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मस्जिद में मंदिर खोजने वालों को RSS प्रमुख ने दूसरी बार क्या दी नसीहत?

दिसंबर की 19 तारीख को पुणे में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि वे ऐसे मुद्दे उठाकर हिंदुओं के नेता बन जाएंगे

आरएसएस चीफ मोहन भागवत
आरएसएस चीफ मोहन भागवत
अपडेटेड 20 दिसंबर , 2024

दिसंबर की 19 तारीख को पुणे में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने देशभर में उठाए जा रहे मंदिर मस्जिद विवाद को लेकर चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि वे ऐसे मुद्दे उठाकर हिंदुओं के नेता बन जाएंगे.

भागवत ने आगे कहा कि ये सही नहीं है. पूरी दुनिया को ये संदेश देने की जरूरत है कि भारत एक समावेशी और सद्भाव वाला समाज है. हम लंबे समय से एक साथ मिलजुलकर रह रहे हैं. हमें दुनिया में सद्भावना वाले समाज का एक मॉडल बनना है.

हर दिन नया मामला उठाना समाज के लिए सही नहीं 

पुणे में सहजीवन व्याख्यानमाला में भारत विश्वगुरु पर व्याख्यान देते हुए भागवत ने ये बातें कहीं. उन्होंने किसी विशेष स्थान का नाम लिए बिना कहा कि हर दिन एक नया विवाद उठाने की इजाजत किसी को कैसे दी जा सकती है? हाल के दिनों में मंदिरों का पता लगाने के लिए मस्जिदों के सर्वेक्षण की कई मांगें अदालतों में पहुंची हैं.

अपने भाषण में भागवत ने किसी का नाम लिए बिना इस तरह के विवाद उठाने को गलत बताया. साथ ही, रामकृष्ण मिशन में क्रिसमस मनाने पर उन्होंने कहा कि केवल हम ही ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि हम हिंदू हैं.

हिंदुओं के आस्था का मामला, इसलिए अयोध्या में राम मंदिर बना

भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर इसलिए बनाया गया क्योंकि यह सभी हिंदुओं की आस्था से जुड़ा मामला था. अयोध्या का मामला किसी भी तरह से राजनीति से प्रभावित नहीं था. अब अयोध्या की तरह दूसरी जगहों पर विवाद पैदा करने की प्रक्रिया इसी तरह जारी नहीं रह सकता.

उन्होंने कहा कि भारतीयों को पिछली गलतियों से सीखना चाहिए और अपने देश को दुनिया के लिए एक आदर्श बनाने की दिशा में काम करना चाहिए. हालांकि, भागवत ने हाल के दिनों में जिन जगहों पर मंदिर-मस्जिद से जुड़े विवाद हुए हैं, उनमें से किसी भी जगह का नाम नहीं लिया.

कुछ विदेशी लोग देश में पुराने शासन को बहाल करने की कोशिश कर रहे

भागवत ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि हाल के दिनों में पता चला है कि कुछ विदेशी ताकतें दृढ़ संकल्प लेकर आए हैं कि भारत में अपने पुराने शासन को बहाल करके रहेंगे. लेकिन, उन्हें ये नहीं पता कि अब देश संविधान के अनुसार चलता है. इस व्यवस्था में लोग अपने पसंदीदा नेता को चुनते हैं, जो नेता सरकार चलाते हैं. आधिपत्य के दिन चले गए हैं.

मुगल सम्राट ने भी बाद में राम मंदिर हिंदुओं को देने का फैसला किया

मुगल साम्राज्य के दो उदाहरण देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि मुगल सम्राट औरंगजेब की पहचान कट्टर शासक के रूप में होती है. हालांकि, उसी के वंशज बहादुर शाह जफर ने 1857 में गोहत्या पर रोक लगा दी थी.

उन्होंने कहा, यह तय किया था कि अयोध्या में राम मंदिर हिंदुओं को दिया जाना चाहिए. बाद में अंग्रेजों ने इसे भांप लिया. दोनों समुदायों के बीच दरार पैदा करने के लिए अंग्रेजों ने ऐसा होने से रोक दिया. तब से दोनों समुदाय के बीच भेदभाव बढ़ती चली गई. इसी का परिणाम था कि बाद में पाकिस्तान अस्तित्व में आया.

पहले भी मस्जिदों में शिवलिंग खोजने पर जता चुके हैं नाराजगी

3 जून 2022 को नागपुर में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इस मामले में विवाद बढ़ने पर कहा था, "इतिहास में हुई गलतियों को भुलाकर हिंदुओं को हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग नहीं ढूंढना चाहिए."

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