दिल्ली के शाहदरा इलाके में बीते हफ्ते 3 मई को AC फटने से आग लग गई, जिसमें 9 लोगों की जान चली गई. ग्रेटर नोएडा में भी AC फटने की घटना से घर का पूरा सामान जल गया. अप्रैल में ग्रेटर नोएडा में ही AC फटने की 6 घटनाएं हो चुकी हैं.
अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसी क्या कमी रह जाती है जिससे ये घटनाएं हो रही हैं और इन्हें कैसे रोका जा सकता है. क्या 'चाइनीज गैस' इसके लिए जिम्मेदार है या कोई दूसरी वजह है?
यहां 'चाइनीज गैस' का मतलब उन निम्न गुणवत्ता वाली और सस्ती रेफ्रिजरेंट गैसों से है जो मुख्य रूप से चीन से आयात की जाती हैं या स्थानीय स्तर पर अवैध रूप से तैयार की जाती हैं. इनमें अक्सर हाइड्रोकार्बन का असुरक्षित मिश्रण होता है जो अत्यधिक ज्वलनशील और विस्फोटक हो सकता है.
लगातार तापमान बढ़ने के साथ भारत में एयरकंडीशनर खरीदने की दर बढ़ती जा रही है. वर्ष 2024 की भीषण गर्मी में भारत में करीब डेढ़ करोड़ AC बिके थे. AC का दिल कंप्रेसर होता है जिसमें रेफ्रिजरेंट गैस भरी होती है और यहीं से हवा ठंडी करने का काम होता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि खराब मेंटेनेंस के साथ 'चाइनीज गैस' या घटिया क्वालिटी की गैस भी कंप्रेसर फटने की वजह बनती है.
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा, बिहार आदि राज्यों में व्यावसायिक कूलिंग और हीटिंग सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने वाली कंपनी हेल्दी एयरकूल प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर असगर अली कहते हैं, “कंप्रेसर पर लोड ज्यादा होगा तो वह एबनॉर्मल हो जाता है. दबाव ज्यादा होता है तो कंप्रेसर समेत इसके जॉइंट सील, बॉडी और पाइप आदि सब कुछ फट जाता है. यह लोहे का होता है.”
AC में रेफ्रिजरेंट गैस भरी जाती है. पहले रेफ्रिजरेंट 22 (R-22) नंबर की गैस भरी जा रही थी जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचा रही थी, इसलिए इस पर पाबंदी लगा दी गई है. असगर अली के मुताबिक, “अभी आर-410 और आर-32 आदि गैसें प्रयोग में हैं जो ओजोन लेयर को खराब नहीं करतीं. ये तुलनात्मक रूप से महंगी होती हैं. बाजार में ऐसे बहुत से लोग हैं जो मात्र 1800 रुपए में गैस भरने का दावा करते हैं. इसकी वजह से एयर प्रेशर और लोकल गैस से कंप्रेसर पर दबाव बहुत बढ़ जाता है और वह बम बन जाता है.”
वे आगे बताते हैं, “सस्ती या मिलावटी गैस का प्रेशर कंप्रेसर की क्षमता से अलग होता है. साथ ही कम जानकार सर्विस करने वाले आर-410, आर-407 या आर-32 जैसी किसी भी गैस को किसी भी AC में डाल देते हैं, जो कि खतरनाक है. अगर कंप्रेसर आर-32 के हिसाब से डिजाइन हुआ है और उसमें 407 नंबर की गैस डाल दी गई, तो गैस के अलग 'बॉयलिंग पॉइंट' और 'प्रेशर' के कारण AC फटने की आशंका बढ़ जाती है. जिस गैस के लिए कंप्रेसर डिजाइन है, उसमें वही गैस डालनी चाहिए. सिलेंडर और मशीन पर लगे स्टिकर से गैस का नाम देखा जा सकता है.” AC की देखभाल के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
AC के मेंटेनेंस में ध्यान रखने वाली 10 बातें :
- ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर के कर्मियों से ही गैस भरवानी चाहिए.
- घटिया वायर, ढीले कनेक्शन और निम्न स्तर की एमसीबी से घर की वायरिंग पर दबाव बढ़ता है, जिससे आग लग जाती है.
- वातावरण के अनुसार सीजन में 3-4 बार या हर दो महीने में सर्विसिंग करानी चाहिए. यदि आपके इलाके में धूल ज्यादा है तो 5 बार तक सर्विसिंग कराएं. मिट्टी की सफाई और वोल्टेज कंट्रोल होना अनिवार्य है.
- घर में डस्टिंग या सफाई के समय AC बंद कर देना चाहिए. AC धूल को खींच लेता है जिससे फिल्टर और कॉइल ब्लॉक हो जाते हैं और कूलिंग कम हो जाती है. इससे कूलिंग कॉइल और ब्लोअर के अंदर मिट्टी जमा हो जाती है.
- AC को 24 घंटे में कम से कम 4-5 घंटे का आराम देना चाहिए.
- तापमान 24-26°C से नीचे नहीं रखना चाहिए. 16-18°C पर चलाने से AC ज्यादा ठंडा नहीं होता, बल्कि सिर्फ ज्यादा थकता है. ऊर्जा मंत्रालय ने न्यूनतम बिजली खपत के लिए AC को 24 डिग्री पर चलाने की सिफारिश की है लेकिन यह बाध्यकारी नहीं है.
- AC के लिए अलग डेडिकेटेड लाइन और पावर प्लग से कनेक्शन होना चाहिए. मल्टी-प्लग में AC जोड़ना खतरनाक हो सकता है.
- एमसीबी (MCB) से ही AC को पावर सप्लाई देनी चाहिए. यह ओवर-करेंट आते ही बिजली काट देती है.
- आउटडोर यूनिट को यथासंभव शेड या छाया में रखें.
- अजीब आवाज या जलने की बदबू आने पर AC तुरंत बंद करें और टेक्नीशियन को बुलाएं.
इन बातों का ध्यान रखकर आप अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं. वैसे भी अब AC के पुर्जे पहले की तुलना में कुछ हल्के आ रहे हैं. असगर अली बताते हैं, “कंप्रेसर की बॉडी पहले मोटी होती थी, पर अब कंपनियों ने लागत घटाने के लिए इसका शेल हल्का बनाना शुरू कर दिया है. यह खतरनाक है. पहले AC 50 किलो का होता था जो अब घटकर 25-30 किलो का रह गया है.”
जहां तक 'चाइनीज गैस' का सवाल है तो मार्केट में यह दूसरे देशों से भी आ रही है. सस्ता होने के कारण स्थानीय मैकेनिक इस गैस को फ्रिज से लेकर AC तक सबमें डाल देते हैं. यह करीब ढाई सौ रुपए सस्ती मिल जाती है लेकिन इससे मशीन पर जोखिम काफी बढ़ जाता है.

