हरियाणा के समालखा में 13 से 15 मार्च तक चली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में संघ ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया कि वह अपनी सांगठनिक संरचना में बदलाव करने जा रहा है. इंडिया टुडे ने इस बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट पहले ही की थी. जिन बदलावों की बात इंडिया टुडे ने की थी, उनकी पुष्टि अब संघ ने औपचारिक तौर पर कर दी है.
इस विषय के अलावा अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर संघ की सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था यानी प्रतिनिधि सभा की बैठक में विस्तृत चर्चा हुई. आम तौर पर प्रतिनिधि सभा की बैठक में पिछले वर्ष के कार्यों की समीक्षा, भविष्य की योजनाएं और रणनीतिक बदलावों पर मंथन होता है. इस बार की सभा में संगठनात्मक विस्तार, गुणवत्ता संवर्धन, पंच परिवर्तन, सामाजिक समरसता और ढांचागत सुधार जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई.
बैठक में संघ की संगठनात्मक संरचना में बदलाव पर महत्वपूर्ण विचार हुआ. वर्तमान में 46 प्रांत हैं, लेकिन विकेंद्रीकरण के तहत प्रांत की जगह छोटी इकाइयां 'संभाग' बनाने का प्रस्ताव है. इससे 80 से अधिक संभाग बन जाएंगे. संघ की सोच यह है कि इससे जमीनी स्तर पर कार्य को और मजबूती मिलेगी. संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले कहा कि संरचना में विकेंद्रीकरण पर चर्चा हुई है और इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. संघ पदाधिकारियों की मानें तो इस प्रस्ताव को प्रतिनिधि सभा से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है और अगले साल तक इसे लागू किया जा सकता है.
बैठक के समापन पर होसबाले ने पत्रकारों से संवाद में कहा कि संघ का विस्तार राष्ट्रीय विचार के विस्तार का प्रतीक है. बैठक में संघ और उसके आनुषंगिक संगठनों के 1,487 प्रतिनिधि शामिल हुए. इस बैठक में संघ के सांगठनिक विस्तार पर जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, उसमें कहा गया कि पिछले वर्ष में संघ के कार्य में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. शाखाओं की संख्या लगभग 6,000 की बढ़ोतरी के साथ 88,000 से अधिक हो गई है. वहीं शाखाओं के स्थानों की संख्या बढ़कर 55,000 के पार चली गई है.
इस दौरान साप्ताहिक मिलन और मंडलियों की संख्या भी बढ़ी है. संघ ने इस बैठक में विशेष तौर पर इस बात को रेखांकित किया कि उसका विस्तार अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और वैसे जनजातीय इलाकों में भी हो रहा है, जहां पहले संघ की उपस्थिति न के बराबर थी. इस बैठक में बताया गया कि अंडमान के 9 प्रमुख द्वीपों पर सरसंघचालक की उपस्थिति में हिंदू सम्मेलन में 13,000 से अधिक लोग शामिल हुए. अरुणाचल प्रदेश में 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37,000 से ज्यादा लोगों ने भाग लिया.
संघ के एक पदाधिकारी इस बारे में बताते हैं, "शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में यह विस्तार स्पष्ट तौर पर दिखा. हमारे गृहसंपर्क अभियान ने कई राज्यों में 10 करोड़ से अधिक घरों तक पहुंच बनाई."
वहीं होसबाले ने बताया, "विस्तार के साथ गुणवत्ता संवर्धन भी जरूरी है. पंच परिवर्तन- सामाजिक सद्भाव, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी भावना और नागरिक कर्तव्य- के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा रहा है. हिंदुत्व केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन शैली है, जिससे समाज में गुणवत्ता का विस्तार होना चाहिए."
इस बार की प्रतिनिधि सभा में गौ सेवा, ग्राम विकास और पर्यावरण को लेकर भी योजनाएं बनीं. बैठक में यह तय किया गया है कि नागरिकों को इस बात के लिए प्रेरित किया जाएगा कि वे घर की छत पर सब्जी उगाएं और देसी गोबर-गौमूत्र की खाद का उपयोग करें. इस बैठक में 'हरित घर' बनाने का संकल्प भी लिया गया, जिसमें पॉलीथीन का कम से कम उपयोग हो. बैठक में यह भी तय किया गया कि संघ कार्यकर्ताओं के लिए अगले एक साल में 11 क्षेत्रीय वर्ग और एक नागपुर वर्ग सहित कुल 96 प्रशिक्षण वर्ग संचालित किए जाएंगे.
इस बैठक में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किए जाने की उम्मीद लगाई जा रही थी, क्योंकि आम तौर पर प्रतिनिधि सभा की हर बैठक में ऐसा होता है. लेकिन इस बार की प्रतिनिधि सभा बैठक में ऐसा नहीं किया गया.

