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अयोध्या : आम लोगों से लेकर सेना तक की जमीन पर धांधली के आरोप क्यों लग रहे हैं?

अयोध्या में जमीन की खरीद और मुआवजा वितरण में धांधली पर समाजवादी पार्टी का आक्रामक रुख. विपक्षी दलों के आरोपों को लेकर बैकफुट पर दिख रही है भाजपा सरकार

अयोध्या के महर्ष‍ि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार में इन किसानों की जमीन अधिग्रहीत की गई है
अयोध्या के महर्ष‍ि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार में इन किसानों की जमीन अधिग्रहीत की गई है
अपडेटेड 13 सितंबर , 2024

अयोध्या के महर्ष‍ि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की उत्तर-पूर्वी सीमा से सटे और नवनिर्मित राम मंदिर से करीब 5 किलामीटर दूर गांव धर्मपुर सहादत निवासी रामहेत प्रजापति इन दिनों बड़े बेचैन हैं. हवाई अड्डे के विस्तारीकरण की जद में रामहेत की आठ बिस्वा यानी एक बीघा जमीन आ गई थी. दो साल पहले खेती योग्य जमीन के अधिग्रहण के एवज में रामहेत को 12 लाख, 80 हजार रुपए का मुआवजा मिला. यह मुआवजा धर्मपुर सहादत के दूसरे गरीब किसानों से ज्यादा ही था क्योंकि रामहेत की जमीन चकरोड के किनारे  थी. 

लेकिन विडंबना यह है कि रामहेत की जमीन से महज दस फीट की दूरी पर मौजूद जनौरा बाहर नगर पालिका की एक बीघा जमीन का मुआवजा 74 लाख 80 हजार रुपए निर्धारित किया गया. एक ही एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहीत की गई जमीनों के मुआवजे में इस विसंगति के पीछे अधिकारी जमीन की भिन्न प्रकृति को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. रामहेत को मुआवजे के 12 लाख रुपए मिले लेकिन इतने पैसे में गांव से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर एक बिस्वा जमीन भी नहीं मिल पा रही. 

60 साल की उम्र पार कर रहे रामहेत अब तक खेती कर अपने परिवार का किसी तरह पेट पालते थे लेकिन अब उन्हें घर चलाने के लिए मजदूरी करने को मजबूर होना पड़ा है. रामहेत ही नहीं ढाई हजार परिवारों वाले धर्मपुर सहादत गांव के करीब दो हजार से अधि‍क परिवारों के घर हवाई अड्डे के विस्तारीकरण में आकर जमीदोंज हो चुके हैं. इन परिवारों को सरकारी कीमत का चार गुना मुआवजा भी मिल गया है लेकिन उस पैसे से बाजार दर पर मामूली जमीन पर खरीदने की हैसियत नहीं रह गई है. 

अधिग्रहीत जमीन के एवज में किसानों को रहने के लिए सरकारी चारागाह, धूर, जलभराव वाली जमीनें आवंटित कर दी गई हैं. इनकी नवैय्यत न बदले जाने से बहुत से किसानों को जमीन के कागजात भी नहीं मिल पाए हैं. इसी तरह धर्मपुर के आसपास के गंजा, सरेठी, कुशामाहा और जनौरा ग्रामसभा के हजारों किसान अनियमित मुआवजा पाने से परेशान है. ‘एक प्रोजेक्ट एक मुआवजा’ की नीति पर भेदभाव का आरोप इस लोकसभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा था. जमीदोंज हो चुके गांव के ऊपर से गुजरने वाले हवाई जहाज यहां के किसानों का दर्द और बढ़ा देते हैं. 

धर्मपुर सहादत गांव से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर मौजूद रामदत्त अटरावां, सरेठी, ददेरा, बैसिंह और समाहा गांव अयोध्या विकास प्राधिकरण की एयरोसिटी योजना की जद में आ गए हैं. इस योजना के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में बीते 15 मार्च को किसानों अयोध्या विकास प्राधिकरण का घेराव किया. अपनी पुश्तैनी जमीन को बचाने के लिए किसानों ने ‘मातृ भूमि मुक्त‍ि मोर्चा संघर्ष समिति’ का गठन कर आंदोलन शुरू किया. संघर्ष समिति के पदाधिकारी और सरेठी गांव के प्रधान रामवृक्ष यादव बताते हैं, “प्रशासन जमीन का सर्किल रेट न बढ़ाकार बहुत कम कीमत पर किसानों की जमीनें खरीद रहा है. किसानों के पास रोजगार नहीं है, खेती ही जीविका का एकमात्र साधन है. अगर इनकी जमीनें ले ली जाएंगी तो ये भूखों मर जाएंगे.” 

एयरोसिटी योजना की जद में आने वाले पांच गांवों के छह हजार किसान परिवार इस योजना से प्रभावित हैं. ये सभी एक बड़े आंदोलन की योजना बना रहे हैं. पूर्व प्रधान अभिषेक गौतम कहते हैं, “गांव के करीब 20 किलोमीटर के दायरे में कोई भी जमीन उपलब्ध नहीं है. किसान मर जाएंगे लेकिन अब अपनी जमीन नहीं देंगे.” किसानों का आरोप है कि सरकार जमीन का जिस दर पर मुआवजा दे रही है उससे बहुत ज्यादा उसी जमीन का बाजार भाव है. हालांकि स्थानीय लेखपाल हरिराम मौर्य बताते हैं कि मुआवजा निर्धारण में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं हुआ है और सारी कार्रवाई सरकारी नीति के मुताबिक ही हो रही है. 

जमीन अधिग्रहण पर राजनीतिक दांव-पेच

अयोध्या जिले में 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक की योजनाएं आकार ले रही हैं. इन योजनाओं में मुआवजा वितरण की विसंगति और इनसे स्थानीय नागरिकों को होने वाली दिक्कतें लोकसभा चुनाव का शोर थमते ही सतह पर आ गई हैं. चार जून को आए लोकसभा चुनाव नतीजों में जैसे ही अयोध्या को समाहित करने वाली फैजाबाद लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार लल्लू सिंह की सपा उम्मीदवार अवधेश प्रसाद के सामने अप्रत्याशित हार हुई, जिले में हो रहे विकास कार्यों पर उठने वाले सवाल और गहरे हो गए. अवधेश प्रसाद द्वारा रिक्त हुई मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर आने वाले दिनों में होने वाले उपचुनाव में पलटवार करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं कमान संभाल ली है. वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) भी अयोध्या में भाजपा सरकार पर भूमि घोटाले का आरोप लगाकर स्थानीय जनता का समर्थन बरकरार रखना चाहती है. 

लखनऊ में शिया कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर अमित राय बताते हैं, “अयोध्या में जिस तरह से स्थानीय लोगों से सस्ती दर पर जमीन खरीदकर उसे बाहरी लोग महंगी दर पर बेच रहे हैं. जिस तरह अधिकारियों और नेताओं ने अयोध्या में जमीनें खरीदी हैं उससे रामनगरी के लोगों में बहुत गुस्सा है. यूपी की भाजपा सरकार ने इन आरोपों पर अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है. ऐसा न होने पर आगामी विधानसभा उपचुनाव के साथ वर्ष 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.”

समाजवादी पार्टी (सपा) आक्रामक ढंग से अयोध्या में भूमि घोटाले के आरोपों को मुद्दा बना रही है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 12 सितंबर को भाजपा और सरकारी अधिकारियों पर अयोध्या में एक बड़े भूमि घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया. लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर स्थ‍ित पार्टी कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए अखि‍लेश यादव ने कहा, "अधिकारी और भाजपा के सदस्य लूट में लगे हुए हैं... जहां चोरी होगी, वहां विकास नहीं होगा. अगर वे अयोध्या जैसे पवित्र स्थान पर ऐसी चोरी कर सकते हैं, तो कल्पना करें कि यूपी के अन्य जिलों में और कितनी चोरी हो रही होंगी. मैं अपनी पार्टी के नेताओं को इस काली सच्चाई को उजागर करने के लिए धन्यवाद देता हूं." 

अखिलेश यादव का इशारा अयोध्या के वरिष्ठ सपा नेता जयशंकर पांडेय, अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडेय समेत उन नेताओं की ओर था जो अयोध्या में जमीन की गड़बडि़यों की परतें खोलने में जुटे हुए हैं. पार्टी कार्यालय में 12 सितंबर को पवन पांडेय ने अखिलेश यादव को अयोध्या में भाजपा सरकार के अधिकारियों और नेताओं द्वारा धांधली से खरीदी गई जमीनों की एक रिपोर्ट भी सौंपी. सपा सरकार में मंत्री रहे पवन पांडेय ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ''सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में भाजपा के लोगों के इशारे पर भूखंडों की लूट और कालाबाजारी हो रही है. अयोध्या में सैन्य फायरिंग अभ्यास के लिए जमीन आरक्षित थी, लेकिन दुर्भाग्य से भाजपा के लोग उस पर प्लॉटिंग कर रहे हैं जबकि कुछ बड़े उद्योगपतियों को वहां जमीन दे दी गई है. लोग हैरान हैं कि सैन्य फायरिंग अभ्यास के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जमीन उद्योगपतियों को कैसे बेच दी गई. भाजपा नेता वेद प्रकाश गुप्ता और पूर्व एमएलसी सीपी शुक्ला ने अयोध्या में कई भूखंड खरीदे हैं.'' 

पवन पांडेय ने जानकारी दी कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में एक नई रेलवे लाइन का प्रस्ताव था और इसके रास्ते में बहुत सारे घर नहीं आ रहे थे. अयोध्या में भाजपा के चुनाव हारने के बाद, प्रस्तावित रेलवे लाइन का मार्ग बदल दिया गया है और अब लगभग 200-250 घर, दुकानें आदि इसके रास्ते में आ रही हैं. पांडेय ने दावा किया, "एक बाबा है जिसने दलितों से जमीन ली थी... उसके खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश था लेकिन कुछ नहीं हुआ. इसके बजाय, कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने उन बाबा से जमीन ली और नई रेलवे लाइन का मार्ग बदल दिया. मेरे पास सभी कागजात हैं जो अयोध्या में बड़े उद्योगपतियों द्वारा की गई लूट को साबित करते हैं." 

इसी हवाले से अखिलेश यादव ने आरोप लगाया, “जब उनके अपने लोगों ने सस्ते दर पर प्लॉट खरीद लिए, तो उन्होंने सर्किल रेट बढ़ा दिए. हमारे पास प्लॉट खरीदने वाले सभी अधिकारियों की रजिस्ट्री प्रतियां हैं. आमतौर पर कोई भी उस जमीन को देखने की हिम्मत नहीं कर सकता, जिसका इस्तेमाल रक्षा के लिए किया जाता है, लेकिन अब भाजपा ने फायरिंग रेंज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जमीन को बेच दिया है. अयोध्या के लोगों से बदला लेने के लिए उन्होंने रेलवे अलाइनमेंट भी बदल दिया, जिससे पहले गरीबों की जमीन या उनके कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ता था. सपा अयोध्या के लोगों के साथ खड़ी है. 2027 में जब हमारी पार्टी सत्ता में आएगी तो हम अयोध्या को विश्वस्तरीय शहर बनाएंगे... अयोध्या के लोगों को सर्किल रेट से ज्यादा मुआवजा देंगे.''

सपा नेताओं के आक्रामक ढंग से लगाए जा रहे आरोपों पर अयोध्या के अधिकारी सामने आकर बोलने को तैयार नहीं हैं. अयोध्या में सेना की फील्ड फायरिंग रेंज को गैर-अधिसूचित करने के विवाद पर अयोध्या के अधिकारी दावा करते हैं कि विवादित भूमि सेना की नहीं है और दशकों से यहां कोई फायरिंग अभ्यास नहीं हुआ है. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के इस दावे का खंडन करते हुए कि मांझा जमथरा गांव की भूमि सेना की है, अयोध्या प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "विवादित भूमि मांझा जमथरा गांव में स्थित है. यह किसानों और राज्य सरकार की है." 

इसी अधिकारी का दावा है, "यह भूमि सेना की नहीं है, लेकिन स्वतंत्रता-पूर्व कानून के तहत, हर 5 साल में नियमित अधिसूचनाओं के माध्यम से इसे सेना की फायरिंग प्रैक्टिस के लिए नामित किया जाता था. लेकिन कई दशकों से सेना द्वारा इसका उपयोग नहीं किया गया. यहां फायरिंग प्रैक्टिस की अनुमति देना मानव जीवन के लिए खतरा हो सकता था." अधिकारी के मुताबिक यह भूमि राम मंदिर के पास है और ग्रामीणों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे गैर-अधिसूचित किया गया था. 

मांझा जमथरा बांधा रोड (मंदिर के पीछे) से लगभग 3 किमी दूर है. अयोध्या मास्टर प्लान 2031 के अनुसार, इस क्षेत्र का निर्दिष्ट भूमि उपयोग 'पार्क और खुली जगह' है. अयोध्या के मांझा जमथरा में भूमि का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता है. पूरा क्षेत्र खुला है, जिसमें से अधिकांश नजूल (सरकारी) भूमि है. जिला प्रशासन ने साफ किया है कि वर्तमान में, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजना को छोड़कर क्षेत्र में कोई निर्माण गतिविधि नहीं है. बहरहाल अयोध्या में जमीन की खरीद से जुड़े आरोप लगातार तीखे होते जा रहे हैं. इन आरोपों का स्पष्ट और प्रभावी जवाब तलाशना यूपी की भाजपा सरकार के लिए मुश्क‍िलों भरा साबित हो रहा है. 

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