
अयोध्या से सटे गोंडा जिले की चिलचिलाती गर्मी, उमस से भरा वातावरण और बार-बार गुल हो रही बिजली के बीच नंदिनी नगर महाविद्यालय का परिसर इन दिनों भारतीय कुश्ती की सबसे बड़ी बहस का केंद्र बना हुआ था. जहां कभी छात्रों की आवाजाही रहती थी, वहां अब कुश्ती के मैट बिछे थे और देशभर से आए सैकड़ों पहलवान अपने मुकाबलों का इंतज़ार कर रहे थे.
लेकिन इस पूरे माहौल में एक नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा था- विनेश फोगाट. सीनियर ओपन रैंकिंग सीरीज़ टूर्नामेंट औपचारिक रूप से एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता थी लेकिन खिलाड़ियों और कोचों के बीच यह समझ साफ थी कि यह सिर्फ मेडल जीतने का मंच नहीं बल्कि राष्ट्रीय कैंप और आगे विश्व चैंपियनशिप के चयन की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव है.
ऐसे में विनेश की वापसी अपने आप में एक बड़ी खबर थी. पेरिस ओलंपिक के बाद संन्यास की घोषणा करने वाली भारत की सबसे चर्चित पहलवान अचानक फिर मैट पर लौटना चाहती थीं. वह भी मां बनने के बाद, लेकिन उनकी यह वापसी मुकाबलों से ज्यादा विवादों में बदल गई.
गोंडा पहुंचीं लेकिन मैट तक नहीं पहुंच सकीं
11 मई को सीनियर ओपन रैंकिंग सीरीज़ टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहे गोंडा जिला पहुंचने के बाद विनेश को उम्मीद थी कि वे 57 किलोग्राम वर्ग में मुकाबला करेंगी. लेकिन आयोजन स्थल पर पहुंचते ही उन्हें बताया गया कि वे प्रतियोगिता के लिए पात्र नहीं हैं. आरोप था कि उन्होंने संन्यास के बाद वापसी से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया और डोपिंग निगरानी से संबंधित ‘वेयरअबाउट्स’ नियमों का उल्लंघन किया.
विनेश को न केवल सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने से रोका गया बल्कि उन्हें प्रशिक्षण हॉल के इस्तेमाल की भी अनुमति नहीं मिली. यह सब तब हुआ जब देशभर से आई महिला पहलवानें उसी परिसर में अपने मुकाबलों की तैयारी कर रही थीं. बाद में सोशल मीडिया पर विनेश ने लिखा कि उन्हें किसी विशेष सुविधा की जरूरत नहीं है और वे सिर्फ अपनी योग्यता के आधार पर प्रतिस्पर्धा करना चाहती हैं. लेकिन मामला अब सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहा था. यह भारतीय कुश्ती महासंघ और देश की सबसे चर्चित महिला पहलवान के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका था.
मातृत्व के बाद वापसी पर बंटी कुश्ती दुनिया
गोंडा में मौजूद कई महिला पहलवानों के बीच यह चर्चा लगातार चलती रही कि आखिर विनेश को मौका क्यों नहीं दिया गया. कुछ खिलाड़ियों को लगा कि महासंघ ने देश की एक दिग्गज खिलाड़ी के साथ संवेदनशील व्यवहार नहीं किया. खासकर इसलिए क्योंकि वे मां बनने के बाद वापसी की कोशिश कर रही थीं. साक्षी मलिक सबसे मुखर समर्थन में नजर आईं. जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान विनेश के साथ खड़ी रहीं साक्षी ने कहा कि भारतीय खेल व्यवस्था को यह संदेश देना चाहिए कि महिलाएं मां बनने के बाद भी अपने करियर में वापसी कर सकती हैं.

साक्षी ने प्रधानमंत्री से दखल की अपील तक कर डाली. साक्षी ने कहा कि दुनिया के कई देशों में खेल महासंघ अपने खिलाड़ियों की वापसी को आसान बनाते हैं जबकि भारत में नियमों को अचानक लागू कर खिलाड़ियों को बाहर किया जा रहा है. उनके मुताबिक, यह सिर्फ विनेश का मामला नहीं बल्कि महिला खिलाड़ियों के लिए एक व्यापक संदेश का सवाल है. मेरठ में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात एक महिला पहलवान ने माना कि अगर मुकाबला होता तो वह बेहद रोमांचक होता. दिल्ली की युवा पहलवान श्रुति ने भी कहा कि विनेश देश के लिए बहुत कुछ कर चुकी हैं और कम से कम सम्मानजनक व्यवहार की हकदार हैं.
हालांकि सभी खिलाड़ी विनेश के समर्थन में नहीं थे. हरियाणा के बलाली गांव की पहलवान पूजा, जो कभी महावीर फोगाट के अखाड़े में विनेश के साथ अभ्यास कर चुकी हैं, ने कहा कि व्यक्तिगत रिश्ते नियमों से ऊपर नहीं हो सकते. पूजा के मुताबिक, संन्यास से लौटने वाले खिलाड़ी को छह महीने पहले सूचना देना और डोप टेस्ट के लिए उपलब्ध रहना जरूरी होता है. उनका कहना था कि अगर नियमों में छूट दी गई तो बाकी खिलाड़ियों के साथ अन्याय होगा. 53 किलोग्राम वर्ग की पहलवान निशु ने भी महासंघ के फैसले को सही बताया. उनके अनुसार, अगर कोई खिलाड़ी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं करता तो उसे प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेने दिया जाना चाहिए. यही वह बिंदु है जहां यह विवाद भावनाओं और नियमों के बीच फंस गया है. एक पक्ष इसे मातृत्व के बाद संघर्ष करती महिला खिलाड़ी की वापसी मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे प्रक्रिया और अनुशासन का मामला बता रहा है.
विवाद की जड़ पेरिस ओलंपिक में
यह पूरा विवाद दरअसल 2024 के पेरिस ओलंपिक से शुरू हुआ. महिलाओं के 50 किलोग्राम वर्ग के फाइनल से पहले विनेश निर्धारित वजन सीमा से अधिक पाई गईं और उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया. यह भारतीय खेल इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में गिना गया, क्योंकि वे गोल्ड मेडल मुकाबले तक पहुंच चुकी थीं. अगले ही दिन उन्होंने संन्यास की घोषणा कर दी.
लेकिन बाद में यह विवाद पैदा हुआ कि क्या उनका संन्यास आधिकारिक रूप से दर्ज हुआ था या नहीं. भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) का कहना है कि यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग और इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी को उनके संन्यास की सूचना दी गई थी. वहीं विनेश के पति और समर्थकों का दावा है कि कोई औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी. दिसंबर 2025 में विनेश ने वापसी का फैसला किया और यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW), भारतीय खेल प्राधिकरण और WFI को इसकी जानकारी दी. यहीं से नया टकराव शुरू हुआ.
डोपिंग नियम और ‘वेयरअबाउट्स’ विवाद
भारतीय कुश्ती महासंघ ने आरोप लगाया कि विनेश ने डोपिंग निगरानी से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया. विशेष रूप से 18 दिसंबर 2025 की एक ‘वेयरअबाउट्स’ फाइलिंग मिस होने को गंभीर मुद्दा बनाया गया. डोपिंग निगरानी प्रणाली के तहत खिलाड़ियों को हर समय अपनी लोकेशन अपडेट रखनी होती है ताकि किसी भी समय उनका टेस्ट किया जा सके. लगातार उल्लंघन को गंभीर माना जाता है.
विनेश ने कहा कि उस समय वे मां बन चुकी थीं और विधायक होने के कारण विधानसभा की बैठकों में व्यस्त थीं. उनके मुताबिक, जानकारी देना उनसे छूट गया था लेकिन बाद में उन्होंने वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी यानी वाडा से माफी मांगी और उन्हें क्लीन चिट भी मिल गई. उन्होंने दावा किया कि वापसी की घोषणा के बाद उनके कई डोप टेस्ट हुए और हर बार वह क्लीन पाई गईं.

विनेश का तर्क है कि अगर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां उन्हें प्रतियोगिता के योग्य मान चुकी हैं तो भारतीय महासंघ उन्हें रोक कैसे सकता है. मामले ने तब और तूल पकड़ा जब यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के अध्यक्ष नेनाद लालोविक की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया कि राष्ट्रीय कुश्ती महासंघ को अपने स्तर पर कार्रवाई करने का अधिकार है. इसका मतलब यह था कि भले ही अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां विनेश को पात्र मानें लेकिन घरेलू प्रतियोगिताओं में अंतिम फैसला भारतीय कुश्ती महासंघ यानी WFI का होगा.
इसके जवाब में विनेश ने इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी का एक ईमेल सार्वजनिक किया, जिसमें कहा गया था कि वे 1 जनवरी 2026 से प्रतियोगिता में वापसी के लिए पात्र हैं. यहीं से विवाद और उलझ गया. एक तरफ अंतरराष्ट्रीय मंजूरी, दूसरी तरफ घरेलू प्रतिबंध. WFI ने उन्हें 26 जून 2026 तक प्रतियोगिताओं से दूर रखने का फैसला सुनाया. महासंघ का कहना है कि अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी होने तक वह घरेलू स्तर पर पात्र नहीं मानी जाएंगी.
क्या यह सिर्फ नियमों का मामला है?
विनेश और उनके समर्थकों का मानना है कि मामला सिर्फ नियमों का नहीं है. उनका आरोप है कि महासंघ उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर कुश्ती छोड़ने पर मजबूर करना चाहता है. विनेश ने कारण बताओ नोटिस के समय पर भी सवाल उठाए. उनके मुताबिक, नोटिस शुक्रवार रात को भेजा गया ताकि वीकेंड में अदालतों का सहारा लेना मुश्किल हो जाए. उन्होंने इसे ‘पूर्व नियोजित साजिश’ बताया.
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में भारतीय कुश्ती का वह बड़ा संघर्ष भी मौजूद है, जो 2023 में जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था. उसी आंदोलन में विनेश, साक्षी मलिक और कई अन्य महिला पहलवानों ने तत्कालीन WFI प्रमुख ब्रजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. दिलचस्प बात यह रही कि गोंडा टूर्नामेंट के दौरान भले ही बृजभूषण आयोजन स्थल पर मौजूद नहीं थे, लेकिन उनकी राजनीतिक और संगठनात्मक मौजूदगी लगातार महसूस की जा रही थी. उसी समय दिल्ली की साउथ एवेन्यू कोर्ट में उनसे जुड़े मामले की सुनवाई भी चल रही थी.

