भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील क्यों नहीं हो पा रही है? इस सवाल का जवाब अब आधिकारिक तौर पर अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने दिया है. खबर है कि दोनों देशों के बीच समझौता नहीं हो पाने की असल वजह बयानबाजी, व्यापार या पॉलिसी नहीं है, बल्कि कुछ और है.
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ट्रंप को फोन नहीं किया, इसलिए डील नहीं हो पाई. लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में कहा, "मैंने डील सेट की थी. इसके लिए मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप को फोन करना था, लेकिन उन्होंने फोन नहीं किया."
क्या ट्रंप के अहंकार को चोट पहुंचने के कारण दोनों देशों के रिश्ते खराब हुए?
अमेरिका वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कुछ ऐसा ही कहा है. बतौर लुटनिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जरिए व्यक्तिगत रूप से ट्रंप को फोन कॉल नहीं करने और उनकी बात नहीं मानने के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति के अहं को ठेस पहुंची. भारत को इसकी कीमत 50 फीसद भारी टैरिफ के रूप में चुकानी पड़ी और ऐसा लगता है कि अभी और टैरिफ बढ़ाए जा सकते हैं.
सबकुछ तय होने के बावजूद पीएम मोदी ने ट्रंप को कॉल क्यों नहीं किया?
लुटनिक ने दावा किया कि पूरा व्यापार समझौता तैयार था. अमेरिका की ओर से भारत को बातचीत को अंतिम रूप देने के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध समय सीमा तीन हफ्ते तक की दी गई थी. हालांकि, भारत सरकार इस समय-सीमा से सहमत नहीं थी. उन्हें कई पॉइंट पर नाराजगी थी, जिसपर बात के लिए पीएम मोदी को कॉल करना था. हालांकि, उन्होंने ऐसा नहीं किया.
लुटनिक ने कहा, "पीएम मोदी के कॉल नहीं करने का परिणाम ये हुआ कि भारत को वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों ने पीछे छोड़ दिया, जो कभी बातचीत की कतार में उससे पीछे थे. इतना ही नहीं हमने फिलीपींस और वियतनाम के साथ व्यापार समझौते किए, जबकि हमें उनसे पहले भारत के साथ व्यापार समझौते की उम्मीद की थी."
भारत ने अमेरिकी मंत्री के इस बयान पर क्या जवाब दिया है?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत दोनों देशों के बीच एक पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौता चाहता है. इसपर बातचीत को भारत आगे बढ़ाना चाहता है और इसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए उत्सुक है."
उन्होंने लुटनिक के बयान को गलत बताते हुए यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में करीब 8 बार फोन पर बात की है, जिसमें उन्होंने दोनों देशों के संबंधों और साझेदारी पर चर्चा की है. ऐसे में यह दावा सही नहीं है कि पीएम मोदी ने ट्रंप से बात नहीं की है.
क्या कृषि और डेयरी इंडस्ट्री से जुड़े सभी बातों पर दोनों देशों में सहमति बन गई थी?
इस बारे में लुटनिक ने अपने इंटरव्यू में कुछ खुलकर नहीं कहा है. हालांकि, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर महीनों से बातचीत चल रही है, लेकिन इसमें कोई खास प्रगति नहीं हुई है. अब तक यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि भारत द्वारा अमेरिका को अपने कृषि बाजार तक व्यापक पहुंच देने की अनिच्छा के कारण बातचीत रुकी हुई है. लेकिन, अब यह स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री मोदी के जरिए ट्रंप के अहंकार को संतुष्ट नहीं कर पाना ही इस डील में सबसे बड़ी बाधा साबित हुई है.
दोनों देशों के बीच आगे कोई डील होने की कब तक और कितनी संभावना है?
लुटनिक ने यह भी खुलासा किया कि जिन शर्तों के तहत भारत और अमेरिका ने व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया था, वे अब विचाराधीन नहीं हैं. अमेरिकी वाणिज्य सचिव ने कहा, "अमेरिका उस व्यापार समझौते से पीछे हट गया है जिस पर हम पहले सहमत हुए थे. हम अब इसके बारे में नहीं सोच रहे हैं."
उन्होंने भारत के दृष्टिकोण की तुलना ब्रिटेन के दृष्टिकोण से की. इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि ब्रिटेन के साथ समझौते की समय सीमा नजदीक आने पर प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने व्यक्तिगत रूप से ट्रंप को फोन किया. उसी दिन समझौता हो गया और अगले दिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी औपचारिक घोषणा की गई.
एक व्यापारी का उदाहरण देते हुए लुटनिक ने कहा कि भारत उस स्थिति को फायदा उठाने में असफल रहा है, जहां इरादे के बजाय समय निर्णायक हो जाता है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देरी का मुख्य कारण भारत की आंतरिक राजनीतिक और संसदीय प्रक्रियाओं की जटिलता है. हालांकि, लुटनिक ने संकेत देते हुए कहा, "संभावनाएं अभी भी खुली हैं और मुझे उम्मीद है भारत इसका समाधान निकाल लेगा."
क्या दोनों नेताओं के बीच पहले भी ऐसा मामला सामने आया है?
हां, यह पहला मौका नहीं है, जब दोनों नेताओं के बीच फोन कॉल को लेकर इस तरह की बातें सामने आई हों. पिछले साल न्यूयॉर्क टाइम्स और एक जर्मन अखबार की रिपोर्टों में दावा किया गया था कि ट्रंप ने जुलाई में मोदी को चार बार फोन किया था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से बात करने से इनकार कर दिया था.
यह घटना ऐसे समय हुई, जब भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव तब पैदा हो गया. इसके बाद ही ट्रंप ने भारत के जरिए रूसी तेल की खरीद पर अतिरिक्त 25 फीसद टैरिफ लगा दिया, जिससे कुल टैरिफ 50 फीसद हो गया. हालांकि लुटनिक ने इस घटना का जिक्र अपने इंटरव्यू में नहीं किया.
भारत ने तब भी ट्रंप के अहंकार को ठेस पहुंचाया, जब प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के उस दावे को गलत बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम उनकी मध्यस्थता से हुआ था. इतना ही नहीं कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार की महत्वाकांक्षाओं का समर्थन नहीं किया, जिससे वे नाराज हो गए. हालांकि, पाकिस्तान ने इस अवसर का फायदा उठाया और अमेरिका के साथ उसके संबंधों में सुधार आया.

