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मोदी की तारीफ करते-करते ट्रंप ने भारत को क्या धमकी दे दी?

डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में भारत के रूस से तेल आयात घटाने पर बयान दिया है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
अपडेटेड 5 जनवरी , 2026

4 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर रूस से तेल खरीदने पर भारत को धमकी दी. साथ ही उन्होंने भारत में रूसी तेल खरीद कम होने पर कहा कि भारत ने यह फैसला उन्हें खुश करने के लिए लिया है.

ट्रंप ने पीएम मोदी को लेकर कहा, "वे मुझे खुश करना चाहते थे. प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं. वह जानते थे कि मैं खुश नहीं था, इसलिए मुझे खुश करना जरूरी था. हम व्यापार करते हैं और उन पर टैरिफ बहुत जल्दी बढ़ा सकते हैं.”

नई धमकी देते हुए ट्रंप ने क्या कहा है?

एयर फोर्स वन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, "अगर भारत रूसी तेल मुद्दे पर मदद नहीं करता है तो हम उस पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं." अमेरिकी सेना के प्रमुख ने दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की खरीद में काफी कमी की है.

ट्रंप की यह नई चेतावनी रूस के साथ भारत के ऊर्जा व्यापार पर चल रहे अमेरिकी दबाव के बीच आई है. हालांकि, भारत घरेलू ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से तेल खरीद को जरूरी बताता रहा है. ट्रंप के ये बयान प्रधानमंत्री मोदी से हाल में हुई उनकी बातचीत के बाद आई हैं, जिसमें दोनों नेताओं ने टैरिफ संबंधी तनाव के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में गति बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया था.

ट्रंप ने भारतीय चावल पर भी टैरिफ लगाने की धमकी दी

बीते दिनों व्हाइट हाउस में आयोजित एक गोलमेज सम्मेलन में एक किसान प्रतिनिधि के जरिए भारत, चीन और थाईलैंड से चावल की डंपिंग की शिकायत हुई थी. इसके बाद ट्रंप ने भारतीय चावल पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी थी.

ट्रंप ने तब वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट से यह सवाल पूछा था कि, “भारत को ऐसा करने की अनुमति क्यों दी गई है? उन्हें तो शुल्क देना ही पड़ता है. क्या उन्हें चावल पर छूट मिली हुई है?” इस पर सचिव ने ट्रंप को बताया कि भारत के साथ एक व्यापार समझौता चल रहा है. इस पर उन्होंने कहा, "लेकिन उन्हें (भारत को) ऐसा नहीं करना चाहिए... हम इसे सुलझा लेंगे. टैरिफ से समस्या दो मिनट में हल हो जाती है."

भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर चल रही बातचीत कई स्टेज में होने के बाद ठप गई है, क्योंकि अमेरिका अपने कृषि उत्पादों पर भारी आयात शुल्क को रोकने के लिए कड़ा दबाव बना रहा है. वहीं, भारत देश के कृषि और डेयरी क्षेत्रों की रक्षा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है.

क्या रूस से तेल खरीद कम हुई है?

हां, भारत ने हाल के दिनों में भारत ने रूस से तेल खरीद को कम किया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रूसी तेल आयात नवंबर में करीब 17.7 लाख बैरल प्रति दिन था, जो दिसंबर में घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है. समय के साथ यह और कम हो सकता है. 2021 के बाद पहली बार भारत रूस से इतना कम तेल खरीद रहा है.

कुछ एक्सपर्ट्स और मीडिया रिपोर्ट दावा कर रहे हैं कि जनवरी में रूस से तेल आयात में बड़ी गिरावट दिख सकती है. इसकी बड़ी वजह रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाया जाना है. अमेरिका के इस फैसले के बाद ही देश में तेल आयात में कमी देखने को मिल रही है.

क्या वेनेजुएला पर हमला कर अमेरिका ने तेल के मुद्दे को हवा दी?

हां, ये बात सही है कि अमेरिका के वेनेजुएला पर किए गए हमले ने तेल के मुद्दे को एक बार फिर भू-राजनीति के केंद्र में ला दिया है. हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों और कम निवेश के कारण उत्पादन घटकर 10 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है.

तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के आंकड़ों के मुताबिक, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार (अनुमानित 300 अरब बैरल से अधिक) है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 17 फीसद है. अमेरिका वेनेजुएला पर अपना नियंत्रण हासिल कर ज्यादा से ज्यादा तेल निकालकर दुनिया के बाजार में बेचना चाहता है.

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