scorecardresearch

ट्रंप का वेनेजुएला के लिए जो 'प्लान' है, उसका भारत के तेल आयात पर क्या असर पड़ेगा?

वेनेजुएला के पास अनुमानित 300 अरब बैरल से अधिक तेल भंडार है, जो दुनिया में सबसे अधिक है और भारत यहां से भी कच्चा तेल आयात करता रहा है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
अपडेटेड 9 जनवरी , 2026

अमेरिका एक मिलेट्री ऑपरेशन के जरिए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को कब्जे में लेकर न्यूयॉर्क ला चुका है. इस कवायद पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दलील है कि मादुरो और उनकी पत्नी ड्रग कार्टेल के साथ काम करते थे और नशीली दवाओं की तस्करी में शामिल थे. अब उन पर न्यूयॉर्क में इन्हीं आरोपों के हवाले से मुकदमा चलाया जाएगा. 

हालांकि, ट्रंप की इस राय से बहुत कम लोग सहमत हैं. कई अंतरराष्ट्रीय जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला में विशाल तेल भंडार हैं और अमेरिका ने अपने लिए उनके इस्तेमाल को ध्यान में रखकर यह सैन्य दखल दिया है.  

वेनेजुएला के पास अनुमानित 300 अरब बैरल से अधिक तेल भंडार है, जो दुनिया में सबसे अधिक है. उसके मुकाबले सऊदी अरब (267 अरब), कनाडा (159 अरब), अमेरिका (81 अरब) और रूस (80 अरब) से से यह लैटिन अमेरिकी देश कहीं आगे है.  हालांकि, पिछले ट्रंप शासन के दौरान लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद देश का तेल उत्पादन घटकर लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन (BPD) रह गया था. प्रतिबंधों से पहले, 2010 के शुरुआती वर्षों में वेनेजुएला 20 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक तेल का उत्पादन करता था.

इसके अलावा, वेनेजुएला का अधिकांश तेल ‘एक्स्ट्रा हैवी’ है. इसे रिफाइन करना महंगा होता है और यह अधिक प्रदूषण फैलाता है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देश की राष्ट्रीय तेल कंपनी पेट्रोलियोस डी वेनेजुएला (PDVSA) के पास उत्पादन बढ़ाने के लिए पर्याप्त पूंजी और तकनीकी विशेषज्ञता नहीं है. अमेरिकी कंपनी शेवरॉन, जिसकी वेनेजुएला में बड़ी मौजूदगी है, देश के कुल तेल उत्पादन का लगभग एक-चौथाई हिस्सा निकालती है. सत्ता परिवर्तन की स्थिति में, कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल कारोबार में अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहता है, जिसमें तेल को अन्य देशों तक पहुंचाने में मदद करना भी शामिल है.

इन सबका भारत पर क्या असर पड़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला में हो रहे घटनाक्रमों का भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा. 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद वेनेजुएला से भारत का तेल आयात काफी कम हो गया था. वित्त वर्ष 2025 में वेनेजुएला भारत का 18वां सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था. वित्त वर्ष 2026 में अब तक यह 21वें स्थान पर है, और अप्रैल–अक्टूबर 2025 की अवधि में भारत ने वहां से 30 करोड़ डॉलर का तेल आयात किया. मौजूदा हालात को देखते हुए, इस लैटिन अमेरिकी देश से तेल आयात को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है.

इसलिए, तेल के वास्तविक असर का निर्धारण इस बात से होगा कि अमेरिका वेनेजुएला में किस तरह की भूमिका निभाने की योजना बनाता है. ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला अमेरिका को 5 करोड़ बैरल तक तेल सौंपेगा, जिसकी कीमत लगभग 2.8 अरब डॉलर होगी. इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में गिरावट आई. 7 जनवरी को ब्रेंट क्रूड 60.6 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले दिन के बंद भाव से थोड़ा कम था.

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि यह तेल बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा. इससे पहले उन्होंने कहा था कि 18 महीनों के भीतर वेनेजुएला में अमेरिकी तेल उद्योग “पूरी तरह चालू” हो जाएगा और उन्हें उम्मीद है कि वहां बड़े पैमाने पर निवेश आएगा.

अमेरिका द्वारा मादुरो सरकार को हटाने के कदम पर भारत की संतुलित प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि सरकार इस मुद्दे पर एक संतुलित रुख अपनाना चाहती है. वह ऐसे समय में अमेरिका को नाराज़ नहीं करना चाहती जब ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है और भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण लगे 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को कम कराने की कोशिश कर रहा है. 

हालांकि भारत ने रूसी तेल का आयात घटाया है, फिर भी वित्त वर्ष 2025 में रूस भारत को तेल का सबसे बड़ा निर्यातक था (56.9 अरब डॉलर), और वित्त वर्ष 2026 में अब तक रूस ने 23.7 अरब डॉलर का तेल भारत को निर्यात किया है. दूसरी ओर, अमेरिका भारत को तेल निर्यात बढ़ा रहा है. वित्त वर्ष 2025 में उसने 14.3 अरब डॉलर का तेल भारत को बेचा और वित्त वर्ष 2026 में अब तक 8.3 अरब डॉलर का तेल निर्यात किया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला के तेल का एक बड़ा आकर्षण उसकी कीमत रही है. बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस कहते हैं, “इसकी कीमत सबसे कम में से एक रही है- वित्त वर्ष 2025 में यह 496 डॉलर प्रति टन थी, जबकि औसत 586 डॉलर प्रति टन था. लेकिन इसके बाद इसके आयात की अहमियत और घट गई.”

अगर वेनेजुएला के तेल को लेकर अमेरिकी दावे के अनुसार हालात बदलते हैं तो वैश्विक आपूर्ति में मामूली वृद्धि हो सकती है और कीमतें नीचे आ सकती हैं. इसके बावजूद सबनवीस कहते हैं, “भारत अलग-अलग देशों से अलग-अलग कीमतों पर तेल खरीदता है तो इस हिसाब से कुल लागत आज की तुलना में बहुत अलग होने की संभावना नहीं है.”

Advertisement
Advertisement