scorecardresearch

IRCTC की वेबसाइट बदलेगी, रेलवे की सबसे बड़ी दिक्कत नहीं!

नई IRCTC वेबसाइट बुकिंग से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों को कम कर सकती है लेकिन रेलवे ट्रेनों की कमी के कारण जिन समस्या का सामना कर रहा है उसका हल मुश्किल है

रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने IRCTC वेबसाइट रीलॉन्च की घोषणा की
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने IRCTC वेबसाइट रीलॉन्च की घोषणा की
अपडेटेड 19 जून , 2026

हाल ही में रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जयपुर के मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) के एक छात्र की शिकायत पर बड़ा फैसला लिया है. टिकट बुकिंग के दौरान CAPTCHA की परेशानी, OTP में देरी और पेमेंट फेल होने जैसी समस्याओं को लेकर मिली शिकायत के बाद उन्होंने नई वेबसाइट लॉन्च करने की घोषणा की है.

15 जुलाई तक IRCTC की नई वेबसाइट लॉन्च की जाएगी. एक शिकायत पर रेलवे मंत्री ने जिस तेजी से फैसला लिया, उसे डिजिटल युग में जवाबदेह शासन का उदाहरण माना जा रहा है. यही वजह है कि इस खबर को लगभग सभी प्रमुख मीडिया संस्थानों ने प्रमुखता से कवर किया.

पिछले एक दशक में जब भी टिकट बुकिंग व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं, रेलवे ने लगभग इसी तरह के तकनीकी समाधान पेश किए हैं. ऐसे में असली सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या भारतीय रेलवे के टिकटिंग सिस्टम में होने वाले इस बदलाव से सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगी?

यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) सिर्फ एक सरकारी वेबसाइट नहीं है बल्कि यह रेलवे की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक डिजिटल संपत्तियों में से एक है. पिछले साल दिसंबर में संसद में दिए गए एक जवाब के मुताबिक, आरक्षित रेलवे टिकटों में से लगभग 90 फीसद अब ऑनलाइन बुक होते हैं.

करोड़ों यात्रियों के लिए रेलवे यात्रा की शुरुआत फोन या कंप्यूटर की स्क्रीन पर IRCTC के अनुभव से होती है. टिकट बुकिंग का यह अनुभव अक्सर ट्रेन के प्लेटफॉर्म तक पहुंचने से पहले ही भारतीय रेलवे के बारे में लोगों की राय बना देता है.

हर सरकार ने इस वास्तविकता को समझा है. आरक्षण प्रणाली में कई बार अपग्रेड, क्षमता विस्तार और नया डिजाइन लाया गया. बुकिंग क्षमता बढ़ाने के लिए नेक्स्ट जेनरेशन ई-टिकटिंग सिस्टम लागू किया गया. इसके बाद 2017 में रेल कनेक्ट मोबाइल ऐप आया. दिसंबर 2020 में रेलवे ने नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप लॉन्च किया, जिसे तेज, उपयोग में आसान और ग्राहक-अनुकूल बताया गया.

संसद में दिए गए एक अन्य जवाब में रेलवे ने बताया कि नए प्लेटफॉर्म को लॉन्च करने के बाद यात्रियों को कई नए और आसान विकल्प मिले. इनमें कौन सी ट्रेन किस प्लेटफॉर्म पर आ रही है, इसकी जानकारी, AI आधारित स्टेशन सुझाव, वेटिंग लिस्ट की भविष्यवाणी और रिफंड की बेहतर पारदर्शिता जैसी सुविधाएं दी गईं.

इसी जवाब में यह भी बताया गया कि नेक्स्ट जेनरेशन ई-टिकटिंग सिस्टम लागू होने के बाद बुकिंग क्षमता लगभग 2,000 टिकट प्रति मिनट से बढ़कर 25,000 टिकट प्रति मिनट से अधिक हो गई. 5 मार्च 2020 को एक मिनट में रिकॉर्ड 26,458 टिकट बुक किए गए. लेकिन असली मुद्दा यह नहीं है.

वेबसाइट का नया डिजाइन टिकट बुकिंग प्रक्रिया को आसान बना सकता है लेकिन वह ट्रेनों की कमी के कारण हो रही समस्या का निदान नहीं कर सकता. भारतीय रेलवे के अपने डॉक्यूमेंट एक गहरी समस्या की ओर इशारा करते हैं. नेशनल रेल प्लान इसलिए शुरू किया गया था कि क्षमता की कमी और भीड़भाड़ को दूर किया जा सके.

इसमें कहा गया है कि नेटवर्क का 40 फीसद से ज्यादा हिस्सा 80 फीसद से ज्यादा क्षमता पर चल रहा है. हाई डेंसिटी नेटवर्क (देश के सबसे व्यस्त पैसेंजर और मालगाड़ी वाले रूट) पहले से ही भारी दबाव में हैं. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और मल्टी-ट्रैकिंग जैसी परियोजनाएं भी इसी समस्या से निपटने के लिए शुरू की गईं क्योंकि प्रमुख मार्गों पर डिमांड उपलब्ध क्षमता से अधिक हो चुकी है.

समस्या सिर्फ पटरियों तक सीमित नहीं है. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्टों ने स्टेशनों, टर्मिनलों, पिट लाइनों और स्टेबलिंग सुविधाओं में भी बाधाओं की ओर इशारा किया है. कई प्रमुख मार्गों पर समस्या केवल टिकट पाने की नहीं बल्कि यह है कि बर्थ चाहने वाले यात्रियों की संख्या उपलब्ध सीटों से कहीं अधिक है.

यही कारण है कि कुछ पसंदीदा ट्रेनों में खासकर तत्काल बुकिंग और व्यस्त यात्रा सीजन में कन्फर्म टिकट पाना मुश्किल बना रहता है. बेहतर वेबसाइट बनाने से टिकट बुक करने के दौरान होने वाली समस्या खत्म हो जाएगी लेकिन इससे सीटों की कमी की समस्या बनी रहेगी.

यह समस्या बहुत बड़ी है. संसद को बताया गया कि 2018-19 में IRCTC ऐप के जरिए 49 करोड़ से अधिक यात्रियों ने टिकट बुक किए थे. 2019-20 में यह संख्या बढ़कर 52 करोड़ से अधिक हो गई लेकिन सुविधाओं और विस्तार के बावजूद यात्रियों की शिकायतें पूरी तरह खत्म नहीं हुईं.

ज्यादातर शिकायतें CAPTCHA, दोबारा सत्यापन, OTP में देरी, ट्रांजेक्शन फेल होने और तत्काल बुकिंग के समय वेबसाइट के धीमे होने को लेकर रही हैं. इनमें से कोई भी शिकायत नई नहीं है. तकनीकी बदलावों और नए संस्करणों के हर दौर में ये शिकायतें सामने आती रही हैं.
 
अक्सर लोग यह नहीं जानते कि वेबसाइट और उसे चलाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी IRCTC की ज्यादातर आलोचनाओं की असली वजह रेलवे की सॉफ्टवेयर कंपनी सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) होती है जो बैकएंड सिस्टम संभालती है.
 
रेलवे पहले से ही अपनी टिकटिंग प्रणाली को बड़े स्तर पर अपग्रेड करने की कोशिश कर रहा है. स्मार्टफोन, मोबाइल ऐप और AI इंटरफेस के कारण आम लोगों के लिए रेलवे आरक्षण तक समान पहुंच का विचार नया और मुश्किल नहीं है.
 
CAG ने अपनी रिपोर्ट संख्या 34 (2010-11) में तत्काल और अग्रिम आरक्षण प्रणाली का विशेष ऑडिट किया था और एक चौंकाने वाला निष्कर्ष निकाला था. ऑडिट में पाया गया कि पहले से टिकट बुक किए जाने वाले सिस्टम में हेरफेर की संभावना थी और आम लोगों के लिए इसका इस्तेमाल करना आसान नहीं था.
 
CAG ने देखा कि तत्काल टिकट बुकिंग शुरू होते ही कुछ मिनटों में कोटा खत्म हो जाता था. अनियमित बुकिंग, तय समय के बाहर बुकिंग और एजेंटों व रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत जैसी समस्याएं सामने आईं, जिससे योजना का उद्देश्य प्रभावित हुआ. टिकटों की अवैध जमाखोरी के डर और CAG की टिप्पणियों के कारण नीति निर्माताओं ने ऐसे सिस्टम लागू किए जो उपयोगकर्ता अनुभव और टिकट खरीदने की सुविधा के लिहाज से आदर्श थे.
 
ऑडिट ने आरक्षण की समस्या को केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि पहुंच, निष्पक्षता और नियंत्रण का मुद्दा बताया. पहले शिकायतें आरक्षण काउंटरों और बुकिंग क्लर्कों को लेकर होती थीं. आज CAPTCHA, OTP और पेमेंट गेटवे को लेकर होती हैं लेकिन मूल चिंता वही है. यात्रियों को डर रहता है कि कहीं कोई दूसरा उनसे पहले टिकट न ले जाए.
 
सरकार ने कई बार निष्पक्षता और दुरुपयोग रोकने को ट्रेनों की संख्या बढ़ाने से ज्यादा महत्व दिया है. इस साल संसद में दिए गए जवाबों में रेलवे ने आधार सत्यापन, OTP आधारित जांच, एंटी-बॉट सिस्टम, उपयोगकर्ता पुनः सत्यापन और एजेंटों पर सीमाओं जैसे उपायों का उल्लेख किया.
 
जुलाई 2025 में IRCTC की वेबसाइट और ऐप पर केवल आधार से रजिस्टर्ड उपयोगकर्ताओं को ही तत्काल टिकट खरीदने की अनुमति दी गई. एजेंटों को आज भी बुकिंग शुरू होने के पहले 30 मिनट तक टिकट बुक करने की अनुमति नहीं है.
 
हालांकि इन उपायों से यात्रियों का अनुभव जटिल हो जाता है लेकिन CAPTCHA, OTP, आधार सत्यापन और एंटी-बॉट सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं दुरुपयोग रोकने के लिए बनाई गई हैं. समस्या यह है कि निष्पक्षता बढ़ाने के लिए जो भी अतिरिक्त लेयर जोड़ी जाती है, वह वास्तविक उपयोगकर्ताओं के लिए कुछ न कुछ परेशानी भी पैदा करती है. इसका नतीजा ये होता है कि प्लेटफॉर्म को एक साथ दो मोर्चों पर लड़ना पड़ता है. पहला प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकना और यात्रियों की नाराजगी दूर करना.
 
यह तनाव सबसे अधिक तत्काल बुकिंग में दिखाई देता है. किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर देरी होना परेशान कर सकता है लेकिन तत्काल बुकिंग में वही देरी यात्रा करने और न कर पाने की वजह बन जाती है. जब टिकट कुछ मिनटों में खत्म हो जाती हैं, तब कुछ सेकंड की देरी भी मायने रखती है. ऐसे में धीमा पेज, देर से आया OTP या ट्रांजेक्शन फेल होना केवल असुविधा नहीं, बल्कि टिकट तक पहुंच में बाधा बन जाता है.
 
रेलवे का कहना है कि स्थिति उतनी खराब नहीं है जितनी लोग समझते हैं. दिसंबर 2025 में संसद में दिए गए एक लिखित जवाब के मुताबिक, 2024-25 में IRCTC वेबसाइट का अपटाइम 99.86 फीसद और अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच 99.98 फीसद रहा.
 
एक अन्य जवाब में कहा गया कि अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच रेल कनेक्ट और रेल वन ऐप्स के जरिए हुई बुकिंग में शिकायतों की संख्या कुल बुकिंग का केवल 0.0009 फीसद थी. सरकार ने यह भी कहा कि 90 फीसद से अधिक रिफंड उसी दिन इनिशिएट कर दिए जाते हैं.
 
पारंपरिक तकनीकी मानकों के हिसाब से ये आंकड़े एक बेहद स्थिर और मजबूत प्लेटफॉर्म की तस्वीर पेश करते हैं. लेकिन नाराजगी उन कुछ मिनटों में सामने आती है जब भारी संख्या में लोग एक साथ टिकट बुक करने की कोशिश करते हैं. समस्या यह नहीं कि सिस्टम पूरे दिन खराब रहता है, बल्कि यह है कि वह उन कुछ महत्वपूर्ण मिनटों में उम्मीद के मुताबिक काम नहीं करता जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है.
 
सरकार के मुताबिक, ई-टिकटिंग सिस्टम की आधारभूत संरचना को सर्वर, स्टोरेज, सॉफ्टवेयर, नेटवर्किंग और सुरक्षा के स्तर पर अपग्रेड किया जा रहा है ताकि क्षमता और ग्राहक अनुभव बेहतर हो सके. भारतीय रेलवे के लिए यह केवल एक अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि आवश्यकता है.
 
अगले बड़े अपग्रेड में तेज बुकिंग, तेज पूछताछ सेवाएं, सीट चयन विकल्प, किराया कैलेंडर और बहुभाषी सहायता जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. ये बदलाव प्लेटफॉर्म को बेहतर बना सकते हैं लेकिन ऐसी कई व्यापक सुधार पहले भी विभिन्न री-लॉन्च के दौरान किए जा चुके हैं.
 
इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि IRCTC भारत के सार्वजनिक डिजिटल ढांचे में एक विशेष भूमिका निभाता है. रेलवे प्रणाली से जुड़ने का यह करोड़ों नागरिकों का पहला माध्यम है. यही वह जगह है जहां डिजिटलीकरण की संभावनाएं और समय की मांग एक-दूसरे से टकराती हैं.
 
अगर नया प्लेटफॉर्म सफल रहा तो यात्री इसका फर्क तुरंत महसूस करेंगे. तत्काल बुकिंग की प्रक्रिया अधिक सुगम होगी. ट्रांजेक्शन फेल होने की संभावना कम होगी. कम लोगों को CAPTCHA जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ेगा और उपलब्ध बर्थ की जानकारी वास्तविक समय में बेहतर तरीके से मिल सकेगी.

Advertisement
Advertisement