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दिल्ली-नोएडा औरतों के लिए कम महफूज, किन शहरों में सेफ महसूस करती हैं महिलाएं?

125 शहरों में किए गए एक सर्वे में शामिल 4,000 से ज्यादा महिलाओं ने बताया कि भागीदारी, सुरक्षा और करियर विकास के लिहाज से उन्हें कौन सा शहर सबसे अच्छा लगता है

काम करने वाली महिलाओं पर रिपोर्ट (फाइल फोटो)
काम करने वाली महिलाओं पर रिपोर्ट (फाइल फोटो)
अपडेटेड 12 जनवरी , 2026

नौकरी के कई विकल्प होने पर महिलाएं केवल जॉब प्रोफाइल और वेतन पर ही ध्यान नहीं देतीं, खासकर रीलोकेशन के मामले में. वे कंपनी प्रोफाइल, स्किल डेवलपमेंट के मौके के अलावा उस शहर की सुरक्षा, परिवहन, आवास, स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान देती हैं.

अवतार ग्रुप की TCWI 2025 रिपोर्ट में यह सामने आया है. इस रिपोर्ट में 125 शहरों का मूल्यांकन किया गया, जिसमें महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और करियर निरंतरता पर फोकस है. अवतार ग्रुप की प्रबंध निदेशक सौन्दर्या राजेश कहती हैं. "यह महिलाओं के करियर और जीवन की वास्तविकताओं को दर्शाता है. इससे पता चलता है कि क्या कोई शहर महिलाओं को कार्यबल में प्रवेश करने, बने रहने और नेतृत्व करने में सक्षम बनाता है?"

रिपोर्ट के मुताबिक, उस शहर में मौजूद मजबूत और विविध रोजगार पारिस्थितिकी तंत्र प्रमुख फैक्टर है. साथ ही, महिलाएं ऐसी जगह पसंद करती हैं, जहां सार्वजनिक स्थानों और वर्कप्लेस में सुरक्षा की भावना हो, ताकि वे आत्मविश्वास से जी सकें."

रिपोर्ट मुताबिक, महिलाएं ऐसे शहर में रहना और नौकरी करना पसंद करती हैं, जहां बाहरी महिलाओं को शहर में स्वतंत्र रूप से घूमने-फिरने की आजादी हो. साथ ही बाहरी महिलाओं को उस शहर में सुरक्षा महसूस हो, ताकी वह स्वतंत्र रूप से कहीं भी आ-जा सकें. महिलाएं ऐसे शहरों को भी तवज्जोह देती हैं, जहां मजबूत कौशल विकास और प्रतिभा विकास के अवसर भी हों. इसका अर्थ है कि इन शहरों में काम करने वाली महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों, व्यावसायिक प्रशिक्षण वाले संस्थाओं तक आसानी से पहुंच हो. साथ ही कंपनियों के जरिए चलाए जाने वाले कौशल विकास का भी इन्हें मौका मिले.

बेहतर परिवहन संपर्क, मोबाइल नेटवर्क कवरेज और आवास, स्वास्थ्य सेवा और नागरिक सेवाओं जैसे जीवन स्तर के मामले में अच्छे या विकसित शहर इनमें अहम भूमिका निभाते हैं. 2025 में भारत में महिलाओं के लिए शीर्ष 10 शहर बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद, मुंबई, गुरुग्राम, कोलकाता, अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम और कोयंबटूर हैं. शीर्ष पांच शहरों में से अधिकांश दक्षिण भारत के हैं, जो महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक भागीदारी बेहतर संकेत देते हैं.

इस तरह की लिस्ट में उत्तर भारत के बहुत कम शहर शीर्ष 10 शहरों में जगह बना पाते हैं. दिल्ली इस सूची में शामिल नहीं है. इसका कारण यह है कि दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहर हर वर्ग के लोगों को नौकरी देने के मामले में तो आगे है, लेकिन सुरक्षा, आवागमन और रहने के लिए सस्ता होने के मामले में पिछड़ जाते हैं. यह इस बात को साफ करता है कि केवल औद्योगिक विकास ही किसी शहर के समावेशी विकास और बेहतर वातावरण को सुनिश्चित नहीं करता है.

जिन क्षेत्रों में महिलाओं को सबसे अधिक रोजगार मिलता है, उनमें टेक्नोलॉजी सेक्टर सबसे आगे है, उसके बाद मानव संसाधन (HR), टैक्सेशन, राइटिंग और डिजाइन फर्मों में रोजगार के अवसर हैं. इसके बाद बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, विनिर्माण और वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) में भी महिलाओं की भागीदारी अच्छी खासी है.

अवतार ग्रुप की प्रबंध निदेशक सौन्दर्या राजेश बताती हैं, “आज के समय में शहरों को सभी लिंग, जाति, धर्म के लोगों के लिए बेहतर नजरिया अपनाना होगा, जिसमें पर्यावरण, सहायक बुनियादी ढांचा, डिजिटल इंफ्रा, समानता और विविध और सभी लोगों का सम्मान शामिल हो. जब ये सभी तत्व एक साथ आते हैं, तो महिलाएं समृद्ध होती हैं. इससे किसी शहर की स्थानीय अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होती हैं और भारत अपने दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के करीब पहुंचता है.”

राजेश आगे कहते हैं कि राज्य सरकारों की कुछ पहलें, जैसे मुंबई के 'पिंक टॉयलेट्स' जो महिलाओं को ध्यान में रखकर सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाएं प्रदान करते हैं. ये पहल महिलाओं की गतिशीलता और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. इसी तरह, हैदराबाद में तेलंगाना पुलिस की एक पहल महिलाओं के लिए बेहद अहम है, जिसका उद्देश्य महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. इसके लिए 'एसएचई (सोसाइटी फॉर हेल्थ एजुकेशन) टीम्स' भी बनाई गई हैं.

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