धमनियां में ब्लॉकेज या कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या अचानक सीने में दर्द उठने या बेहोश हो जाने के रूप में सामने नहीं आती है बल्कि सालों-साल धीरे-धीरे बढ़ती रहती है. धमनियों की ब्लॉकेज शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षणों के महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त आपूर्ति को बाधित करती हैऔर आगे चलकर गंभीर हृदय रोगों का कारण बनती है.
कुछ मरीजों में यह समस्या पहली बार तभी स्पष्ट तौर पर सामने आती है जब ब्लॉकेज गंभीर हो जाता है, जिससे कभी-कभी तत्काल बाईपास सर्जरी जरूरी हो जाती है. नई दिल्ली के द्वारका स्थित Manipal Hospitals में कंसल्टेंट-इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डॉ. वीरभान बलाई बता रहे हैं कि इस सबसे कैसे बचा जा सकता है?
ब्लॉक धमनियां एक ऐसी स्थिति है जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं. ये धमनियों के भीतरी किनारों पर फैट, कोलेस्ट्रॉल और अन्य चीजें जमा होने का नतीजा होता है जिसे सामान्य तौर पर प्लाक कहा जाता है. प्लाक के कारण धमनियों के जरिये ब्लड सप्लाई कम हो सकती है या पूरी तरह बंद हो सकती है, जिससे शरीर में खून के साथ ऑक्सीजन पहुंचने की प्रक्रिया रुक जाती है. समय पर ध्यान न देने पर ये इतने प्लाक सख्त हो सकते कि धमनियां ही सिकुड़ जाएं. इससे दिल और रक्त प्रवाह से जुड़ी बीमारियां, जैसे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है.
धमनियों में रुकावट कई वजहों से होती है. इनमें लाइफस्टाइल सबसे बड़ा कारण है; सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट और कोलेस्ट्रॉल से भरपूर डाइट से खून में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ सकता है जो प्लाक जमने का कारण बनता है. एक्सरसाइज की कमी, मोटापा और धूम्रपान दूसरी बड़ी वजहें हैं.
बीमारी दबे पांव क्यों बढ़ती है?
जैसे-जैसे प्लाक धीरे-धीरे बनते और बढ़ते हैं, धमनियां अपनी लचक खो देती हैं और पतली होने लगती है. दिल या तो ज्यादा ताकत लगाकर या किसी दूसरी तरह से इसकी भरपाई करता है. एडजस्ट करने की यही क्षमता लक्षणों को एक लंबे समय तक छिपाए रखती है. तमाम लोग अपनी जिंदगी सामान्य तरह से जीते रहते हैं और उन्हें इसका कतई अंदाजा भी नहीं लग पाता कि उनकी कोरोनरी धमनियां धीरे-धीरे सिकुड़ती जा रही हैं. इससे इंसान का शरीर तब तक एडजस्ट करता रहता है जब तक उसमें इसे बर्दाश्त करने की क्षमता होती है.
आखिर कब नजर आते हैं लक्षण?
बीमारी की स्थिति का पता आमतौर पर तभी चलता है जब ब्लॉकेज काफी ज्यादा या अस्थिरत हो जाता है. कुछ मामलों में हार्ट अटैक पहला लक्षण होता है. दूसरे लक्षण निम्नलिखित हैं:-
- शारीरिक सक्रियता के दौरान सीने में भारीपन या असहजता महसूस होना
- चलते या सीढ़ियां चढ़ते समय सांस लेने में दिक्कत.
- अक्सर होने वाली थकान.
- हाथ, जबड़े या पीठ तक होने वाला दर्द
बाईपास सर्जरी क्यों जरूरी हो जाती है?
जब कई कोरोनरी धमनियां काफी ज्यादा सिकुड़ जाती हैं या ब्लॉक हो जाती हैं तो दिल की मांसपेशियों तक खून का बहाव बाधित होना स्थिति को गंभीर बना देता है. ऐसे में ब्लॉक धमनियों के चारों ओर नए रास्ते बनाकर खून का बहाव ठीक करने के लिए कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट (CABG) सर्जरी जरूरी हो जाती है. हालांकि, बाईपास सर्जरी की जरूरत कोई अचानक होने वाली स्थिति नहीं होती है बल्कि कई वर्षों तक बीमारी के धीरे-धीरे बढ़ने को नजरअंदाज करने पर इसकी जरूरत पड़ती है.
CABG सर्जरी के दौरान सीने, पैर या हाथ से किसी स्वस्थ ब्लड वेसल को लेकर उसे ब्लॉक हो चुकी धमनी के ऊपर और नीचे लगाया जाता है, जिससे हार्ट तक रक्त की आपूर्ति का नया रास्ता बनता है. बाईपास सर्जरी ऑक्सीजन की आपूर्ति को बेहतर बनाती है, सीने में दर्द और सांस फूलने जैसे लक्षणों से राहत देती है, और दिल को और कोई नुकसान होने से बचाती है.
नियमित हेल्थ चेकअप, कोलेस्ट्रॉल के स्तर की निगरानी, ब्लड प्रेशर कंट्रोल और समय पर हृदय जांच से कोरोनरी धमनियों से जुड़ी बीमारी को गंभीर स्थिति में पहुंचने से रोकने में मदद मिल सकती है. चूंकि कोरोनरी धमनी की बीमारी शुरुआती चरणों में स्पष्ट नहीं दिखती है, इसलिए समय पर इलाज प्लाक बढ़ने से रोकने, जटिलताएं दूर करने और कई मामलों में बड़ी सर्जरी की स्थिति से बचाने में अहम भूमिका निभाता है.

