आजकल फूड प्रोडक्ट के पैकेट सूचनाओं से लबालब होते हैं. इन पर बड़े-बड़े अक्षरों में सामग्री, न्यूट्रिशन जानकारी और मार्केटिंग के आकर्षक शब्द छपे मिलते हैं. फूड कंपनियां अपने प्रोडक्ट को 'सबसे बेहतर' या 'हेल्थ के लिए फायदेमंद' साबित करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाती हैं.
हालांकि, AI-आधारित डिजिटल फूड लेबलिंग कंपनी लेबलब्लाइंड ( LabelBlind) ने अपनी 2025–26 रिसर्च में इस इंडस्ट्री की सच्चाई उजागर कर दी है. कंपनी ने 227 ब्रांडों के 586 पैकेटबंद उत्पादों (18 कैटेगरी में) पर 5,058 दावों का विश्लेषण किया. रिजल्ट चौंकाने वाला था.
कुल 33.6 फीसद दावे या तो पूरी तरह नियम और मापदंडों को पूरी करने वाले नहीं थे या बिना पर्याप्त सबूत के थे. यानी हर तीन में से एक दावा नियमों पर खरा नहीं उतरता या भ्रामक हो सकता है. स्वास्थ्य संबंधी दावे तो और भी ज्यादा समस्या वाले पाए गए.
कई मामलों में कंपनियां भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों, भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रही हैं.
कंपनी की रिसर्च में कुल 5,058 दावों का विश्लेषण किया गया. दावों को देखकर ही समझा जा सकता है कि पैकेजिंग पर ये कंपनियां जरूरत से ज्यादा दावे कर रही हैं. हर प्रोडक्ट पर औसतन आठ से नौ दावे थे, जबकि प्रोटीन पाउडर जैसे प्रोडक्ट में तो न्यूट्रिशन और स्वास्थ्य को लेकर 17 से ज्यादा दावे किए गए थे.
फूड प्रोडक्ट की लेबलिंग एक कानूनी रूप से अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसमें उपभोक्ताओं को उत्पाद के बारे में आवश्यक जानकारी देनी होती है. इसमें न केवल पोषण संबंधी जानकारी वाला पैनल बल्कि पूरी पैकेजिंग शामिल होती है.
FSSI कानूनी माप विज्ञान प्राधिकरणों के साथ मिलकर, खाद्य लेबलिंग मानकों की निगरानी करता है, जिसमें उत्पाद की पहचान, सामग्री सूची, प्रोडक्ट में शामिल कंपोनेंट, न्यूट्रिशन, उसे बनाने वाली कंपनियों की जानकारी शामिल होती है.
लेबलब्लाइंड की संस्थापक और CEO रशीदा वापीवाला का कहना है कि फूड प्रोडक्ट की लेबलिंग उपभोक्ताओं के साथ संवाद के सबसे महत्वपूर्ण और प्रत्यक्ष माध्यमों में से एक हैं. यही कारण है कि इनका स्पष्ट, सटीक और विश्वसनीय होना अनिवार्य है, न केवल एक रेगुलेशन के लिहाज से बल्कि आम लोगों की सेहत के लिहाज से भी बेहद जरूरी है.
वे आगे कहती हैं कि आयातित उत्पादों में इजाफा होने और उपभोक्ता व उत्पादकों के बीच दूरी बढ़ने के कारण फूड प्रोडक्ट की लेबलिंग खरीदारों को सुरक्षा और पोषण के बारे में फैसला लेने में मदद करने का एक महत्वपूर्ण जरिया होती है.
फूड प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां लेबलिंग के नियमों को कैसे तोड़ती हैं?
खाद्य पदार्थों के लेबल को FSSAI के विज्ञापन और लेबलिंग नियमों, ASCI के मानदंडों और उपभोक्ता संरक्षण कानून के प्रावधानों के तहत तय नियमों का पालन करना जरूरी है. कंपनियां इन नियमों को कई तरह से तोड़-मरोड़ कर अपने फायदे में इस्तेमाल कर सकती हैं, जैसे- बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावे, दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाली शब्दावली, विरोधाभासी जानकारी. उदाहरण के लिए, कोई प्रोडक्ट आयरन से भरपूर होने का दावा कर सकता है, लेकिन उसकी पोषण सूची अगर आवश्यक 30 फीसद अनुशंसित आहार भत्ता यानी RDA को पूरा नहीं करती, तो उस प्रोडक्ट का दावा भ्रामक माना जाएगा.
लेबलब्लाइंड के रिसर्च मुताबिक, जिन 5,058 दावों पर रिसर्च की गई, उनमें से 21.3 फीसद पूरी तरह से नियमों पर खरे नहीं उतरे. इसका अर्थ है कि वे रेगुलेशन के हिसाब से अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहे. अन्य 12.3 फीसद दावे "ब्रांड के जरिए सत्यापित" श्रेणी में आते हैं, जहां दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने के लिए पैकेजिंग पर पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं थे.
लेबलब्लाइंड की संस्थापक और CEO रशीदा वापीवाला ने कहा, “जब ब्रांड कहते हैं कि उनका प्रोडक्ट डायबिटीज रोगियों के लिए सही है या हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, तो उन्हें अपने दावों के समर्थन में स्पष्ट प्रमाण भी देने होंगे. ”
इस रिसर्च में यह भी पाया गया कि नए फूड प्रोडक्ट लेबल नियमों को धड़ल्ले से तोड़ रहे हैं. पेड-पौधों पर आधारित पेय पदार्थों पर 29 फीसद दावे, रेडी-टू-ईट भोजन पर 28.6 फीसद और पैकेज्ड स्नैक्स पर 27.3 फीसद दावों को नियमों का पालन न करने वाला पाया गया, जिससे पता चलता है कि फूड प्रोडक्ट के बनने से लेकर पैकिंग होने तक में नियमों का सख्ती से पालन नहीं हो पा रहा है.
क्या स्वास्थ्य संबंधी झूठे दावे कर रही कंपनियां?
रिसर्च में कंपनियों के जरिए किए गए दावों को 21 कैटेगरी में बांटा गया, जिनमें स्वास्थ्य, पोषक तत्व सामग्री और शुगर फ्री, मैदा फ्री आदि जैसे दावे शामिल हैं. लगभग 40 फीसद दावे स्वास्थ्य या पोषक तत्व श्रेणियों से जुड़े हैं. इन कंपनियों के जरिए किए जाने वाले स्वास्थ्य संबंधी दावे सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं, जिनमें से लगभग 52.5 फीसद को या तो नियमों का पालन न करने वाला या ब्रांड सत्यापन की आवश्यकता वाला माना गया.
उदाहरण के लिए शहद उत्पादों के जरिए हृदय स्वास्थ्य लाभ के दावे, घी को बिना किसी प्रमाण के पोषक तत्वों का भंडार बता देना शामिल है. इसके अलावा, रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं में स्वास्थ्य संबंधी दावों के लेबलिंग में सबसे अधिक अनियमितता पाई गई, जो शहद के लिए 80 फीसद, घी के लिए 65.5 फीसद, चाय/हर्बल पेय के लिए 54.3 फीसद और खाद्य तेलों के लिए 52.9 फीसद तक पहुंच गई. फूड प्रोडक्ट में प्रोटीन, आयरन और हाई फाइबर जैसे दावे अक्सर मानकों को पूरा करने विफल रहे.
इस रिसर्च में फूड प्रोडक्ट की 18 श्रेणियों को शामिल किया गया और पाया गया कि स्नैक्स में सबसे ज्यादा 27.3 फीसद दावे नियम-कानून और मानकों को पूरा करने में विफल रहे हैं. यहां तक कि आटे और मैदे जैसे मुख्य खाद्य उत्पादों में भी 24.8 फीसद प्रोडक्ट मानकों और नियमों पर खरे नहीं उतर पाए. इसी तरह घी में 22.6 फीसद, खाद्य तेलों में 21.7 फीसद और चाय और हर्बल पेय पदार्थों में 21.5 फीसद प्रोडक्ट नियम और मानकों के खिलाफ पाए गए.
रिसर्च करने वाली कंपनी का कहना है कि फूड प्रोडक्ट को लेकर ये परिणाम बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि रोजमर्रा में इनका इस्तेमाल आबादी का एक बड़ा हिस्सा करता है.
पेय पदार्थों में भी महत्वपूर्ण समस्याएं देखी गईं, जिनमें सोया और बादाम दूध जैसे पेड़-पौधों पर आधारित पेय पदार्थों में 29 फीसद नियम और मानदंडों के खिलाफ थे. जबकि रेडी-टू-ड्रिंक पेय पदार्थों में यह आंकड़ा 27.1 फीसद रहा. प्रोटीन पाउडर के लेबल पर औसतन 17 दावे थे, जबकि मेवे, बीज, एनर्जी बार और ट्रेल मिक्स पर लगभग 12 दावे थे. पौधों से बने पेय पदार्थों पर प्रति उत्पाद लगभग 11 दावे थे.
वापीवाला पूछती हैं, “क्या हमें तेल, घी या शहद जैसे दैनिक उपभोग के उत्पादों पर इतने सारे दावों की वाकई जरूरत है? हम कितनी सूचनाओं का अंबार लगा रहे हैं और उपभोक्ता वास्तव में क्या समझ पा रहा है? क्या हम उपभोक्ताओं को सही दिशा दिखा रहे हैं या उन्हें गुमराह कर रहे हैं?”
बच्चों पर केंद्रित प्रोडक्ट भी जांच के दायरे में हैं
बच्चों के लिए बेचे जा रहे प्रोडक्ट पर भी रिसर्च की गई ताकि यह पता किया जा सके कि फूड प्रोडक्ट छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित हैं या नहीं. स्नैक्स में एक बार फिर 27.3 फीसद दावे नियमों पर खरे नहीं उतरे.
दिलचस्प बात यह है कि नाश्ते के अनाजों के मामले में अपेक्षाकृत ज्यादा अच्छा परिणाम देखने को मिला है. इस श्रेणी के 89 फीसद प्रोडक्ट मानकों और नियमों पर खरे उतरे हैं. केक, पैनकेक मिक्स और प्रीमिक्स जैसे सुविधाजनक खाद्य पदार्थों में स्वास्थ्य संबंधी दावे कम थे, लेकिन फिर भी इनमें मध्यम स्तर यानी इनके परिणाम काफी बुरे नहीं बल्कि ठीक-ठाक रहे.

