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बजट 2026 : बेटियों को हॉस्टल, पेरेंट्स को टैक्स छूट; शिक्षा पर सरकार ने खोला खजाना

शिक्षा बजट 1.39 लाख करोड़ के पार और हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल; पढ़ें बजट 2026 में युवाओं के लिए क्या-क्या खास है

Beti Bachao Beti Padhao
ग्रामीण इलाकों में लड़कियों का ड्रॉपआउट रेट घटाने के लिए बजट में बड़ी पहल
अपडेटेड 1 फ़रवरी , 2026

रविवार यानी 1 फरवरी को जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना लगातार नौवां बजट पेश किया, तो 85 मिनट के उनके भाषण के केंद्र में देश की 'युवा शक्ति' रही. वित्त मंत्री ने साफ संदेश दिया कि विकसित भारत की नींव क्लासरूम में ही रखी जाएगी.  यही वजह है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए शिक्षा मंत्रालय का खजाना खोलते हुए, इसे 1.39 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. 

यह आंकड़ा पिछले साल के 1.28 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 8.27 फीसद ज्यादा है. सरकार ने न केवल बजट बढ़ाया है, बल्कि स्कूली बस्तों से लेकर यूनिवर्सिटी के कैंपस और विदेश जाने वाले छात्रों तक, हर मोर्चे पर आंकड़ों के जरिए अपनी प्राथमिकताएं गिनाई हैं. बजट में शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी घोषणाएं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के लक्ष्यों से जुड़ी हुई हैं.

बजट की बारीकियों और आंकड़ों पर गौर करें तो सरकार का झुकाव उच्च शिक्षा की ओर ज्यादा दिखाई देता है. जहां स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग का बजट पिछले साल के 78,572 करोड़ रुपये से 6.35 फीसद बढ़ाकर 83,561 करोड़ रुपये किया गया है, वहीं उच्च शिक्षा विभाग के बजट में करीब 11 फीसद की भारी बढ़ोतरी की गई है. उच्च शिक्षा के लिए आवंटन पिछले साल के 50,078 करोड़ रुपये से बढ़ाकर अब 55,724 करोड़ रुपये कर दिया गया है. वित्त मंत्री ने इसे 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' हासिल करने की दिशा में एक जरूरी निवेश बताया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण के दौरान कहा, ''युवा शक्ति ही विकसित भारत का आधार है. हम शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता से जोड़कर डेमोग्राफिक डिविडेंड को हासिल करेंगे.''

बेटियों की शिक्षा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए बजट में एक बड़ी सामाजिक पहल की गई है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS-5) के उस चिंताजनक आंकड़े को मिटाने की कोशिश की गई है, जिसके मुताबिक ग्रामीण इलाकों में 15-18 साल की उम्र में लड़कियों का ड्रॉपआउट रेट 13.5 प्रतिशत है. इसे रोकने के लिए सरकार ने हर जिले में कम से कम एक गर्ल्स हॉस्टल बनाने का ऐलान किया है. 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (VGF) के जरिए बनने वाले इन हॉस्टल्स में सुरक्षित आवास, स्टडी रूम और कैंटीन होंगी, ताकि साइंस जैसे विषयों (STEM) की पढ़ाई करने वाली छात्राओं को लैब सेशन्स और प्रोजेक्ट्स के लिए रुकने में कोई बाधा न आए.

शिक्षा को रोजगार के गलियारों तक ले जाने के लिए सरकार ने पांच नए 'यूनिवर्सिटी टाउनशिप' विकसित करने की घोषणा की है. इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के पास बनने वाले इन टाउनशिप में यूनिवर्सिटी, रिसर्च संस्थान और स्किल सेंटर एक साथ होंगे. वहीं, बदलते दौर की मांग को देखते हुए पूर्वी भारत में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) और आईआईटी मुंबई में 'क्रिएटर लैब्स' स्थापित की जाएंगी. इतना ही नहीं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) मुंबई की मदद से 15,000 से अधिक माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में ई-कंटेंट लैब्स खोली जाएंगी, ताकि छात्र कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में कदम रख सकें.

स्वास्थ्य और विज्ञान के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ी लकीर खींची है. बजट में तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) और तीन नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (NIPER) खोलने का वादा किया गया है. साथ ही, अगले पांच सालों में ऑप्टोमेट्री और एनेस्थीसिया जैसे 10 नए विषयों में एक लाख एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स और 1.5 लाख योग एवं वेलनेस केयरगिवर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा, खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए चार टेलीस्कोप इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं स्थापित या अपग्रेड की जाएंगी.

मिडिल क्लास अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने विदेश में पढ़ाई या इलाज के लिए भेजे जाने वाले पैसे (Remittance) पर TCS की दर को 5 फीसद से घटाकर मात्र 2 फीसद कर दिया है. अंत में, भविष्य का रोडमैप तैयार करने के लिए एक हाई-पावर्ड स्टैंडिंग कमिटी बनाने की घोषणा की गई है, जो AI जैसी तकनीकों का मूल्यांकन करेगी और 2047 तक सेवा क्षेत्र में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी को 10 फीसद तक ले जाने का खाका खींचेगी. घोषणाएं महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन इन आंकड़ों को हकीकत में बदलना ही सरकार की असली परीक्षा होगी.

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