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विधानसभा चुनाव 2023 : किस राज्य में कौन सी 'रेवड़ियां' जनता को पसंद आईं?

ताजा विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा कांग्रेस के चुनावी वादों को लेकर उस पर 'रेवड़ी कल्चर' को बढ़ावा देने का आरोप लगा रही थी लेकिन खुद उसके घोषणा पत्र में ऐसे कई वादे शामिल थे

जब घोषणापत्र जारी करने की बात आई तो भाजपा ने भी अपनी सूची में 'रेवड़ियों' की कोई कमी नहीं बरती
अपडेटेड 3 दिसंबर , 2023

राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तेलंगाना के नतीजे करीब-करीब साफ हो चुके हैं. जहां राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा ने बाजी मारती दिख रही है तो तेलंगाना में कांग्रेस को जश्न मनाने का मौका मिल रहा है. चुनाव के पहले राजनीतिक पार्टियों के बीच 'रेवड़ी' कल्चर को लेकर काफी बहस हुई थी.

जहां भाजपा ने कांग्रेस के मैनिफेस्टो को 'मुफ्तखोरी' का नमूना बताया तो वहीं कांग्रेस ने 'जनता पहले' के अपने स्टैंड को प्रमोट किया. लेकिन जब घोषणापत्र जारी करने की बात आई तो भाजपा ने भी अपनी सूची में 'रेवड़ियों' की कोई कमी नहीं बरती. सिलसिलेवार ढंग से देखिए कि किस पार्टी ने कहां-कहां किस 'रेवड़ी' का वादा किया और जनता को किसकी 'रेवड़ी' ज्यादा मीठी लगी.

राजस्थान 

रुझानों के मुताबिक राजस्थान में बीजेपी ने बहुमत की फिनिशिंग लाइन को पहले क्रॉस किया. उसके घोषणापत्र में महिला उत्थान को लेकर कई वादे शामिल थे. चाहे वो महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रत्येक जिले में महिला थाना हो या 6 लाख ग्रामीण महिलाओं को ट्रेनिंग की बात, ऐसा लगता है कि जनता ने इसे हाथों-हाथ लिया. इसके अलावा  राजस्थान में बीजेपी ने पांच साल में ढाई लाख युवाओं को सरकारी नौकरी और केजी से पीजी तक की पढ़ाई फ्री में जैसी बातें भी अपने घोषणापत्र में शामिल की थीं. 

वहीं कांग्रेस ने अपने स्टेपल नौकरी वाले वादे को राजस्थान में भी बरकरार रखा और 10 लाख नौकरियों की बात की थी. इसके अलावा अशोक गहलोत की ब्रांडेड 'चिरंजीवी स्कीम' के लिमिट को भी 25 से बढ़ाकर 50 लाख करने की घोषणा की गई थी लेकिन शायद जनता को लुभाने में ये उतनी सफल नहीं हो पाईं. 

मध्य प्रदेश 

नतीजों से पहले मीडिया में मध्य प्रदेश को लेकर सबसे ज्यादा अनिश्चितता दिख रही थी मगर सीएम शिवराज सिंह चौहान की असंख्य सभाओं और 'लाडली बहना योजना' ने गेंद उनके पाले में पार्क कर दी. कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार की 'लाडली बहना योजना' को उनकी जीत के लिए बड़ा फैक्टर माना. इसके अलावा बीजेपी ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर और जबलपुर में मेट्रो और गरीब परिवार के बच्चों के लिए 12वीं तक की शिक्षा फ्री करने की बात अपने मैनिफेस्टो में शामिल की थी. 

कांग्रेस ने भी एमपी के लिए जारी किए गए घोषणापत्र में नारी सम्मान निधि योजना और पुरानी पेंशन योजना जैसे वादों को शामिल किया था. इसके अलावा उन्होंने इंदिरा गृह ज्योति योजना के अंतर्गत 100 यूनिट माफ और 200 यूनिट तक हाफ दर पर बिजली और मध्य प्रदेश की आईपीएल टीम बनाने जैसी बातें कही थीं मगर शायद वर्ल्ड कप फाइनल की हार के गम में जनता ने इन योजनाओं को बाईपास कर दिया.

छत्तीसगढ़

सभी कयासों को धता बताते हुए बीजेपी छत्तीसगढ़ में भी बहुमत का आंकड़ा पार करती दिख रही है. उम्मीदों से आगे बढ़कर आई इस सफलता के पीछे भी कहीं न कहीं उनके 'रेवड़ी लिस्ट' का हाथ है. जहां एक लाख खाली सरकारी पदों को 2 साल में भरने की बात बीजेपी ने की तो वहीं विद्यार्थियों को मासिक यात्रा भत्ता, किसानों की धान की खरीद में बढ़ोतरी और महतारी वंदन योजना के तहत विवाहित महिलाओं को 1 हजार रुपए मासिक और 12 हजार रुपए सालाना जैसी बातों को भी जनता ने खूब पसंद किया. 

छत्तीसगढ़ में चुनाव से पहले जीत को लेकर लगभग आश्वस्त लग रही बघेल सरकार ने कांग्रेस की 'आप स्टाइल नीतियों' जैसे 200 यूनिट मुफ्त बिजली और डॉ खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के कवर बढ़ाने का वादा किया था. इसके अलावा धान की खरीद पर भी कांग्रेस ने प्रति क्विंटल दाम बढ़ाने की बात की थी. मगर बघेल सरकार की 'कॉन्फिडेंट स्ट्राइड' को जनता ने तवज्जो ना देते हुए उससे पीठ फेर ली. 

तेलंगाना 

तेलंगाना इकलौता ऐसा राज्य रहा जहां कांग्रेस पार्टी को पटाखे फोड़ने के मौके मिल रहे हैं. चुनाव से पहले अपने 42 पन्नों वाले घोषणापत्र 'अभय हस्तम' जारी करते हुए पार्टी के राज्य प्रमुख रेवंत रेड्डी ने कहा था कि तेलंगाना के लोगों का रुख है कि ‘चाहे जो हो’ कांग्रेस को सत्ता में लाया जाए. इस घोषणापत्र में कांग्रेस ने महिलाओं को 2,500 रुपये प्रति माह और 500 रुपये में गैस सिलेंडर के साथ-साथ सभी घरों में 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था. साथ ही ‘रायतू भरोसा’ के तहत पार्टी ने हर साल किसानों को 15,000 रूपये की निवेश सहायता देने की भी बात की थी. 

बीजेपी ने तेलंगाना में अपना फोकस समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे ध्रुवीकरण करने वाले मुद्दे पर रखते हुए कहा था कि सरकार बनने के छह महीने के भीतर यूसीसी के लिए कानून लाएगी. इसके अलावा पार्टी ने ​केसीआर सरकार के ख‍िलाफ जांच और अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण में तेजी लाने का वादा किया था. ​छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप देने जैसी रेवड़ी भी बीजेपी के मैनिफेस्टो में शामिल थी. 

इन दोनों के अलावा तेलंगाना की सत्ताधारी पार्टी बीआरएस ने अपने घोषणापत्र में दिव्यांगों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन 6 हजार रुपये करने का वादा किया था. इसके साथ ही पार्टी ने प्रति परिवार 10 लाख रुपये अनुदान की 'दलित बंधु' योजना को जारी रखने की बात कही थी. 

साफ हो रहा है कि 'रेवड़ी कल्चर' को लेकर इतनी बहस के बाद भी इसके योगदान को नकारा नहीं जा सकता. इसके साथ ही 2024 चुनावों को लेकर भी ये नतीजे ऐसे ही संकेत दे रहे हैं कि वहां भी घोषणापत्र में रेवड़ियों की मिठास कम नहीं होने वाली है.

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