29 दिसंबर को सोना-चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिली. कारोबार की शुरुआत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना और चांदी ने तेजी दिखाई, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई. कुछ समय बाद ही दोनों कीमतों में भारी गिरावट देखी गई.
चांदी महज कुछ घंटे में अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 31,500 रुपए प्रति किलो तक फिसल गई. वहीं चांदी की तर्ज पर ही सोना भी दिन के उच्च स्तर से लगभग 6000 रुपए से ज्यादा सस्ता हो गया. बाजार में अचानक आई इस गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है.
सवाल अब यही है कि ऐसा क्यों हुआ और क्या सोना-चांदी की कीमतों में यह गिरावट यहीं थमेगी या आने वाले दिनों में दाम और नीचे जा सकते हैं?
तेजी से बढ़ रहे चांदी की कीमतों में अचानक क्यों गिरावट आई?
इस साल अब तक चांदी की कीमतों में 181 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो सोने से कहीं अधिक है. अमेरिका में इसे एक महत्वपूर्ण खनिज के रूप में वर्गीकृत किया गया है. इसके बाद से ही चांदी की कीमतों में ये तेजी देखने को मिल रही है. इसके सीमित आपूर्ति और औद्योगिक उपयोग में भारी वृद्धि के कारण निवेशकों की रुचि चांदी में बढ़ी है.
29 दिसंबर को चांदी ने 2,54,174 का हाई लेवल छुआ था, लेकिन, इसके कुछ देर बाद ही इसमें गिरावट का दौर शुरू हो गया. यह 31,672 रुपए गिरकर 2,22,502 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई. हालांकि, मार्केट क्लोज होने तक इसमें हल्का सा उछाल आया और यह 223900 रुपए के लेवल पर क्लोज हुई.
चांदी की कीमतों में आई गिरावट मुख्यतौर पर तीन वजहों से हो सकती है-
1. मुनाफावसूली: चांदी की कीमतों में थोड़ी गिरावट होते ही निवेशकों ने मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया. लाभ सुरक्षित करने की होड़ में MCX सिल्वर मार्च वायदा की कीमत महज कुछ घंटे में 31,500 रुपए प्रति किलो तक फिसल गई.
2. रूस-यूक्रेन के बीच शांति समझौता: कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के बीच संभावित शांति समझौते पर बातचीत में प्रगति हुई है. इसके कारण ही चांदी की कीमतों में गिरावट हुई है. ऐसा इसलिए क्योंकि भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी आने से सोना-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश की मांग कम हो जाती है.
आगे कीमतों को लेकर क्या संभावनाएं हैं?
रिलायंस सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्चर जिगर त्रिवेदी के मुताबिक चांदी के लिए बाजार का नजरिया अब भी सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन इसमें तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं. 2.4 लाख रुपये का स्तर महत्वपूर्ण रूप से शॉर्ट टर्म के लिए सपोर्ट प्राइस रेंज बनकर उभरा है.
अमेरिकी वित्तीय सेवा फर्म BTIG ने चेतावनी दी है कि कीमती धातुओं में आई तेजी "पैराबोलिक" पैटर्न में बदल गई है, जो आमतौर पर एक तीव्र और अचानक उलटफेर के साथ समाप्त होता है. फर्म ने कहा, "पैराबोला पैटर्न का अंत बड़े गिरावट की वजह से होती है. समय के साथ इनमें सुधार नहीं होता."
ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड में फिक्स्ड इनकम के मुख्य निवेश अधिकारी मनीष बंथिया ने कहा कि इतिहास गवाह है कि चांदी की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि का अंत हर बार बुरा होता है. 1979-80 के दौरान चांदी की कीमत 6 डॉलर से बढ़कर 49 डॉलर प्रति औंस हो गई, फिर उसमें 90 फीसद से अधिक की गिरावट आई.
2011 में कीमतें लगभग 48 डॉलर के शिखर पर पहुंच गईं और उसके बाद 75 फीसद से अधिक गिर गईं. दोनों ही मामलों में मंदी शुरू होने से पहले चांदी की कीमतों में कई बार वृद्धि हो चुकी थी. महामारी के दौरान आई गिरावट के बाद से चांदी की कीमतों में छह गुना से अधिक की वृद्धि हुई है और अकेले पिछले एक वर्ष में ही यह कीमत बढ़कर लगभग तीन गुना हो गई हैं. अब देखना ये है कि इस बार चांदी की कीमतों में हुई इस भारी इजाफा का अंत कैसे होता है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी की कीमतों को लेकर पिछले अनुभवों से ये संकेत मिलता है कि एक बार तेजी का दौर खत्म होने के बाद चांदी की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है. यह गिरावट 50 फीसद या उससे ज्यादा हो सकती है.

