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अभी भी जिंदा है अतीक अहमद का क्राइम नेटवर्क!

प्रयागराज में इरफान हत्याकांड की जांच पता चला है कि अतीक अहमद का गैंग आईएस-227 खत्म नहीं हुआ बल्कि अभी-भी सक्रिय है लेकिन इसके तौर-तरीके बदल गए हैं

अतीक अहमद के शूटर साबिर के सहयोगी अली अहमद की जमानत अर्जी खारिज हो गई है. (File Photo: ITG)
अतीक अहमद (फाइल फोटो)
अपडेटेड 17 अप्रैल , 2026

प्रयागराज में 8 अप्रैल की शाम करेली के बिस्मिल्ला चौराहे पर हुई प्रॉपर्टी डीलर मोहम्मद इरफान की हत्या कोई एकलौती आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क की मौजूदगी का संकेत मानी जा रही है.

दिन-दहाड़े, भीड़भाड़ वाले इलाके में जिस तरह से हमलावरों ने सटीक योजना के तहत वारदात को अंजाम दिया, उसने यह सवाल फिर से खड़ा कर दिया है कि क्या अतीक अहमद के नेटवर्क की जड़ें अभी भी उतनी ही गहरी हैं, जितनी उसके जिंदा रहते थीं.

इरफान की हत्या की कहानी अपने आप में इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली को उजागर करती है. बाइक सवार चार हमलावर, चेहरे गमछे से ढके हुए, पहले से तय टारगेट के पास पहुंचते हैं. एक शूटर उतरता है, बेहद करीब से गोली मारता है और फिर पूरे आत्मविश्वास के साथ फरार हो जाता है. यह तरीका पेशेवर अपराधियों का होता है, जो न केवल इलाके की भौगोलिक समझ रखते हैं बल्कि पुलिस की प्रतिक्रिया समय का भी अनुमान लगा चुके होते हैं. 

पुलिस जांच में सामने आया कि इस हत्याकांड में मुख्य भूमिका आसिफ दुर्रानी के भाई राशिद की थी. आसिफ दुर्रानी खुद अतीक गैंग के आईएस-227 गिरोह से जुड़ा रहा है और उसके खिलाफ 17 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं. यह तथ्य अपने आप में बताता है कि गैंग के पुराने सदस्य, भले ही खुलकर सामने न आ रहे हों, लेकिन सक्रियता बनाए हुए हैं.

“लो-प्रोफाइल” मोड में गैंग 

इस घटना की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह उस समय हुई जब अतीक अहमद और अशरफ की हत्या को करीब तीन साल पूरे हो चुके थे. 15 अप्रैल 2023 को कोल्विन अस्पताल परिसर में हुई उस सनसनीखेज हत्या के बाद सरकार और पुलिस ने दावा किया था कि गैंग की कमर तोड़ दी गई है. लेकिन ज़मीनी हालात इन दावों को चुनौती देते नजर आते हैं. पुलिस का आधिकारिक रुख हालांकि अलग है. प्रयागराज के पुलिस उपायुक्त (शहर) मनीष शांडिल्य का कहना है कि आईएस-227 गैंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है और गैंग के हर सदस्य और सहयोगी की निगरानी की जा रही है. उनके मुताबिक, गैंग चार्ट में शामिल 121 सदस्यों और 72 सहयोगियों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है. यह प्रक्रिया केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि इसमें उनके वर्तमान व्यवसाय, संपर्क और गतिविधियों की गहन जांच शामिल है. 

पुलिस के अनुसार, गैंग अब अपने पारंपरिक गढ़ चकिया मोहल्ले से संचालित नहीं हो रहा. वहां की खुली गतिविधियां लगभग खत्म हो चुकी हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गैंग खत्म हो गया है. पुलिस का मानना है कि नेटवर्क ने खुद को “लो-प्रोफाइल” मोड में शिफ्ट कर लिया है. अब गतिविधियां छिपकर, अलग-अलग लोकेशनों से संचालित हो रही हैं. 

“व्हाइट कॉलर” सहयोगियों पर शिकंजा

जांच एजेंसियों को यह भी इनपुट मिला है कि गैंग का एक हिस्सा विदेशों, खासकर दुबई में सक्रिय हो सकता है. वहां से फंडिंग और नेटवर्किंग के जरिए स्थानीय स्तर पर गतिविधियों को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है. पुलिस के मुताबिक, शाइस्ता परवीन, जैनब और फरार आरोपी गुड्डू मुस्लिम के विदेश में होने की आशंका है. 

इससे यह संकेत मिलता है कि गैंग अब पारंपरिक गुंडागर्दी से आगे बढ़कर संगठित आर्थिक अपराध की दिशा में भी काम कर रहा है. रियल एस्टेट में निवेश, जमीन कब्जाने की कोशिश और निर्माण व्यवसाय में घुसपैठ इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. पुलिस के दावों के अनुसार, इस नेटवर्क के “व्हाइट कॉलर” सहयोगियों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है. इनमें प्रयागराज, लखनऊ और कानपुर के कई बिल्डर और कारोबारी शामिल हैं, जिनका नाम गैंग चार्ट में दर्ज है; इन लोगों की भूमिका सीधे अपराध में नहीं, बल्कि वित्तीय और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने में मानी जाती है. 

पुलिस मानती है कि जब तक इन सहयोगियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक गैंग की आर्थिक रीढ़ नहीं टूटेगी. इरफान की हत्या भी इसी बड़े संदर्भ में देखी जा रही है. वह खुद कभी अशरफ के करीबी रहे थे और वर्षों पहले उसकी गाड़ी चलाते थे. ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या यह हत्या पुरानी रंजिश का नतीजा है या फिर गैंग के भीतर चल रहे किसी आर्थिक या जमीन विवाद का हिस्सा.

अतीक के नाबालिग बेटों पर नजर 

पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है कि हत्या से पहले आसिफ दुर्रानी की तरफ से 50 हजार रुपए की उधारी वसूली क्या केवल संयोग थी या फिर फरारी की तैयारी का हिस्सा. यह छोटी सी रकम भी इस बात की ओर इशारा करती है कि गैंग के स्थानीय ऑपरेटर अपने स्तर पर संसाधन जुटाकर अपराध को अंजाम दे रहे हैं. 

पुलिस का एक बड़ा फोकस अतीक के परिवार पर भी है. खासकर उसके दो नाबालिग बेटे, अहजम और अबान, जो अक्टूबर 2023 में किशोर सुधार गृह से रिहा हुए थे. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उन्हें कौशांबी में रिश्तेदारों की निगरानी में रखा गया है, लेकिन पुलिस उनकी गतिविधियों, कॉल रिकॉर्ड और संपर्कों पर लगातार नजर रखे हुए है. अधिकारियों का मानना है कि गैंग की नई पीढ़ी को सक्रिय होने से रोकना बेहद जरूरी है. इसी तरह, अतीक के बड़े बेटे- मोहम्मद उमर और अली अभी भी जेल में हैं और कड़ी निगरानी में रखे गए हैं. पुलिस का कहना है कि जेल के भीतर से किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि या नेटवर्किंग को रोकने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. 

पुलिस के लिए चुनौती बने फरार अपराधी 

फरार आरोपियों की सूची भी इस नेटवर्क की जटिलता को दर्शाती है. गुड्डू मुस्लिम, अरमान और साबिर जैसे आरोपी तीन साल बाद भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. इनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हैं और संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी चल रही है. जानकारी के अनुसार, गुड्डू मुस्लिम के खिलाफ इंटरपोल नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है. 

इन सबके बीच, पुलिस का दावा है कि गैंग की कमर टूट चुकी है और अब जो घटनाएं सामने आ रही हैं, वे बिखरे हुए तत्वों की गतिविधियां हैं, न कि किसी संगठित कमांड के तहत हो रही कार्रवाई. लेकिन सवाल यह है कि अगर नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, तो फिर इतनी सटीक और संगठित वारदातें कैसे हो रही हैं? 

जानकार मानते हैं कि किसी भी बड़े आपराधिक गिरोह का असर उसके सरगना के खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक बना रहता है. इसकी वजह होती है उसका इकोसिस्टम- जिसमें आर्थिक नेटवर्क, राजनीतिक संपर्क और स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए ऑपरेटर शामिल होते हैं. अतीक गैंग भी इसी पैटर्न का उदाहरण नजर आता है.

प्रयागराज में जमीन से जुड़े विवादों की बढ़ती घटनाएं, सरकारी जमीनों पर कब्जे की कोशिशें और प्रॉपर्टी डीलरों के बीच बढ़ती हिंसा इस बात का संकेत हैं कि यह इकोसिस्टम अभी भी सक्रिय है. हालांकि यह पहले जैसा खुला और आक्रामक नहीं है, लेकिन इसका प्रभाव पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है. हाइकोर्ट के वरिष्ठ वकील रमेश राय बताते हैं, “पुलिस के लिए चुनौती यही है कि वह केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित न रहे, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को तोड़े जो इन अपराधों को संभव बनाता है. इसके लिए आर्थिक जांच, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय समन्वय, और स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र को मजबूत करना जरूरी होगा.”

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