1 दिसंबर 2025 को भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने सभी मोबाइल कंपनियों को निर्देश जारी कर कहा कि मार्च 2026 से बेचे जाने वाले नए मोबाइल फोन में संचार साथी ऐप को प्री-इंस्टॉल करें, ताकि इसे डिसेबल या अनइंस्टॉल न किया जा सके.
इस बात के सामने आते ही विवाद शुरू हो गया, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस पर सफाई दी. उन्होंने कहा, "संचार साथी ऐप को एक्टिव करना पूरी तरह से वैकल्पिक है और यह अनिवार्य नहीं है."
लेकिन, क्या आपको पता है कि संचार साथी ऐप क्या है और इसकी तुलना इजरायली जासूसी ऐप पेगासस से क्यों की जा रही है?
इस स्टोरी में एक-एक कर इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं-
संचार साथी ऐप क्या है?
सरकार दावा करती है कि संचार साथी ऐप एक तरह का साइबर सिक्योरिटी टूल है. इसे भारत सरकार के दूरसंचार विभाग ने किसी फोन डिवाइस को ब्लॉक करने, फ्रॉड कॉल्स आदि पर रोक लगाने के लिए डिजाइन किया है.
इसे एंड्रॉयड और iOS दोनों तरह के फोन में इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसा दावा किया जाता है कि सरकार ने इस ऐप को सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर यानी सीईआईआर केंद्रीय डेटाबेस से जोड़ रखा है, जहां देश के हर मोबाइल फोन का IMEI नंबर दर्ज रहता है.
IMEI का फुल फॉर्म "इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी" है. यह एक यूनिक 15-अंकीय सीरियल नंबर है, जो हर मोबाइल डिवाइस की पहचान करता है.
क्या यह ऐप पुराने फोन में इंस्टाल होगा?
हां, अपने पहले के प्रेस नोट में सरकार ने कहा था कि भारत के सभी फोन में संचार साथी ऐप इंस्टाल हों. इसमें नए और पुराने सभी फोन शामिल हैं. सरकार ने कंपनियों को पत्र लिखकर कहा था, "सुनिश्चित करें कि भारत में उपयोग के लिए बनाए जा रहे या बाहर से लाए जा रहे सभी मोबाइल हैंडसेट में संचार साथी मोबाइल एप्लिकेशन पहले से इंस्टॉल हो." हालांकि, अब केंद्र सरकार के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि इसे इंस्टाल करना वैकल्पिक होगा.
सिंधिया ने कहा, "अगर आप चाहें तो इसे एक्टिवेट कर सकते हैं; अगर नहीं, तो इसे एक्टिवेट न करें... अगर आप संचार साथी नहीं चाहते, तो इसे डिलीट कर सकते हैं. यह अनिवार्य नहीं है. यह वैकल्पिक है."
सरकार ऐसा क्यों करना चाहती है?
अपने आदेश में मंत्रालय ने कथित तौर पर इस फैसले को दूरसंचार से जुड़े साइबर खतरों, खासकर नकली या नकली IMEI नंबरों, में बढ़ोतरी से जोड़ा था. पीआईबी नोट में कहा गया था कि, "नागरिकों को नकली हैंडसेट खरीदने से बचाने और फोन के जरिए होने वाले गैरकानूनी और संदिग्ध कामों को ट्रेस कर उन्हें आसानी से रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है."
सरकार का दावा है कि ऐप का इस्तेमाल चोरी हुए फोन को ब्लॉक करने, आईएमईआई असली है या नहीं- इसे सुनिश्चित करने और स्पैम कॉल को रिपोर्ट करने के लिए किया जाता है. सरकार का कहना है कि इस ऐप के कारण 37 लाख से अधिक चोरी या खोये हुए मोबाइल हैंडसेट को सफलतापूर्वक ब्लॉक किया गया है.
संचार साथी ऐप को पेगासस क्यों बताया जा रहा है?
पेगासस एक विशेष स्पाइवेयर (जासूसी सॉफ्टवेयर) है, जो फोन पर लगभग सब कुछ रिकॉर्ड कर सकता है. अब इजरायल की साइबर सिक्योरिटी कंपनी के बनाए इस पेगासस से तुलना संचार साथी ऐप की हो रही है.
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सरकार के संचार साथी ऐप इंस्टाल करने के फैसले पर कहा, "यह पेगासस प्लस प्लस है. बिग ब्रदर हमारे फोन और लगभग हमारी पूरी निजी जिंदगी पर कब्जा कर लेगा." कार्ति ऐसा कहने वाले अकेले नहीं है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पेगासस ट्रेंड करने लगा है. संचार साथी को पेगासस करने की एक बड़ी वजह यह है कि यह फोन में स्थाई तौर पर रहने वाला एक ऐप होगा, जिसके जरिए सरकार के पास हर तरह का डेटा पहुंचेगा.
संचार साथी ऐप का विरोध क्यों हो रहा है?
कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए इन दिशा निर्देशों को तत्काल वापस करने की मांग की है. कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि निजता का अधिकार संविधान में दिया गया मूलभूत अधिकार है और ये दिशा निर्देश इसकी अवहेलना करते हैं.
उन्होंने कहा कि निजता का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का एक अभिन्न अंग है. सरकार संचार साथी ऐप के जरिए उसका उल्लंघन कर रहा है.
वहीं, राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने इस आदेश को निजता और आजादी पर एक जबरदस्त हमला बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा है, "हर नए फोन में इसे पहले से इंस्टॉल करके, हमें ऐप अनइंस्टॉल करने की इजाज़त न देकर, 'सुरक्षा' की आड़ में, सरकार के पास हमारे कॉल, टेक्स्ट और लोकेशन की जासूसी करने की क्षमता हो जाएगी. यह निगरानी का सबसे बुरा रूप है."
संचार साथी ऐप के मामले में बैकफुट पर क्यों आई मोदी सरकार?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के निर्देश से लोगों के बीच निजता संबंधी चिंताएं और राज्य की निगरानी की आशंकाएं पैदा हो गई हैं. ऐसे में सरकार ने इसके इस्तेमाल को वैकल्पिक रखने का फैसला लिया है. केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य द्वारा विकसित इस साइबर सुरक्षा ऐप में किसी भी तरह की जासूसी या कॉल मॉनिटरिंग शामिल नहीं है.

