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चिंताजनक समस्या है 'अकेलापन', रोज पंद्रह सिगरेट पीने जितना खतरनाक: WHO

एक दिन में 15 सिगरेट पीने से हमारे सेहत को जितना नुकसान होगा उतना ही नुकसान अकेलेपन से होता है

Loneliness से बचाव के लिए WHO ने अंतरराष्ट्रीय आयोग गठित किया है. (फोटो: Getty)
Loneliness से बचाव के लिए WHO ने अंतरराष्ट्रीय आयोग गठित किया है. (फोटो: Getty)
अपडेटेड 17 नवंबर , 2023

कोरोना संक्रमण के दौर में ‘सोशल डिस्टेंस’ टर्म पर खूब चर्चा हुई. भारत में कोरोना से बचाव के प्रमुख उपायों में से एक था सोशल डिस्टेंसिंग. जिसका शाब्दिक अर्थ निकलता है 'सामाजिक दूरी.' भाषा के जानकारों के बीच इस टर्म को लेकर बहस छिड़ी कि सामाजिक दूरी के बजाय क्यों न 'शारीरिक दूरी' का इस्तेमाल किया जाए. क्योंकि जब हम सामाजिक दूरी कहते हैं तो इसका सीधा अर्थ निकलता है- समाज से दूर. इस अर्थ में समाज को लेकर एक तरह की नेगेटिविटी का भाव है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने अब 'सोशल कनेक्शन' और 'अकेलेपन' को लेकर एक रिपोर्ट पेश की है. साथ ही इसे पूरी दुनिया में सेहत पर खतरा (Health Threat) बताया है. WHO के मुताबिक दुनियाभर के देशों की आबादी के लिए अकेलापन एक गंभीर खतरे के रूप में उभरा है. इस एक वजह से इंसान को अलग-अलग तरह की बीमारियां हो रही हैं. 

इस समस्या से निपटने के लिए WHO ने एक अंतरराष्ट्रीय आयोग गठित किया है. अमेरिकी सर्जन जनरल डॉ. विवेक मूर्ति और अफ्रीकी संघ के प्रतिनिधि चिडो मपेम्बा करेंगे. मपेम्बा इस बारे में कहते हैं, "अकेलेपन की समस्या किसी खास तरह के देशों में नहीं है बल्कि ये सीमाओं को लांघकर पूरी दुनिया में फैल गई है. ये एक वैश्विक स्वास्थ्य चिंता के तौर पर उभर रही है जो हमारे विकास के हर पहलू को प्रभावित करने लगी है." मपेम्बा बताते हैं कि सामाजिक अलगाव की कोई उम्र नहीं है. ये हर उम्र के लोगों में देखने को मिल रहा है.    

WHO ने 'Our Epidemic of Loneliness and Isolation' नाम से पब्लिश अपनी रिपोर्ट में अकेलेपन के खतरे की तुलना सिगरेट पीने से की है. दावा है कि एक दिन में 15 सिगरेट पीने से हमारे सेहत को जितना नुकसान होगा उतना ही नुकसान अकेलेपन से होता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी वजह से स्ट्रोक, चिंता, तनाव, डिमेंशिया जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं. अंतत: ये बीमारियां सुसाइड की प्रवृत्ति बढ़ा रही हैं.

व्यस्कों और युवाओं पर अकेलेपन का असर अलग-अलग ढंग से हो रहा है. व्यस्कों में इसकी वजह से डिमेंशिया का रिस्क 50 फीसदी तक बढ़ जाता है और स्ट्रोक का खतरा 30 प्रतिशत बढ़ता है. वहीं युवाओं में अकेलेपन की वजह से तनाव की समस्या ज्यादा पैदा हो रही है.

इस गंभीर समस्या से उबरने के क्या रास्ते हो सकते हैं? इसी सवाल के जवाब की तलाश करेगा WHO का इंटरनेशनल कमीशन. जिसमें कुल 11 सदस्य शामिल हैं. 3 साल तक ये आयोग अलग-अलग देशों और आबादी की विविधता के हिसाब से इस समस्या पर रिसर्च करेगी. लेकिन आयोग का सबसे प्रमुख कार्य होगा 'सोशल कनेक्शन' डेवलप करना. (सोशल कनेक्शन यानी किसी व्यक्ति के जान-पहचान की विविधता. अलग-अलग कार्य क्षेत्रों के लोगों से लगाव और उनका पॉजिटिव-नेगेटिव प्रभाव.)

समाधान क्या है?

आईआईटी पटना में साइकोलॉजिस्ट आदित्य साहू ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा, "पहले तो हमें अकेलेपन को समझने की जरूरत है. अकेलापन का मतलब सिर्फ घर वालों से दूर होना नहीं है. कई बार आप घर-परिवार के साथ रहते हुए भी ऐसा महसूस कर सकते हैं. इसका मतलब है कि समाज में अलग-अलग तरह के लोगों से जो हमारे दोस्त हो सकते हैं, सहकर्मी हो सकते हैं, के साथ जुड़ाव ना होना."

आदित्य मानते हैं, "कोविड के दौरान जो दो साल गुजरे उसने इस समस्या को बढ़ावा दिया. लोग अपने घरों में कैद थे. उसी दौरान वर्क फ्रॉम होम का कल्चर तेजी से बढ़ा, ऑनलाइन क्लास चलने लगीं. बच्चों से लेकर बड़ों तक- सभी घर में ही रहने लगे. इससे हमारे सोशल कनेक्शन खत्म हुए. पहले लोग सुबह-शाम पड़ोसियों से, दोस्तों से मिलते-जुलते थे. इस एक्टिविटी में कोरोना के बाद कमी देखी जा रही है. जिससे अकेलापन हावी हो रहा है."

अकेलेपन से निपटें कैसे, इस सवाल के जवाब में वो कहते हैं, "समाधान के लिए समस्या को ठीक से एड्रेस करना जरूरी है. अकेलापन हमारे शरीर में छोटे से लेकर किसी गंभीर बीमारी तक का कारण हो सकता है. क्योंकि इसका सीधा संबंध हमारे दिमाग से है. दिमाग में किसी तरह के डिसऑर्डर से शरीर का लगभग हर भाग प्रभावित हो जाता है." आदित्य समाधान को दो भागों में बांटकर बताते हैंछ

पहला- अगर हम अकेलेपन से जुझ रहे हैं, तनाव में हैं तो मेडिटेशन करना चाहिए. म्यूजिक एक अच्छा उपाय हो सकता है. घर से बाहर निकलें और दोस्तों से मुलाकात करें.

दूसरा- अगर कोई व्यक्ति ठीक है और इस समस्या की चपेट से बचना चाहता है तो खुद को घर में कैद करने से बचें. परिवार से दूर हैं तो उनसे नियमित बातचीत करते रहें. दोस्तों से मुलाकात करते रहें. अपने क्षेत्र से अलहदा लोगों से मेल-जोल बढ़ाएं. यानी संवाद ही है सबसे कारगर समाधान.

अकेलेपन का हमारी जिंदगी पर खतरनाक असर देखा जा रहा है. रिसर्च में इसकी वजह से कई तरह की बीमारियों के होने की पुष्टि हो रही है. ऐसे में जरूरी है कि इमोशनल डिस्टेंसिंग को दरकिनार किया जाए.

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