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वैष्णो देवी मंदिर के चढ़ावे में कैसे आई मिलावटी चांदी?

मंदिर ने 20 टन चांदी के सिक्के और आभूषण गलाने और भंडारण के लिए भेजे तो पता चला कि इसमें सिर्फ 5-6 फीसदी ही शुद्ध चांदी है

वैष्णो देवी
वैष्णो देवी
अपडेटेड 23 अप्रैल , 2026

माता वैष्णो देवी मंदिर में जो श्रद्धालु चढ़ावे के तौर पर चांदी चढ़ा रहे हैं, उसमें से बहुत बड़ा हिस्सा नकली निकल रहा है. हाल ही में मंदिर प्रबंधन समिति ने श्रद्धालुओं की तरफ से चढ़ाई गई चांदी के सिक्कों और आभूषणों में से तकरीबन 20 टन को सरकारी मिंट में गलाने और भंडारण के लिए भेजा था. सरकारी प्रतिष्ठान में यह पाया गया कि चांदी के कुल सिक्कों और आभूषणों में असल चांदी सिर्फ 5-6 प्रतिशत है, बाकी इसमें कैडमियम और लोहे जैसी अन्य धातुओं की मिलावट पाई गई.

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के माता वैष्णो देवी मंदिर में आने वाले करोड़ों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के प्रतीक के तौर पर चांदी के सिक्के, छत्र, आभूषण और अन्य वस्तुएं चढ़ाते हैं. लेकिन चांदी में मिलावट की इस खबर ने लोगों की आस्था पर सवाल खड़ा करने के साथ ही उनसे होने वाली ठगी को भी उजागर किया है.   वहीं मंदिर के लिए यह उसकी प्रतिष्ठा दागदार करने के साथ आर्थिक नुकसान का भी मामला है.

अगर यह 20 टन चांदी पूरी तरह शुद्ध होती, तो मौजूदा बाजार दर के हिसाब से इसकी कीमत सैकड़ों करोड़ रुपए तक पहुंच सकती थी. लेकिन जब इसमें चांदी की मात्रा महज 5-6 प्रतिशत ही निकली, तो इसकी वास्तविक कीमत काफी घट जाती है. यानी मंदिर को मिलने वाला चढ़ावा अब अपेक्षित मूल्य का एक छोटा सा हिस्सा भर ही रह गया है.

मंदिर से भेजी गई चांदी की जांच में सामने आया कि चांदी के नाम पर चढ़ाई गई वस्तुओं में कैडमियम जैसी धातु की मिलावट की गई है. कैडमियम एक बेहद जहरीली धातु मानी जाती है. डॉक्टरों का कहना है कि यह लंबे समय तक शरीर में जमा होकर किडनी, लिवर और हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकती है. कैडमियम के संपर्क से कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है. इसे पिघलाने या गलाने के दौरान जहरीले धुएं निकलते हैं, जो इस प्रक्रिया में शामिल लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधित खतरे पैदा करते हैं. यही वजह थी कि जिस सरकारी मिंट में मंदिर प्रशासन ने चांदी भेजी थी, उस मिंट ने पहले इसे गलाने से मना कर दिया था. लेकिन बाद में इस प्रक्रिया में शामिल होने वाले अपने कर्मचारियों की सुरक्षा का पूरा बंदोबस्त करके मिंट ने यह काम शुरू किया. यानी इस मामले का सिर्फ आर्थिक और धार्मिक पक्ष नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से भी जुड़ा यह एक गंभीर मुद्दा है.

मंदिर प्रशासन से संबंधित एक व्यक्ति बताते हैं कि मंदिर में चढ़ाई गई कीमती धातुओं को आमतौर पर सरकारी एजेंसियों या मिंट में भेजा जाता है और वहां उन्हें पिघलाकर शुद्ध किया जाता है. इसके बाद धातु को बिस्किट या बार के रूप में सुरक्षित रखा जाता है. वे यह भी बताते हैं कि कभी-कभी इसका उपयोग सरकारी या अन्य निवेश योजनाओं में किया जाता है. निवेश के पहले या निवेश के दौरान इसकी जो वैल्यू होती है, वह मंदिर ट्रस्ट के खाते में 'एसेट' या संपत्ति के रूप में दर्ज होती है. लेकिन इस मामले में जब चांदी शुद्ध नहीं निकली, तो मंदिर प्रशासन जितनी कीमत की उम्मीद कर रहा था, उससे काफी कम उसके एसेट में दिखेगी.

विशेषज्ञों का कहना है कि आम श्रद्धालु अक्सर असली और नकली चांदी में फर्क नहीं कर पाते. हालांकि, ये लोग चांदी की पहचान के कुछ तरीके भी सुझाते हैं. उदाहरण के तौर पर हॉलमार्क का निशान देखने का सुझाव दिया जाता है. हॉलमार्क असली चांदी पर 'ब्यूरो ऑफ इंडिया स्टैंडर्ड' की तरफ से दिया गया शुद्धता का निशान होता है. चांदी के कारोबार से जुड़े एक कारोबारी कहते हैं, "आम लोग चांदी खरीदते समय इसे चुंबक से चिपका कर देख सकते हैं, अगर चिपक गई तो समझिए कि मिलावट है क्योंकि असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती."

स्थानीय मीडिया में प्रकाशित खबरों को देखें तो पता चलता है कि इस खुलासे के बाद कटरा और आसपास के बाजार भी जांच के दायरे में आ गए हैं. मंदिर के आसपास सैकड़ों दुकानों पर चांदी के सिक्के और धार्मिक वस्तुएं बेची जाती हैं. कई श्रद्धालु यहीं से चांदी के सिक्के और अन्य वस्तुएं खरीदकर माता के दरबार में चढ़ाते हैं.

स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां की कई दुकानों पर सस्ती धातुओं को चांदी की परत चढ़ाकर बेचा जा रहा है और श्रद्धालु भावनाओं में आकर बिना जांचे-परखे इसे खरीद रहे हैं. इनका कहना है कि यहां नियमन और गुणवत्ता जांच की कमी का फायदा कुछ कारोबारी उठा रहे हैं. लेकिन स्थानीय लोग यह भी कह रहे हैं कि इसके लिए सभी दुकानदारों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि कुछ ऐसी दुकानें भी हैं जिनका गुणवत्ता पर काफी जोर होता है.

मिलावट की बात के सामने आने के बाद एक कयास यह भी लगाया जा रहा है कि अब यहां आने वाले भक्त चांदी के सिक्के और अन्य वस्तुओं के मुकाबले नकद चढ़ावे या डिजिटल माध्यम से चढ़ावा चढ़ाना बढ़ा सकते हैं.

हालांकि, इस घटना ने मंदिरों में चढ़ावे के स्वरूप और पारदर्शिता पर एक व्यापक बहस को जन्म दे दिया है. माता वैष्णो देवी जैसे बड़े तीर्थस्थल पर इस तरह की मिलावट का मामला केवल स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि यह देशभर के धार्मिक स्थलों के लिए एक चेतावनी है. अब इस तरह का चढ़ावा हासिल करने वाले दूसरे धार्मिक स्थलों के प्रबंधन को भी यह चिंता सता रही होगी कि उनके यहां चढ़ावे में आए चांदी के जो भंडार हैं, उनमें कितनी शुद्धता है और कितनी मिलावट.

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