटेड 15 मई , 2026

राजस्थान की भजनलाल सरकार में ढाई साल से टल रहे मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दिल्ली दौरे और केंद्रीय नेतृत्व के साथ हुई मुलाकातों ने इस चर्चा को नई हवा दी है.

मुख्यमंत्री की BJP के संगठन महामंत्री बीएल संतोष और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ हुई लंबी मीटिंग को मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि BJP अब पंचायत और निकाय चुनावों से पहले सरकार और संगठन दोनों में बड़ा संतुलन साधने की तैयारी में है.

राजस्थान में सितंबर-अक्टूबर में पंचायत और निकाय चुनाव होने हैं. ऐसे में इससे पहले मंत्रिमंडल विस्तार कर BJP जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है.

हाल ही में उत्तर प्रदेश और बिहार में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राजस्थान में इसकी संभावना और बढ़ गई है. राजस्थान के साथ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे जिन राज्यों में चुनाव हुए, वहां भी मंत्रिमंडल विस्तार किया जा चुका है.  दिसंबर 2023 में विधानसभा चुनावों में जीत के बाद राजस्थान के साथ ही मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी BJP सरकार बनी थी. मध्य प्रदेश की मोहनलाल यादव सरकार का 8 जुलाई 2024 को ही मंत्रिमंडल विस्तार हो गया, वहीं छत्तीसगढ़ की विष्णु देव सरकार ने 20 अगस्त 2024 को अपनी कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया पूरी की.  हालांकि, मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल में अभी भी 4 पद खाली हैं मगर छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल का कोई पद खाली नहीं है.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित उनकी सरकार में शामिल कई मंत्रियों पर विभागों का बढ़ता बोझ अब प्रशासनिक और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है. भजनलाल शर्मा खुद गृह समेत आठ अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.  उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी के पास वित्त और पीडब्ल्यूडी सहित छह विभाग हैं. दूसरे उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा परिवहन और उच्च शिक्षा समेत चार विभाग देख रहे हैं, वहीं कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ उद्योग सहित पांच विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के पास चार बड़े विभागों की जिम्मेदारी है. सियासी जानकार मानते हैं कि एक व्यक्ति के पास ज्यादा विभागों की जिम्मेदारी होने से सरकारी फैसलों की गति, विभागीय मॉनिटरिंग और योजनाओं की प्रभावी समीक्षा पर असर पड़ना स्वाभाविक है. यही वजह है कि अब मंत्रिमंडल विस्तार को केवल राजनीतिक संतुलन नहीं, बल्कि प्रशासनिक जरूरत के तौर पर भी देखा जा रहा है.

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. गजेंद्र सिंह के अनुसार, "जब एक मंत्री पांच-छह विभाग संभालेगा तो यह स्वाभाविक है कि हर विभाग को पर्याप्त समय और निगरानी नहीं मिल पाएगी. इसी के चलते फैसलों में देरी, योजनाओं की मॉनिटरिंग में कमजोरी और अफसरशाही पर निर्भरता बढ़ती है. लंबे समय तक छह पद खाली रहने से राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन भी प्रभावित हो रहा है."

राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्य में अधिकतम 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं. भजनलाल सरकार में वर्तमान में मुख्यमंत्री समेत कुल 24 मंत्री हैं, यानी अब भी 6 पद खाली हैं.

पंचायत व निकाय चुनाव के मद्देनजर BJP मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश करेगी. पार्टी के सामने जाट, राजपूत, ब्राह्मण, महिला और युवा चेहरों को संतुलित तरीके से प्रतिनिधित्व देने की चुनौती है. यही वजह है कि कई नए और अनुभवी चेहरों के नाम भी संभावित दावेदारों में सामने आ रहे हैं. इनमें पूर्व सांसद व मंत्री श्रीचंद कृपलानी, केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम, मारवाड़ के वरिष्ठ नेता व बाली विधायक पुष्पेंद्र सिंह, राजसमंद विधायक दीप्ति माहेश्वरी, डेगाना से अजय सिंह किलक, ओसियां विधायक भैराराम सियोल और जयपुर के विराटनगर से विधायक कुलदीप धनकड़ के नाम चर्चा में हैं.

संभावित फेरबदल में भजनलाल शर्मा के कुछ मौजूदा मंत्रिमंडल सहयोगियों को ड्रॉप किए जाने की चर्चा है. बताया जा रहा है कि पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने मंत्रिमंडल सदस्यों की सक्रियता के हिसाब से सर्वे कराया है, जिसमें कई मंत्रियों के कामकाज को लेकर पार्टी आलाकमान संतुष्ट नहीं है. पार्टी संगठन इन दिनों ग्राम विकास चौपालों के जरिए मंत्रियों, विधायकों और पदाधिकारियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रहा है.

इसके अलावा प्रदेश मुख्यालय की टीम भी लगातार मंत्रियों के काम का फीडबैक जुटा रही है. इसमें गांवों में हुई चौपालों की संख्या, आम कार्यकर्ताओं की राय, विभागों के कामकाज और जनता की शिकायतों को शामिल किया जा रहा है. इसी रणनीति के तहत ग्राम रथ और सुझाव पेटिका के जरिए आमजन की राय भी जुटाई जा रही है. पार्टी के भीतर यह संदेश साफ है कि 'जैसा काम, वैसा पद' की नीति पर आगे की जिम्मेदारियां तय होंगी.

देखा जाए तो राजस्थान में ढाई साल बाद संभावित मंत्रिमंडल विस्तार अब केवल राजनीतिक अटकलों तक सीमित नहीं दिख रहा. माना जा रहा है कि BJP अब केवल खाली पद भरने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जातीय, क्षेत्रीय और प्रशासनिक संतुलन साधते हुए सरकार को नए राजनीतिक संदेश के साथ मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है. 

Advertisement
Advertisement