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BJP अध्यक्ष नितिन नबीन के शुरुआती कदम पार्टी की किस रणनीति का खुलासा करते हैं?

BJP निगम चुनावों में महाराष्ट्र मॉडल को अन्य राज्यों में दोहराने की तैयारी कर रही है और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की इस पर खास नजर है

nitin nabin pm modi
नितिन नबीन पीएम मोदी के साथ (फाइल फोटो)
अपडेटेड 23 जनवरी , 2026

महाराष्ट्र के निगम चुनावों में मिली सफलता के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) दूसरे राज्यों के निगम चुनावों को पहले के मुकाबले अधिक संगठित ढंग से लड़ने की योजना पर काम कर रही है. BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने बतौर अध्यक्ष अपने कार्यकाल के दूसरे दिन ही दो नगर निगम चुनावों के लिए पार्टी के प्रमुख नेताओं को प्रभारी बनाया है.

ग्रेटर बेंगलुरु निगम चुनावों के लिए पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव को प्रभारी बनाया गया है. उनके साथ राजस्थान के वरिष्ठ पार्टी नेता सतीश पूनिया को सह प्रभारी बनाया गया है. वहीं तेलंगाना में होने वाले निगम चुनावों के लिए महाराष्ट्र के प्रमुख BJP नेता आशीष शेलार को प्रभारी बनाया गया है.

इसके साथ ही 29 जनवरी को चंडीगढ़ में होने वाले मेयर चुनाव के लिए पर्यवेक्षक के तौर पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े की नियुक्ति की गई है.

इन फैसलों से साफ है कि BJP न सिर्फ निगम चुनावों को बहुत गंभीरता से ले रही है बल्कि शहरी मतदाताओं को नए सिरे से लुभाने और शहरी क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत बनाने की योजना पर भी जोर दे रही है. 

दरअसल, महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में मिली शानदार सफलता ने BJP को नए जोश से भर दिया है. पार्टी अब अन्य राज्यों के निगम चुनावों को पहले से कहीं अधिक संगठित और रणनीतिक ढंग से लड़ने की योजना बना रही है. महाराष्ट्र की जीत ने पार्टी को यह विश्वास दिलाया है कि सही रणनीति से निगम चुनाव विधानसभा और लोकसभा चुनावों की नींव रख सकते हैं.

महाराष्ट्र के हालिया नगर निगम चुनावों में BJP ने जबर्दस्त प्रदर्शन किया. मुंबई, पुणे, नागपुर और अन्य प्रमुख शहरों में पार्टी ने बड़ी संख्या में सीटें जीतीं. कुल 29 शहरों में से 25 शहरों में BJP या तो अपने दम पर या अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जादुई आंकड़ा हासिल करने में कामयाब रही है. इनमें से अधिकांश ऐसे शहरी क्षेत्र हैं जिन्हें पहले शिवसेना और एनसीपी का गढ़ माना जाता था. मुंबई नगर निगम में BJP ने 100 से ज्यादा सीटें हासिल कीं, जबकि पुणे में गठबंधन के साथ मिलकर सत्ता हासिल करने में  कामयाब रही.

इस जीत के पीछे पार्टी की जमीनी रणनीति को श्रेय दिया जा रहा है. बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों जैसे पानी, सड़क और सफाई पर फोकस और शहरी युवाओं को जोड़ने के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल BJP को इन निगम चुनावों में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. महाराष्ट्र में पार्टी की इस कामयाबी पर BJP के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी कहते हैं, ''यह जीत शहरी भारत में BJP की बढ़ती ताकत का प्रमाण है. हमने साबित किया कि विकास की राजनीति जाति और धर्म से ऊपर है."

इस सफलता को BJP के लिए एक सबक भी माना जा रहा है. 2024 के लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में सीटें घटने के बाद पार्टी ने स्थानीय चुनावों पर फोकस बढ़ाया था. इसका परिणाम यह हुआ कि पार्टी को बेहतर नतीजे मिले. निगम चुनावों ने पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया और विपक्ष को बैकफुट पर धकेलने का काम किया है.

अब यही मॉडल अन्य राज्यों में दोहराने की तैयारी हो रही है. पार्टी सूत्र बताते हैं कि महाराष्ट्र में इस्तेमाल की गई रणनीतियों को अब राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की योजना बन रही है. इनमें वॉर्ड स्तर पर माइक्रो-मैनेजमेंट, लाभार्थी संपर्क और स्थानीय नेताओं को आगे करने जैसे उपाय शामिल हैं.

ऐसे में जब नितिन नबीन BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए तो सबकी नजरें इस बात पर थी कि शुरुआती निर्णय वे क्या लेते हैं. उन्होंने अपने कार्यकाल के दूसरे दिन ही दो महत्वपूर्ण निगम चुनावों के लिए प्रभारी नियुक्त कर साफ कर दिया कि स्थानीय निकायों के चुनाव पार्टी की प्राथमिकता में शीर्ष पर हैं.

ग्रेटर बेंगलुरु नगर निगम चुनावों के लिए प्रभारी के तौर पर राम माधव की नियुक्ति को रणनीतिक माना जा रहा है. राम माधव पूर्वोत्तर के राज्यों और जम्मू कश्मीर में पार्टी की मजबूती के लिए जाने जाते हैं. पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि अब दक्षिण भारत में बेंगलुरु जैसे हाई-टेक शहर में उनकी भूमिका शहरी युवाओं और आईटी प्रोफेशनल्स को जोड़ने में कारगर साबित हो सकती है.

वहीं उनके सह प्रभारी सतीश पूनिया की पहचान राजस्थान में संगठन को मजबूत करने वाले नेता के तौर पर रही है. वे ग्रेटर बेंगलुरु नगर निगम चुनावों में सह-प्रभारी के रूप में जमीनी काम संभालेंगे.

दूसरी तरफ तेलंगाना के निगम चुनावों के लिए आशीष शेलार की नियुक्ति महाराष्ट्र कनेक्शन को दिखा रही है. शेलार मुंबई में BJP की सफलता के सूत्रधारों में एक रहे हैं. अब नए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन्हें तेलंगाना के हैदराबाद समेत दूसरे शहरी क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत करने का जिम्मा दिया है. BJP के लिए तेलंगाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पहले भी निगम चुनावों और विधानसभा चुनावों में थोड़ा बेहतर प्रदर्शन कर चुकी है. लेकिन इस बार पार्टी की कोशिश निगम चुनावों में सिर्फ बेहतर प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि वह अपनी निर्णायक भूमिका हासिल करने के लिए काम करेगी.

ये नियुक्तियां दिखाती हैं कि BJP निगम चुनावों को सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा मान रही है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता इस बारे में कहते हैं, ''नितिन जी का संदेश साफ है कि निगम चुनाव विधानसभा की राह बनाते हैं. हमें शहरी वोट बैंक को मजबूत करना है.''

अब ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि BJP के लिए शहरी मतदाताओं पर फोकस करना क्यों जरूरी है? दरअसल, भारत में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है. अनुमान है कि 2030 तक देश की तकरीबन 40 फीसदी आबादी शहरों में होगी. BJP पारंपरिक तौर पर शहरी क्षेत्रों में मजबूत रही है. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के कुछ शहरी सीटों पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिले थे. ऐसे में पार्टी शहरी क्षेत्रों पर फिर से अपनी पकड़ मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है.

दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहरी मतदाता अलग मुद्दों पर वोट करते हैं. इनके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रैफिक, प्रदूषण, रोजगार जैसे मुद्दे जाति की राजनीति से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं. महाराष्ट्र में BJP ने इन्हीं मुद्दों पर फोकस करके सफलता पाई. अब यही फॉर्मूला बेंगलुरू और तेलंगाना में आजमाने की तैयारी है.

BJP की योजना है कि शहरी महिलाओं, युवाओं और मध्यम वर्ग को लाभार्थी योजनाओं से जोड़ा जाए और उनके बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की लिए काम किया जाए. आने वाले दिनों में दोनों जगह उज्ज्वला, आयुष्मान भारत और स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं के लाभार्थियों के साथ पार्टी कार्यकर्ता बैठकें करते हुए दिख सकते हैं.

पार्टी की योजना है कि हर निगम चुनाव में केंद्रीय नेता प्रभारी बनें. इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि इससे स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सकेगा और राष्ट्रीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार चुनावी लाभ के लिए स्थानीय स्तर पर किया जा सकेगा.

हालांकि, बेंगलुरु की राह BJP के लिए आसान नहीं होने वाली है. कर्नाटक में कांग्रेस सत्ता में है. इसलिए यहां कांग्रेस से BJP को कड़ी चुनौती मिलेगी. वहीं तेलंगाना में संभावना है कि भारतीय राष्ट्र समिति और कांग्रेस का गठबंधन BJP को चुनौती देगा.

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