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गुजरे जमाने के बाहुबली, नए जमाने की राजनीति में आने के लिए क्या-क्या कर रहे हैं?

आनंद मोहन, पप्पू यादव और अशोक महतो - गुजरे जमाने के ये तीनों दबंग राजनीति में बाहुबल का दौर खत्म होने के बाद अब नए सिरे से राजनीति में अपनी जगह तलाश रहे हैं

अशोक महतो ने 60 की उम्र में शादी की है, कहा जा रहा है कि उनकी पत्नी लोकसभा चुनाव लड़ेंगी
अपडेटेड 22 मार्च , 2024

इन दिनों बिहार में गुजरे जमाने के तीन बाहुबली दबंगों से जुड़ी तीन तसवीरें खूब चर्चा में हैं. पहली तसवीर में आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद जदयू की सदस्यता ले रही हैं. दूसरी में राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव एक अरसे बाद लालू यादव से मिलने गए हैं और लालू और तेजस्वी के सामने बैठकर बातें कर रहे हैं.

तीसरी तस्वीर लखीसराय के अशोक महतो की है, जिन्होंने 60 साल की उम्र में शादी रचा ली है. इनमें पहली दो तसवीर तो पॉलिटिकल हैं ही, तीसरी कुछ अजब-गजब पॉलिटिकल है क्योंकि अशोक महतो ने 60 साल की उम्र में बिना किसी लग्न मुहूर्त के खरमास में इसलिए शादी रचाई है, ताकि उनकी पत्नी को मुंगेर लोकसभा सीट से टिकट मिल जाए. 

ये तीनो बाहुबली बीसवीं सदी के आखिरी दशक में काफी चर्चित रहे हैं. इनके ऊपर हत्या समेत कई गंभीर आरोप लगे. एक अरसे तक तीनों जेल में भी रहे. यहां से बाहर निकले तो राजनीति में बाहुबल का जमाना उतार पर आ गया. मगर इन तीनों की राजनीतिक ख्वाहिशें कम होने का नाम नहीं ले रहीं. तीनों इस लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमाना चाहते हैं. इनमें से एक पप्पू यादव तो खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं, बाकी दो जो सजायाफ्ता हैं, अपनी बीवियों को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी में हैं. आइए, इनकी कहानी एक-एक कर जानते हैं.

आनंद मोहन : जिनकी रिहाई के लिए कानून बदला गया

90 के दशक के चर्चित बाहुबली राजनेता आनंद मोहन अपने जमाने में राजनीति में बाहुबल के पोस्टर ब्वाय हुआ करते थे. राइफल के साथ उनकी तसवीरें पत्रिकाओं के कवर पर छपती थीं. आनंद मोहन ने उस जमाने में बिहार पीपुल्स पार्टी नाम से एक राजनीतिक दल की स्थापना की थी और जनता दल समेत कई राजनीतिक पार्टियों का हिस्सा भी रहे. चुनाव लड़े और जीते भी. अपनी पत्नी लवली आनंद को भी राजनीति में उतारा. वे भी सफल रहीं. मगर 2007 में उन्हें एक आईएएस अधिकारी जी क़ृष्णैया की हत्या करने के जुर्म में सजा हुई और उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा. इस तरह उनका और उनके परिवार का राजनीतिक जीवन अधर में लटक गया. हालांकि राजद ने बाद में उनकी पत्नी लवली आनंद और बेटे चेतन आनंद को 2020 की बिहार विधानसभा का टिकट दिया था, जिसमें चेतन आनंद जीते भी. 

जदयू की सदस्यता ग्रहण करतीं आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद

मगर इस बाहुबली परिवार की नजदीकियां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बढ़ने लगीं. नीतीश ने आनंद मोहन को रिहा करने का सार्वजनिक वादा किया. उनकी रिहाई के लिए कानून में बदलाव किया और आखिरकार पिछले साल उनकी रिहाई हो गई. इस अहसान का बदला आनंद मोहन परिवार ने तब उतारा जब इस साल नीतीश कुमार ने राजद से अलग होकर भाजपा के साथ गठबंधन किया. आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद ने खुले आम राजद से बगावत कर विश्वास मत के दौरान नीतीश का साथ दिया. अब उनकी मां लवली आनंद जो सांसद और विधायक रह चुकी हैं, ने जदयू की सदस्यता ले ली है. शिवहर लोकसभा सीट से उनका चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है. 

लवली आनंद के लिए ही शिवहर की सीट भाजपा ने जदयू को दे दी, जबकि वहां से भाजपा नेता रमा देवी कई दफे सांसद रह चुकी हैं.  

तेजस्वी के उत्तराधिकार को खारिज करने वाले पप्पू यादव लालू की शरण में

आनंद मोहन के चिर-प्रतिद्वंदी माने जाने वाले बिहार के दूसरे चर्चित बाहुबली नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव भी इस लोकसभा चुनाव में ताल ठोकने की तैयारी में हैं. इस कोशिश में उन्होंने लालू और तेजस्वी के आगे एक तरह से समर्पण कर दिया है. एक जमाने में पप्पू यादव तेजस्वी पर हमलावर रहते थे. वे कहा करते थे कि बेटा होने से कोई कैसे उत्तराधिकारी हो सकता है. लालू के असल वारिस वे हैं और उन्हें ही उत्तराधिकारी बनाया जाना चाहिए. 

बिहार के कोसी अंचल में आनंद मोहन और पप्पू यादव एक जमाने में बाहुबल की राजनीति के दो प्रतिद्वंद्वी चेहरे हुआ करते थे. पप्पू यादव भी नब्बे के दशक में राजनीति में आ गए और पहले जनता दल, फिर राजद के साथ कई चुनाव लड़े और जीते. बीच में समाजवादी पार्टी के साथ भी रहे. पहले विधायक फिर सांसद बने. उन्होंने भी अपनी पत्नी रंजीत रंजन को राजनीति में उतारा. वे भी सफल रहीं और चुनाव जीतती रहीं. 

मगर फिर वामपंथी नेता अजीत सरकार की हत्या की साजिश होने के जुर्म में पप्पू को हुई सजा से उनके राजनीतिक करियर को बड़ा झटका लगा. वे लंबे समय के लिए जेल गए. हालांकि फिर आरोप मुक्त हुए और राजद के साथ राजनीति में उतरे भी. मगर 2015 के एक बयान ने इनके लिए राजनीति में मुश्किलें खड़ी कर दीं. बयान वही जिसका हमने ऊपर जिक्र किया है.

एक अरसे बाद लालू और तेजस्वी से मिलने पहुंचे पप्पू यादव

इसके बाद उन्होंने राजद से किनारा किया और अपना दल जनाधिकार पार्टी बनाया. इस पार्टी के जरिये उन्होंने कोसी-सीमांचल के दायरे से निकलकर पूरे बिहार में छाने की कोशिश की. मगर लगातार आठ साल तक कोशिश करने के बावजूद वे इसे एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल के रूप में स्थापित करने में असफल रहे. दोनों प्रमुख गठबंधनों में से किसी ने इन्हें अपने पाले में आने का न्योता नहीं दिया. 

आखिरकार इन्हें फिर उन्हीं लालू और तेजस्वी की शरण में जाना पड़ा, जिनसे विद्रोह कर उन्होंने अपनी पार्टी बनाई थी. हालांकि उन्होंने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस के साथ किया है, जिस कांग्रेस के साथ उनकी पत्नी लंबे अरसे से हैं. वे पहले सुपौल से सांसद रहीं और अब छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सदस्य हैं. 

ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस पप्पू यादव को पूर्णिया लोकसभा सीट से चुनाव लड़वा सकती है, जहां से वे पहले भी सांसद रह चुके हैं. हाल में उन्होंने पूर्णिया में एक बड़ी रैली आयोजित कर लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है.

खाकी के विलेन, चुनाव लड़ने के लिए कर ली शादी

अब सबसे दिलचस्प कहानी अशोक महतो की, जिन्होंने सिर्फ लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए शादी कर ली है. अशोक महतो भी नब्बे के दशक और बीसवीं सदी के पहले दशक में काफी चर्चित रहे हैं. इन पर जेल ब्रेक, सांसद राजो महतो की हत्या समेत कई संगीन आरोप रहे. सजा भी मिली. इनकी गिरफ्तारी पर गिरफ्तार करने वाले आईपीएस अमित लोढ़ा ने 'बिहार डायरीज' नाम से किताब लिखी, जिस पर बाद में 'खाकी' के नाम से वेब सीरीज बनी, जो काफी चर्चित रही. अशोक महतो 17 साल जेल की सजा काटने के बाद नवंबर, 2023 में रिहा हुए और इसके बाद इनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जोर मारने लगी.  

कहा जाता है कि पिछले साल नवंबर में जेल से छूटे अशोक महतो ने राजद सुप्रीमो लालू यादव से टिकट का अनुरोध किया था, तब राजद नेता ने कहा था, "शादी करके आओ, तो टिकट दे देंगे." सजायाफ्ता अशोक महतो खुद चुनाव नहीं लड़ सकते थे, इसलिए उन्होंने झटपट शादी कर ली और आशीर्वाद लेने लालू के दरबार पहुंच गए. माना जा रहा है कि राजद अशोक महतो की पत्नी को मुंगेर लोकसभा सीट से टिकट दे सकती है. मुंगेर से इस वक्त जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह सांसद हैं. 

सजायाफ्ता होने के कारण अशोक खुद चुनाव नहीं लड़ सकते, इसलिए उन्होंने यह शादी की है. उनकी पत्नी अनीता 45 साल की हैं. बताया जाता है कि वे दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम करती हैं. आनंद मोहन की तरह अशोक भी अपनी पत्नी के सहारे इस लोकसभा चुनाव में अपनी भागीदारी करना चाहते हैं. 

चुनाव के लिए शादी करना बिहार में कोई नया मामला नहीं है. पंचायती राज चुनाव में ऐसे मामले खूब सुनने को आते हैं. 2011 में इसी तरह सीवान के बाहुबली अजय सिंह ने विधायकी के लिए शादी कर ली थी. उनकी मां जगमातो देवी विधायक थीं. उनके निधन के बाद अजय सिंह जब नीतीश से खुद के लिए टिकट मांगने गये तो नीतीश ने उनकी आपराधिक छवि को देखते हुए टिकट देने से मना कर दिया और यह संकेत दिया था कि वे अगर शादी कर लें तो उनकी पत्नी को टिकट दिया जा सकता है. ऐसे में अजय सिंह ने भी इसी तरह बिना लग्न मुहूर्त के शादी कर ली. उनकी पत्नी कविता सिंह को विधायकी का टिकट मिला. फिर 2019 में कविता सिंह सीवान से लोकसभा सांसद भी बनी. हालांकि इस बार इनका टिकट कटने की संभावना जताई जा रही है.  

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